क्या सस्ता होने वाला है पेट्रोल? सरकार ने E22-E30 पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी की खत्म, जानें माइलेज पर क्या पड़ेगा असर
Umang | Jun 11, 2026, 13:19 IST
केंद्र सरकार ने E22 से E30 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को केंद्रीय उत्पाद शुल्क और अन्य उपकरों से छूट दे दी है। यह कदम इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने, तेल आयात पर निर्भरता घटाने और किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। आइए जानते हैं कि क्या आने वाले समय में पेट्रोल की कीमतें सस्ती हो सकती हैं?
ड्यूटी फ्री हुआ E22-E30 पेट्रोल!
केंद्र सरकार ने 22 से 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E22-E30) पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) समाप्त करने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के पेट्रोल को केंद्रीय उत्पाद शुल्क के साथ-साथ विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, सड़क एवं अवसंरचना उपकर और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर से भी छूट दी गई है।
यह फैसला भारत के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। देश पहले ही निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर चुका है। हालांकि, इस नई घोषणा का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ताओं को तुरंत सस्ता पेट्रोल मिलने लगेगा।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। 11 जून तक देशभर में पेट्रोल के खुदरा दाम स्थिर रहे। इसका कारण यह है कि ड्यूटी छूट केवल E22-E30 श्रेणी के ईंधन पर लागू होगी, जबकि वर्तमान में देशभर में मुख्य रूप से E20 पेट्रोल की बिक्री हो रही है। ये ईंधन अभी बाजार में उपलब्ध नहीं हैं।
सरकार का यह कदम फिलहाल आपूर्ति पक्ष को मजबूत करने के लिए उठाया गया है ताकि तेल कंपनियों और रिफाइनरियों के लिए उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उत्पादन और वितरण सस्ता हो सके। भविष्य में इन ईंधनों के बाजार में आने के बाद कीमतों पर क्या असर होगा, यह तेल विपणन कंपनियों की नीति पर निर्भर करेगा।
अभी अधिकांश वाहन E22-E30 ईंधन के लिए तैयार नहीं हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, 1 अप्रैल 2023 से पहले बिके अधिकांश वाहन E10 ईंधन के अनुकूल हैं, जबकि उसके बाद बिके वाहनों को E20 के अनुरूप बनाया गया है। वाहन निर्माता कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है कि वे वाहन पर स्पष्ट रूप से यह उल्लेख करें कि वह अधिकतम किस स्तर तक इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि E20 से ऊपर जाने के लिए इंजन ट्यूनिंग, फ्यूल सिस्टम और टिकाऊपन से जुड़े कई बदलावों की आवश्यकता होगी।
इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा घनत्व कम होता है। यही वजह है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ने पर माइलेज प्रभावित हो सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि E20 ईंधन से वाहन की ड्राइविंग क्षमता या इंजन के धातु एवं प्लास्टिक हिस्सों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पाया गया है। E22-E30 मिश्रण का मौजूदा वाहनों की माइलेज और इंजन लाइफ पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका अध्ययन ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) कर रही है। इस अध्ययन के आधार पर आगे की नीति तय की जाएगी।
E30 से ऊपर के ईंधन को अलग श्रेणी में रखा गया है। E85 ईंधन में 80-85 प्रतिशत तक इथेनॉल होता है और इसका उपयोग केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जा सकता है। सरकार ने दिसंबर 2026 तक 500 और दिसंबर 2027 तक करीब 5,000 पेट्रोल पंपों पर E85 उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। मारुति सुजुकी पहले ही E20 से E85 तक चलने वाली फ्लेक्स-फ्यूल फ्रोंक्स का प्रदर्शन कर चुकी है, जबकि टाटा मोटर्स ने भी 2026-27 तक फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतारने की तैयारी की बात कही है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014 में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर 1.53 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार का दावा है कि इस कार्यक्रम से अब तक 1.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत हुई है। साथ ही गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से जुड़े किसानों को भी हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है।
अभी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन और उसकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा। हालांकि, सरकार की यह घोषणा भविष्य में उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए कर ढांचे को तैयार करने और फ्लेक्स-फ्यूल आधारित परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह फैसला भारत के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। देश पहले ही निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर चुका है। हालांकि, इस नई घोषणा का मतलब यह नहीं है कि उपभोक्ताओं को तुरंत सस्ता पेट्रोल मिलने लगेगा।
क्या पेट्रोल के दाम घटेंगे?
सरकार का यह कदम फिलहाल आपूर्ति पक्ष को मजबूत करने के लिए उठाया गया है ताकि तेल कंपनियों और रिफाइनरियों के लिए उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का उत्पादन और वितरण सस्ता हो सके। भविष्य में इन ईंधनों के बाजार में आने के बाद कीमतों पर क्या असर होगा, यह तेल विपणन कंपनियों की नीति पर निर्भर करेगा।