Middle East Crisis: “जैसे COVID में लड़े, वैसे ही तैयार रहें, PM मोदी की चेतावनी”
Gaon Connection | Mar 23, 2026, 16:14 IST
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का भारत पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। बेतहाशा बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, हमारे देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। इस मुद्रास्फीति के कारण आम नागरिकों का आर्थिक संतुलन बिगड़ने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
खाड़ी देशों में भारतीयों पर खतरा
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को सतर्क रहने और एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियों का असर लंबे समय तक रह सकता है और भारत को COVID जैसे समय की तरह तैयार रहना होगा। इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम भारतीयों की जेब पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल इसी क्षेत्र से आयात करता है।
युद्ध बढ़ने से तेल की कीमतों में उछाल आ रहा है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दामों पर पड़ सकता है। तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी और इसका असर धीरे-धीरे खाने-पीने की चीजों से लेकर कपड़े तक हर चीज पर दिख सकता है। इसके अलावा, बाजारों में भी अस्थिरता देखने को मिल रही है, शेयर बाजार में गिरावट, रुपये की कमजोरी और निवेशकों की चिंता बढ़ना इस बात का संकेत है कि वैश्विक तनाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई बढ़ सकती है और आम लोगों का बजट बिगड़ सकता है। खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय काम करते हैं, जिनकी कमाई भारत की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाती है। युद्ध बढ़ने पर इन लोगों की सुरक्षा, नौकरी और भारत भेजे जाने वाले पैसों पर असर पड़ सकता है, जिससे कई परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का सबसे बड़ा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में इसी क्षेत्र से आयात करता है। ऐसे में संघर्ष बढ़ने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। जब तेल महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ जाता है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों, कपड़ों और रोजमर्रा के इस्तेमाल होने वाले सामानों पर पड़ता है। यही वजह है कि आने वाले समय में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
पश्चिम एशिया में तनाव का असर भारतीय वित्तीय बाजारों पर भी साफ दिख रहा है। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई है। वहीं, रुपया भी अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। अगर यह स्थिति लंबी चली, तो इसका असर निवेश, नौकरियों और देश के आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
यह संकट सिर्फ तेल तक ही सीमित नहीं है। उर्वरक, गैस, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य जरूरी कच्चे माल की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। इससे खेती, उद्योग और उत्पादन की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने इस खतरे को देखते हुए पहले ही जरूरी संसाधनों की उपलब्धता और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
पश्चिम एशिया में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं। ये लोग हर साल अरबों डॉलर भारत भेजते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। युद्ध बढ़ने पर इन भारतीयों की सुरक्षा और रोजगार पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों भारतीय पहले ही वापस लौट चुके हैं और यह संख्या बढ़ सकती है। इससे उन परिवारों पर असर पड़ेगा जो विदेश से आने वाली कमाई पर निर्भर हैं।
स्थिति को देखते हुए सरकार लगातार उच्च स्तरीय बैठकें कर रही है। सरकार ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा को लेकर रणनीति बना रही है। पीएम मोदी ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस संकट का असर आम लोगों तक कम से कम पहुंचे। कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का यह युद्ध भारत के लिए केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं है। यह आम आदमी की जेब, रोजगार और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक खतरा बनता जा रहा है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने समय रहते चेतावनी देते हुए देश को तैयार रहने और एकजुट रहने की अपील की है, क्योंकि आने वाले दिनों में इसका असर और गहरा हो सकता है।
#WATCH | On the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, "The difficult conditions created in the world by this war are likely to have lasting effects for a long time, so we must be prepared and remain united. We have faced such challenges with unity during the… pic.twitter.com/MCv6tiqyRq
— ANI (@ANI) March 23, 2026