गाँवों का विकास महिलाओं के नेतृत्व के बिना संभव नहीं, लखनऊ में इंडिया रूरल कोलोक्वी में उठी आवाज़
Lata Mishra | Aug 05, 2026, 13:03 IST
लखनऊ में आयोजित इंडिया रूरल कोलोक्वी 2026 के उत्तर प्रदेश चैप्टर में ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका, युवाओं की उद्यमिता और सामुदायिक नेतृत्व पर जोरदिया गया। पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने कहा कि देश में बदलाव आम लोगों की सामूहिक भागीदारी से आता है, जबकि आईएएस हीरालाल ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब गाँव विकसित होंगे।
लखनऊ में आयोजित इंडिया रूरल कोलोक्वी 2026 में महिलाओं के नेतृत्व, ग्रामीण विकास, युवा उद्यमिता और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया गया।
"देश के इतिहास में जितने भी बड़े परिवर्तन हुए हैं, वे किसी एक ताकतवर व्यक्ति ने नहीं, बल्कि आम लोगों की एकजुट आवाज़ ने किए हैं। इसलिए मैं बेटियों से कहता हूँ कि चुप मत रहो। अपनी बात कहो, अपनी आवाज़ बुलंद करो। क्योंकि जब बेटियाँ बोलेंगी, तभी समाज बदलेगा और तभी ज़माना बदलेगा।"
यह बात पद्मश्री सम्मानित जल संरक्षण कार्यकर्ता उमाशंकर पांडेय ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित इंडिया रूरल कोलोक्वी (India Rural Colloquy-IRC) 2026 के उत्तर प्रदेश चैप्टर में कही। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव तभी आता है, जब लोग मिलकर अपनी बात रखें और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान खोजें।
लखनऊ विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था- "ग्रामीण खुशहाली की निर्माता महिलाएँ: मजबूत समुदायों से साझा समृद्धि तक।" कार्यक्रम का आयोजनTransform Rural India (TRI ) ने किया। अपने संबोधन में उमाशंकर पांडेय ने कहा, "जब आप बोलते हैं, मैं बोलता हूँ और हम सब मिलकर बोलते हैं, तभी दुनिया बदलती है।" उन्होंने ग्रामीण विकास में सामूहिक भागीदारी और समुदाय आधारित नेतृत्व को सबसे बड़ी ताकत बताया।
महिलाओं के नेतृत्व को बताया ग्रामीण विकास की कुंजी
कार्यक्रम में ग्रामीण आजीविका, महिला उद्यमिता, युवाओं के रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर कई सत्र आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के संयुक्त आयुक्त सर्वेश्वर शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के माध्यम से करीब दो लाख युवाओं ने अपना कारोबार शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यदि युवा और महिलाएँ रोजगार पाने के बजाय रोजगार देने वाले बनें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
'गाँव मजबूत होंगे, तभी विकसित बनेगा भारत'
उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय एकीकरण विभाग के सचिव आईएएस हीरालाल ने कहा कि भारत तब तक विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता, जब तक उसके गाँव विकसित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि केवल शहरों के विकास से 'विकसित भारत' का सपना पूरा नहीं होगा। इसके लिए गाँवों की अर्थव्यवस्था, स्थानीय संस्थाओं और सामुदायिक नेतृत्व को भी समान रूप से मजबूत करना होगा।
स्वयं सहायता समूहों और पंचायतों में महिलाओं की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs), जलवायु अनुकूल खेती, महिला नेतृत्व, वित्तीय समावेशन और पंचायतों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि यदि महिलाओं को निर्णय लेने और बाजार से जुड़ने के अधिक अवसर मिलेंगे, तो इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों की आय और सामाजिक विकास पर पड़ेगा।
Transform Rural India (TRI) के एसोसिएट डायरेक्टर राजीव त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीण परिवर्तन की शुरुआत तब होती है, जब महिलाएँ केवल परिवार की जिम्मेदारी निभाने तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अगुआ बनती हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह, टिकाऊ खेती और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ पूरे समुदाय को आगे बढ़ाने का काम करती है।
नीति सुधार और साझेदारी पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ाने, महिला उद्यमों को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास का एक मजबूत मॉडल बन सकता है, यदि सरकार, सामाजिक संस्थाएँ और समुदाय मिलकर काम करें।
क्या है इंडिया रूरल कोलोक्वी?
