पश्चिम एशिया संकट से बढ़ीं खाद बनाने की लागतें, सरकार देगी सब्सिडी का सहारा, सरकारी कंपनी GSFC का दावा
Gaon Connection | May 28, 2026, 16:47 IST
पश्चिम एशिया के हालिया तनावों ने भारत के उर्वरक उद्योग में एक नयी चुनौति पेश की है। अमोनिया और सल्फर जैसे कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन सरकार की किसान सहायक योजनाएँ राहत का स्रोत बनेंगी। केंद्र सरकार डीएपी और यूरिया की बढ़ती कीमतों का बोझ खुद उठा रही है।
खाद सेक्टर पर वैश्विक तनाव की मार
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के उर्वरक सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। सरकार की स्वामित्व वाली गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (GSFC) ने कहा है कि अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे कच्चे माल की कीमतों में तेज उछाल आया है। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार की सब्सिडी व्यवस्था की वजह से किसानों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। कंपनी का कहना है कि डीएपी और यूरिया जैसे प्रमुख उर्वरकों की बढ़ी हुई लागत का बोझ केंद्र सरकार खुद उठा रही है, जिससे कंपनियों के मार्जिन भी सुरक्षित रहेंगे और किसानों को महंगा खाद नहीं खरीदना पड़ेगा।
GSFC के मुख्य वित्त अधिकारी एस.के. बाजपेयी ने कंपनी की चौथी तिमाही की अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे माल के बाजार को अस्थिर कर दिया है। उन्होंने कहा कि अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड की कीमतों में अचानक आई तेजी चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सल्फर की कीमत करीब 850 डॉलर प्रति टन तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद कंपनी को फिलहाल उत्पादन रुकने का खतरा नहीं दिख रहा।
कंपनी ने कहा कि उसके फर्टिलाइजर नगर कॉम्प्लेक्स में अमोनिया और सल्फ्यूरिक एसिड के अपने प्लांट हैं, जिससे सप्लाई संकट का असर कुछ हद तक कम हुआ है। बाजपेयी ने कहा कि अमोनिया का उत्पादन प्राकृतिक गैस से किया जा रहा है और फिलहाल प्राकृतिक गैस की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार उर्वरक और दूसरे जरूरी सेक्टरों को प्राकृतिक गैस और RLNG की सप्लाई में प्राथमिकता दे रही है।
GSFC का कहना है कि डीएपी और यूरिया उत्पादन में आने वाली अतिरिक्त लागत की भरपाई केंद्र सरकार विशेष पैकेज के जरिए कर रही है। कंपनी के मुताबिक गैस महंगी होने या डीएपी निर्माण लागत बढ़ने से जो अतिरिक्त खर्च आ रहा है, उसे सरकार रिइम्बर्स कर रही है। यानी फिलहाल कंपनियों के मुनाफे पर सीधा दबाव नहीं आएगा।
कंपनी ने दावा किया है कि उसके पास अभी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। बड़ौदा कॉम्प्लेक्स में करीब 16 हजार टन अमोनिया का स्टॉक रखा गया है, जबकि सल्फ्यूरिक एसिड टैंक भी पूरी क्षमता तक भरे हुए हैं। GSFC के मुताबिक पहली तिमाही में उत्पादन जारी रखने में कोई दिक्कत नहीं आने वाली है।
GSFC फिलहाल रिलायंस, नायरा, BPCL और IOCL जैसी कंपनियों के साथ लंबे समय के अनुबंध के जरिए सल्फर खरीद रही है। हालांकि कंपनी ने माना कि घरेलू बाजार से 100 फीसदी सप्लाई नहीं मिल पा रही है। इसी वजह से कंपनी अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रतिस्पर्धी कीमतों पर सल्फर आयात करने की भी कोशिश कर रही है, ताकि उत्पादन लगातार जारी रखा जा सके।
कंपनी ने बताया कि सिक्का यूनिट में मौजूद एक डीएपी प्रोडक्शन लाइन को अपग्रेड किया जा रहा है। इसके बाद वहां अमोनियम फॉस्फेट सल्फेट (APS) जैसे दूसरे NPK ग्रेड उर्वरकों का उत्पादन भी किया जा सकेगा। GSFC के मुताबिक यह काम जुलाई या अगस्त तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी बाजार की मांग और कच्चे माल की उपलब्धता के हिसाब से डीएपी या APS दोनों का उत्पादन कर सकेगी।
उर्वरक कारोबार पर दबाव के बीच GSFC को अपने इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स सेगमेंट से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। कंपनी ने कहा कि कैप्रोलैक्टम और बेंजीन के दामों के बीच का अंतर बढ़कर 800 डॉलर प्रति टन से ऊपर पहुंच गया है, जबकि चौथी तिमाही में यह करीब 670 डॉलर था। इससे आने वाले समय में इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स कारोबार मजबूत रहने की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2025-26 में GSFC का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 14 फीसदी बढ़कर 673 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं कंपनी का कुल राजस्व 15 फीसदी बढ़कर 10,945 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी ने चौथी तिमाही में अब तक की सबसे ज्यादा उर्वरक बिक्री भी दर्ज की, जो 1,985 करोड़ रुपये रही।