MP में 23 मई तक बढ़ी गेहूं स्लॉट बुकिंग की तारीख, चना और मसूर की खरीद 28 मई तक
Preeti Nahar | May 05, 2026, 14:43 IST
मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को राहत देते हुए गेहूं खरीद के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है, ताकि छूटे हुए किसान भी अपनी उपज बेच सकें। वहीं चना और मसूर की खरीद 28 मई तक जारी रहेगी।
MP में गेहूं खरीद (फाइल फोटो)
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में किसानों के लिए बड़े फैसलों का साल बनाने का दावा किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रिकॉर्ड फसल खरीद, आधुनिक भंडारण व्यवस्था और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से खेती को लाभ का सौदा बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार चाहती है कि किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता और तकनीकदाता भी बनें।
किसानों को राहत देते हुए राज्य सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं खरीद की स्लॉट बुकिंग की अंतिम तारीख 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 कर दी है। इससे वे किसान भी अपनी उपज बेच सकेंगे जो पहले स्लॉट बुक नहीं करा पाए थे। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक प्रदेश में 34.73 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है।
सरकार ने चना और मसूर उत्पादक किसानों को भी राहत दी है। प्राइस सपोर्ट स्कीम 2026 के तहत करीब 600 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। चना और मसूर की खरीद 30 मार्च से 28 मई 2026 तक जारी रहेगी। सरकार ने चने के लिए 6.49 लाख मीट्रिक टन और मसूर के लिए 6.01 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य तय किया है। वहीं तुअर खरीद के लिए 1.31 लाख मीट्रिक टन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर सीधे उनके बैंक खातों में किया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। साथ ही इस बात पर भी ध्यान देने की बात कही गई की फसलों को सुरक्षित रखने के लिए भंडारण व्यवस्था को मजबूत किया गया है। खाद्यान्न भंडारण योजना के तहत 3.55 लाख मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता तैयार की गई है। इसके अलावा 15 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 11 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है।
राज्य सरकार खेती को स्मार्ट बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। ई-विकास और ई-किसान प्रणाली के जरिए किसानों को मोबाइल पर योजनाओं की जानकारी, मंडी भाव, मौसम अपडेट और तकनीकी सलाह दी जा रही है। 1 अप्रैल 2026 से यह व्यवस्था सभी जिलों में लागू हो चुकी है।
सरकार हर किसान को यूनिक आईडी दे रही है, जिसमें उसकी जमीन और फसल का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में होगा। खेतों की जियो-टैगिंग की जा रही है, जिससे फसल बीमा, नुकसान का आकलन और ड्रोन के जरिए दवा छिड़काव जैसे काम आसान होंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 53 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है और 6 हजार से ज्यादा क्लस्टर बनाए गए हैं। इसके साथ ही 1 हजार से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटर तैयार किए गए हैं, जो आधुनिक खेती को बढ़ावा देंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ‘कृषक कल्याण वर्ष’ सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि खेती की दिशा बदलने की बड़ी पहल है। सरकार का लक्ष्य है कि नई तकनीक और बेहतर योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जाए और खेती को आत्मनिर्भर बनाया जाए।