Wholesale Inflation: जून में थोक महँगाई बढ़कर 9.87% पहुँची, जानिए किन वजहों से बढ़ीं कीमतें
Mansi | Aug 03, 2026, 18:52 IST
जून 2026 में थोक महँगाई 9.87% तक पहुँच गई है, जो पिछले महीने से अधिक है। इस वृद्धि के पीछे वैश्विक ऊर्जा और सामग्रियों की कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य कारण है। सरकार ने आवश्यक वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाकर और अनाज को खुले बाजार में उपलब्ध कराकर महँगाई पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया है।
देश में बढ़ती थोक महँगाई के बीच रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी
देश में जून 2026 के दौरान थोक महँगाई (Wholesale Price Index-WPI) बढ़कर 9.87% हो गई, जो मई में 9.68 थी। सरकार का कहना है कि इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह उन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी है, जिन पर वैश्विक ऊर्जा और जिंस (Commodity) बाज़ार का सीधा असर पड़ता है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार महँगाई को नियंत्रित रखने और आम उपभोक्ताओं पर इसके असर को कम करने के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। इनमें आवश्यक खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाना, सरकारी खरीद वाले अनाज को खुले बाज़ार में बेचना और ज़रूरत के अनुसार व्यापार नीतियों में बदलाव करना शामिल है।
सरकार के अनुसार, थोक महँगाई में बढ़ोतरी मुख्य रूप से उन वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई है, जो वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी बाज़ार में होने वाले उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित होती हैं। इनमें मिनरल ऑयल (पेट्रोलियम उत्पाद), खाद्य वस्तुएँ, बेसिक मेटल, रसायन और रासायनिक उत्पाद प्रमुख हैं। सरकार ने कहा कि महँगाई को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदमों का असर खुदरा महँगाई (Consumer Price Index-CPI) पर दिखाई दिया है। पिछले दो तिमाहियों में खुदरा महँगाई 4 % के लक्ष्य से नीचे रही। जनवरी-मार्च (वित्त वर्ष 2025-26) में यह 3.1 % और अप्रैल-जून (वित्त वर्ष 2026-27) में 3.9 % दर्ज की गई। हालाँकि, जून 2026 में खुदरा महँगाई बढ़कर 4.38 % हो गई, जबकि मई में यह 3.93 % थी। सरकार के अनुसार, इसकी प्रमुख वजह खाद्य वस्तुओं और परिवहन लागत में बढ़ोतरी रही।
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर हर पाँच वर्ष में खुदरा महँगाई का लक्ष्य तय करती है, ताकि मूल्य स्थिरता बनाए रखने के साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दिया जा सके। सरकार ने 25 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक खुदरा महँगाई का लक्ष्य 4% तय किया है। इसके लिए 2% की निचली और 6 % की ऊपरी सीमा निर्धारित की गई है।
महँगाई पर नियंत्रण के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। इसके तहत आवश्यक खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाया जा रहा है, सरकारी खरीद वाले अनाज की खुले बाज़ार में बिक्री की जा रही है और ज़रूरत के अनुसार आयात-निर्यात से जुड़ी नीतियों में बदलाव किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य आम लोगों पर महँगाई का बोझ कम करना और बाज़ार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखना है।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार महँगाई को नियंत्रित रखने और आम उपभोक्ताओं पर इसके असर को कम करने के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। इनमें आवश्यक खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाना, सरकारी खरीद वाले अनाज को खुले बाज़ार में बेचना और ज़रूरत के अनुसार व्यापार नीतियों में बदलाव करना शामिल है।
किन वजहों से बढ़ी थोक महँगाई?
वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर हर पाँच वर्ष में खुदरा महँगाई का लक्ष्य तय करती है, ताकि मूल्य स्थिरता बनाए रखने के साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दिया जा सके। सरकार ने 25 मार्च 2026 को अधिसूचना जारी कर 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक खुदरा महँगाई का लक्ष्य 4% तय किया है। इसके लिए 2% की निचली और 6 % की ऊपरी सीमा निर्धारित की गई है।