खेत बेचकर SUV ख़रीद रहे युवा, चार साल बाद फिर गिग जॉब ढूँढते हैं; जानें पंजाब को लेकर क्यों ऐसा बोले विश्व बैंक प्रमुख
Umang | Jun 21, 2026, 17:18 IST
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ युवा कृषि भूमि बेचकर कुछ वर्षों तक आर्थिक रूप से संपन्न रहते हैं, लेकिन बाद में पैसा ख़त्म होने पर रोज़गार तलाशने लगते हैं। उन्होंने किसानों के लिए बेहतर तकनीक, उन्नत बीज, उर्वरक और सहकारी संस्थाओं की ज़रूरत बताई। साथ ही पंजाब में किसानों की मौजूदा माँगों और आंदोलनों का भी ज़िक्र किया।
पंजाब के युवाओं पर अजय बंगा की बड़ी टिप्पणी
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने पंजाब की कृषि अर्थव्यवस्था और युवाओं की बदलती सोच को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पंजाब, जो कभी देश की कृषि ताक़त का प्रतीक माना जाता था, आज कई नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। बंगा के अनुसार, राज्य में कुछ युवा अपनी पुश्तैनी कृषि भूमि बेचकर एकमुश्त बड़ी रकम तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन यह संपत्ति लंबे समय तक उनके काम नहीं आती और कुछ वर्षों बाद उन्हें रोज़गार की तलाश करनी पड़ती है।
अजय बंगा ने इस मुद्दे को केवल ज़मीन बेचने तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और युवाओं के भविष्य से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीण युवाओं को बेहतर अवसर, आधुनिक तकनीक और मज़बूत सहकारी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो खेती अधिक लाभकारी बन सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोज़गार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा ने कहा, "मैं पंजाब से आता हूँ, जो कभी भारत का कृषि केंद्र था। आज वहाँ कुछ ऐसे युवा मिलेंगे जिन्होंने अपनी ज़मीन बेच दी है। वे चार साल तक अमीर रहते हैं, एसयूवी ख़रीदते हैं, धूम्रपान और शराब पर ख़र्च करते हैं। इसके बाद उनका पैसा ख़त्म हो जाता है और वे गिग जॉब तलाशने लगते हैं।" उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है, लेकिन यह उस संभावित विकास की तुलना में बहुत कम है, जो बेहतर उत्पादकता और अवसर मिलने पर हासिल किया जा सकता है।
अजय बंगा ने कहा, "आपको सहकारी संस्थाओं की ज़रूरत है। ऐसी तकनीक की ज़रूरत है जो किसानों को बेहतर बीज, बेहतर उर्वरक और बेहतर संसाधनों तक पहुँच दे सके।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और संगठित ढाँचे की भी आवश्यकता है।
'मिंट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब को हरित क्रांति का केंद्र माना जाता है। 1960 और 1970 के दशक में राज्य ने कृषि उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। गेहूँ और धान के उत्पादन में पंजाब की सफलता ने देश की खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करने में बड़ा योगदान दिया।
मिंट' की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब के किसान इस समय कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगों में गन्ना भुगतान में देरी का समाधान, सहकारी चीनी मिलों के प्रस्तावित हस्तांतरण और बिक्री का विरोध तथा यूरिया जैसी कृषि आदानों की पर्याप्त उपलब्धता शामिल है। इसके अलावा किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की क़ानूनी गारंटी, कृषि ऋण राहत और फसल बीमा योजनाओं में सुधार की माँग भी कर रहे हैं।
किसान संगठनों ने नदी जल बँटवारे, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम से जुड़ी कुछ धाराओं, डैम सेफ़्टी एक्ट और वाटर अमेंडमेंट एक्ट 2024 को लेकर भी आपत्ति जताई है। किसानों का कहना है कि नदियों के पानी के उपयोग पर उन राज्यों का प्राथमिक अधिकार होना चाहिए, जिनसे नदियाँ होकर गुज़रती हैं। इसके अलावा किसान संगठनों ने अमेरिका के साथ किसी संभावित मुक्त व्यापार समझौते पर भी पुनर्विचार की माँग की है। उनका कहना है कि कृषि से जुड़े फ़ैसले किसानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाने चाहिए।
अजय बंगा ने इस मुद्दे को केवल ज़मीन बेचने तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और युवाओं के भविष्य से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीण युवाओं को बेहतर अवसर, आधुनिक तकनीक और मज़बूत सहकारी व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए तो खेती अधिक लाभकारी बन सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोज़गार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।