गेहूं किसान ध्यान दें! गेहूं बेचने का है सुनहरा मौका, सरकार ने खोला निर्यात का रास्ता, पढ़ें पूरी जानकारी
Gaon Connection | Apr 21, 2026, 12:15 IST
केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी है। इस निर्णय से किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
देशभर की मंडियों में पांच अप्रैल तक एमएसपी पर 3.49 लाख टन गेहूं की खरीद हुई
केंद्र सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को बेहतर दाम दिलाना, घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखना और गेहूं के भंडार का संतुलित प्रबंधन करना है। सरकार का कहना है कि यह फैसला उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक और बाजार कीमतों की समीक्षा के बाद लिया गया है।
जब देश में अच्छी पैदावार होती है और मंडियों में गेहूं की आवक बढ़ जाती है, तो कई बार किसानों को कम दाम मिलने लगते हैं। ऐसे समय निर्यात की अनुमति मिलने से बाजार में अतिरिक्त मांग बनती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें नुकसान से बचाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
रबी सीजन 2026 में गेहूं की खेती का रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह 328.04 लाख हेक्टेयर था। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि किसानों का गेहूं की खेती पर भरोसा मजबूत हुआ है। इसका बड़ा कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), सरकारी खरीद व्यवस्था और समय पर नीति समर्थन माना जा रहा है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, वर्ष 2025-26 में गेहूं उत्पादन का अनुमान 1202 लाख मीट्रिक टन लगाया गया है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो देश में गेहूं का पर्याप्त भंडार रहेगा। इसी मजबूत उत्पादन स्थिति को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त निर्यात को मंजूरी दी है।
सरकार के मुताबिक, इस फैसले से कई सकारात्मक असर देखने को मिल सकते हैं:
1. बाजार में तरलता बढ़ेगी- निर्यात से व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और मंडियों में बेहतर लेनदेन होगा।
2. भंडारण पर दबाव घटेगा- अच्छी पैदावार के समय सरकारी और निजी भंडार पर दबाव कम होगा।
3. किसानों को संकट बिक्री से राहत- कटाई के समय किसान अक्सर तुरंत बेचने को मजबूर होते हैं। निर्यात से अतिरिक्त मांग बनने पर उन्हें बेहतर दाम मिल सकते हैं।
4. कीमतों में संतुलन रहेगा- सरकार का मानना है कि घरेलू बाजार में भी कीमतें नियंत्रित और स्थिर बनी रहेंगी।
सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला देश की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के कारण निर्यात की अनुमति दी गई है, जिससे घरेलू जरूरतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं निर्यात की मंजूरी किसानों के लिए राहत भरी खबर है। इससे किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलने, भंडार प्रबंधन आसान होने और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में इसका असर मंडी भाव और किसानों की आय पर देखा जा सकता है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
गेहूं की बुवाई में बढ़ा किसानों का भरोसा
रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान
पहले भी मिल चुकी है निर्यात मंजूरी
- सरकार इससे पहले भी कई चरणों में गेहूं निर्यात को अनुमति दे चुकी है।
- जनवरी 2026 में 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी मिली थी।
- फरवरी 2026 में 5 एलएमटी गेहूं उत्पादों और 25 एलएमटी गेहूं के निर्यात को स्वीकृति दी गई थी।
- अब नई मंजूरी के बाद कुल 50 एलएमटी गेहूं और 10 एलएमटी गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति हो चुकी है।
बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
1. बाजार में तरलता बढ़ेगी- निर्यात से व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और मंडियों में बेहतर लेनदेन होगा।
2. भंडारण पर दबाव घटेगा- अच्छी पैदावार के समय सरकारी और निजी भंडार पर दबाव कम होगा।
3. किसानों को संकट बिक्री से राहत- कटाई के समय किसान अक्सर तुरंत बेचने को मजबूर होते हैं। निर्यात से अतिरिक्त मांग बनने पर उन्हें बेहतर दाम मिल सकते हैं।
4. कीमतों में संतुलन रहेगा- सरकार का मानना है कि घरेलू बाजार में भी कीमतें नियंत्रित और स्थिर बनी रहेंगी।