मध्य प्रदेश के इस इलाके में पर्यावरण बचाने की अनोखी मुहिम, प्लास्टिक कचरे से बन रहे इको-ब्रिक्स, महिलाओं ने संभाली कमान
Gaon Connection | May 19, 2026, 12:57 IST
ब्यावरा में प्लास्टिक कचरा अब शहर की सुंदरता बढ़ा रहा है। पर्यावरण प्रेमी महिलाओं ने प्लास्टिक इकट्ठा कर इको-ब्रिक्स बनाए हैं। इन ईंटों का उपयोग सार्वजनिक स्थानों को सजाने में हो रहा है। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। प्रशासन भी इस मॉडल को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहा है।
प्लास्टिक से हो रहा सौंदर्यीकरण
मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में अब सड़कों पर बिखरा प्लास्टिक कचरा पर्यावरण के लिए खतरा नहीं, बल्कि शहर की खूबसूरती बढ़ाने का माध्यम बनता जा रहा है। जयपुर-जबलपुर और आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्गों के बड़े जंक्शन के रूप में पहचान रखने वाले ब्यावरा में प्लास्टिक कचरे का बढ़ता दबाव लंबे समय से प्रशासन और नागरिकों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। इसी समस्या को देखते हुए शहर के कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने एक अनोखी मुहिम शुरू की, जो अब लोगों के लिए प्रेरणा बनती जा रही है।
इस सामाजिक अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। पर्यावरण प्रेमी संरक्षण समिति नामक संस्था से जुड़ी महिलाएं और कार्यकर्ता सड़कों से प्लास्टिक और पॉलीथीन इकट्ठा करने के साथ-साथ घरों और दुकानों से खाली बोतलें और प्लास्टिक कचरा भी एकत्रित कर रहे हैं। अभियान से जुड़ी महिलाओं के कारण अब लोग प्लास्टिक कचरे को फेंकने के बजाय सीधे संस्था की टीम को सौंप रहे हैं। इससे घर-घर तक इस मुहिम को समर्थन मिल रहा है।
![प्लास्टिक और पॉलीथीन इकट्ठा करती महिलाएं]()
संस्था के संस्थापक अनिल कुशवाह ने बताया कि उन्होंने करीब 6 महीने पहले अकेले इस काम की शुरुआत की थी, लेकिन अब महिलाओं सहित 40 से 50 लोगों की टीम इस अभियान से जुड़ चुकी है। उन्होंने बताया कि अब तक टीम 2 क्विंटल यानी करीब 200 किलोग्राम प्लास्टिक और पॉलीथीन को रीसाइकल कर चुकी है। इस प्लास्टिक को कॉम्पैक्ट कर ‘इको-ब्रिक्स’ बनाई जा रही हैं, जिनका इस्तेमाल शहर के सार्वजनिक स्थानों के सौंदर्यीकरण में किया जा रहा है।
अभियान की सफलता को देखते हुए ब्यावरा और सुठालिया नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी इक़रार अहमद ने कार्यस्थल का निरीक्षण किया। संस्था के प्रयासों और महिलाओं-युवाओं की भागीदारी से प्रभावित होकर प्रशासन ने इस मॉडल को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।
इसके तहत:
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अभियान सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। ब्यावरा के लोगों ने साबित किया है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास से बिना बड़े बजट के भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
(राजगढ़ से अब्दुल वसीम अंसारी की रिपोर्ट)
महिलाओं ने संभाली अभियान की जिम्मेदारी
प्लास्टिक और पॉलीथीन इकट्ठा करती महिलाएं
6 महीने में 2 क्विंटल से ज्यादा प्लास्टिक रीसाइकल
प्रशासन भी आया साथ
इसके तहत:
- संस्था को आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी
- रीसाइकल उत्पादों को बाजार और सरकारी परियोजनाओं से जोड़ा जाएगा
- महिलाओं और युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर काम किया जाएगा
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार का रास्ता
(राजगढ़ से अब्दुल वसीम अंसारी की रिपोर्ट)