इंडिया रूरल कोलोक्वी, Transform Rural India (TRI) का प्रमुख वार्षिक मंच है। इसकी शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। इस मंच पर नीति-निर्माता, शिक्षाविद, सामाजिक संगठन, उद्योग जगत और ग्रामीण समुदाय के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर ग्रामीण भारत से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं। वर्ष 2026 में इसका आयोजन असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और नई दिल्ली सहित कई राज्यों में किया जा रहा है।
इस दौरान आजीविका, जलवायु परिवर्तन, ग्रामीण शासन, स्वास्थ्य, तकनीक, महिलाओं के नेतृत्व और स्थानीय आर्थिक विकास जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है, ताकि ग्रामीण भारत के लिए व्यवहारिक और टिकाऊ समाधान तैयार किए जा सकें।
यह बात पद्मश्री सम्मानित जल संरक्षण कार्यकर्ता उमाशंकर पांडेय ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित इंडिया रूरल कोलोक्वी (India Rural Colloquy-IRC) 2026 के उत्तर प्रदेश चैप्टर में कही। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव तभी आता है, जब लोग मिलकर अपनी बात रखें और स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान खोजें।
लखनऊ विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था- "ग्रामीण खुशहाली की निर्माता महिलाएँ: मजबूत समुदायों से साझा समृद्धि तक।" कार्यक्रम का आयोजन
महिलाओं के नेतृत्व को बताया ग्रामीण विकास की कुंजी
कार्यक्रम में ग्रामीण आजीविका, महिला उद्यमिता, युवाओं के रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे मुद्दों पर कई सत्र आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश सरकार के एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन विभाग के संयुक्त आयुक्त सर्वेश्वर शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के माध्यम से करीब दो लाख युवाओं ने अपना कारोबार शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि यदि युवा और महिलाएँ रोजगार पाने के बजाय रोजगार देने वाले बनें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिल सकती है।
'गाँव मजबूत होंगे, तभी विकसित बनेगा भारत'
उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय एकीकरण विभाग के सचिव आईएएस हीरालाल ने कहा कि भारत तब तक विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता, जब तक उसके गाँव विकसित नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि केवल शहरों के विकास से 'विकसित भारत' का सपना पूरा नहीं होगा। इसके लिए गाँवों की अर्थव्यवस्था, स्थानीय संस्थाओं और सामुदायिक नेतृत्व को भी समान रूप से मजबूत करना होगा।
स्वयं सहायता समूहों और पंचायतों में महिलाओं की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs), जलवायु अनुकूल खेती, महिला नेतृत्व, वित्तीय समावेशन और पंचायतों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उनका मानना था कि यदि महिलाओं को निर्णय लेने और बाजार से जुड़ने के अधिक अवसर मिलेंगे, तो इसका सीधा असर ग्रामीण परिवारों की आय और सामाजिक विकास पर पड़ेगा।
Transform Rural India (TRI) के एसोसिएट डायरेक्टर राजीव त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीण परिवर्तन की शुरुआत तब होती है, जब महिलाएँ केवल परिवार की जिम्मेदारी निभाने तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अगुआ बनती हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह, टिकाऊ खेती और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ पूरे समुदाय को आगे बढ़ाने का काम करती है।
नीति सुधार और साझेदारी पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ाने, महिला उद्यमों को प्रोत्साहन देने और ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास का एक मजबूत मॉडल बन सकता है, यदि सरकार, सामाजिक संस्थाएँ और समुदाय मिलकर काम करें।
क्या है इंडिया रूरल कोलोक्वी?
इंडिया रूरल कोलोक्वी, Transform Rural India (TRI) का प्रमुख वार्षिक मंच है। इसकी शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी। इस मंच पर नीति-निर्माता, शिक्षाविद, सामाजिक संगठन, उद्योग जगत और ग्रामीण समुदाय के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर ग्रामीण भारत से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करते हैं। वर्ष 2026 में इसका आयोजन असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और नई दिल्ली सहित कई राज्यों में किया जा रहा है।
इस दौरान आजीविका, जलवायु परिवर्तन, ग्रामीण शासन, स्वास्थ्य, तकनीक, महिलाओं के नेतृत्व और स्थानीय आर्थिक विकास जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है, ताकि ग्रामीण भारत के लिए व्यवहारिक और टिकाऊ समाधान तैयार किए जा सकें।