मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता, 166 बड़े जलाशयों में जल भंडारण घटकर 27.5% पर पहुँचा, सिंचाई पर मंडराया संकट

Gaon Connection | Jun 19, 2026, 12:16 IST
Share

कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो के असर से देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण घटकर कुल क्षमता के 27.5% पर पहुँच गया है। देश में अब तक 40% कम बारिश हुई है। मध्य भारत में 62%, पूर्वोत्तर में 42% और दक्षिण भारत में 21% वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिससे खरीफ खेती और सिंचाई पर असर पड़ सकता है।

बारिश की भारी कमी  से बांधों का जलस्तर घटा
बारिश की भारी कमी से बांधों का जलस्तर घटा
देश में कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो के प्रभाव के कारण जलाशयों में पानी का स्तर लगातार घट रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण उनकी कुल क्षमता का केवल 27.5 प्रतिशत रह गया है। यह स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में भी कमजोर मानी जा रही है।

मानसून सीजन की शुरुआत से अब तक देश में केवल 48.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 80.6 मिमी होनी चाहिए थी। 18 जून तक देश में मानसून की कमी 40 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसका सीधा असर जलाशयों, सिंचाई व्यवस्था और खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ने की आशंका बढ़ा रहा है।

केवल हर पाँच में से एक जलाशय आधे से ज्यादा भरा

रिपोर्ट के अनुसार, देश के केवल 20 प्रतिशत जलाशयों में ही आधी से अधिक क्षमता तक पानी मौजूद है। अधिकांश बांधों और जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है। तस्वीर में दिख रहा बांध भी कम जलस्तर की स्थिति को दर्शाता है, जहाँ सीमित मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है।

मध्य भारत में सबसे अधिक बारिश की कमी

खरीफ फसलों के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र मध्य भारत में वर्षा की स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहाँ सामान्य से 62 प्रतिशत कम बारिश हुई है। यह क्षेत्र धान, सोयाबीन, कपास और दालों की खेती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बारिश की कमी से किसानों की चिंता बढ़ गई है और बुवाई की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी कमजोर मानसून

पूर्व एवं उत्तर-पूर्व भारत में वर्षा सामान्य से 42 प्रतिशत कम रही है, जबकि दक्षिण भारत में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके विपरीत उत्तर-पश्चिम भारत में पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता के कारण स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही और वहाँ बारिश की कमी केवल 2 प्रतिशत रही।

सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर बढ़ सकता है दबाव

यदि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियाँ तेज नहीं हुईं तो जलाशयों का स्तर और नीचे जा सकता है। इससे खरीफ फसलों की सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका है। कृषि क्षेत्र के लिए अगले कुछ सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
Tags:
  • Reservoir Storage
  • Monsoon Deficit
  • El Nino
  • Water Crisis
  • Kharif Crops
  • Rainfall Deficiency
  • Irrigation
  • Dam Water Level
  • Central India Rainfall
  • Agriculture News India