World Milk Day 2026: भारत के डेयरी सेक्टर की शान बनी मुर्रा भैंस, ‘ब्लैक गोल्ड’ से बढ़ी किसानों की आय
Gaon Connection | Jun 01, 2026, 16:36 IST
हरियाणा सरकार ने मुर्रा नस्ल के संरक्षण और सुधार के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए हैं। उच्च दुग्ध उत्पादन करने वाली भैंसों की पहचान, उनके बछड़ों का वैज्ञानिक पालन-पोषण, कृत्रिम गर्भाधान और किसानों को नकद प्रोत्साहन जैसी योजनाओं के जरिए नस्ल सुधार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस पहल से दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है और हजारों किसानों को आर्थिक लाभ मिला है।
भारत के डेयरी सेक्टर की शान बनी मुर्रा भैंस, कहा जाता है 'ब्लैक गोल्ड'
हर साल 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस (World Milk Day) मनाया जाता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और इस उपलब्धि में देश की स्वदेशी पशु नस्लों का बड़ा योगदान है। इनमें हरियाणा की प्रसिद्ध मुर्रा भैंस को विशेष स्थान प्राप्त है। अपनी उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता के कारण मुर्रा भैंस को ‘ब्लैक गोल्ड’ यानी काला सोना भी कहा जाता है। यही नस्ल आज न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि देश की डेयरी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।
मुर्रा भैंस अपनी बेहतर आनुवंशिक गुणवत्ता और अधिक दूध देने की क्षमता के लिए जानी जाती है। हरियाणा में उच्च उत्पादन करने वाली भैंसों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। इन पशुओं के नर बछड़ों को भविष्य के प्रजनन सांड के रूप में विकसित किया जाता है, जिससे नस्ल की गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहे।
मुर्रा भैंस पालने वाले किसानों को उनकी भैंस के दुग्ध उत्पादन के आधार पर नकद प्रोत्साहन दिया जाता है।
सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘इन-सीटू मुर्रा जर्मप्लाज्म बैंक’ की अवधारणा विकसित की है। इसके तहत चयनित भैंसों और उनके नर बछड़ों का संरक्षण किया जाता है। किसानों को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि वे कम से कम एक वर्ष तक इन पशुओं को न बेचें। साथ ही कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जाता है ताकि बेहतर नस्ल का विकास हो सके।
हरियाणा में ऐसे गाँवों की पहचान की गई है जहां बड़ी संख्या में उच्च उत्पादन करने वाली मुर्रा भैंसें मौजूद हैं। ऐसे गाँवों में मुर्रा ब्रीडर्स सोसायटी बनाई जाती है और उन्हें आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है। अब तक 24 से अधिक आदर्श मुर्रा गाँव विकसित किए जा चुके हैं, जो नस्ल संरक्षण और संवर्धन का काम कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप हरियाणा में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2007-08 में राज्य का दूध उत्पादन 57.45 लाख टन था, जो 2010-11 में बढ़कर 62.67 लाख टन हो गया। यह लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि है। साथ ही बेहतर नस्ल के पशुओं की बाजार कीमत भी बढ़ी है, जिससे किसानों की आमदनी में सुधार हुआ है।
विश्व दुग्ध दिवस केवल दूध के महत्व को समझने का अवसर नहीं है, बल्कि यह पशुपालकों के योगदान को सम्मान देने का भी दिन है। मुर्रा भैंस जैसी उच्च उत्पादक भारतीय नस्लें न केवल देश की दुग्ध क्रांति को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नस्ल सुधार, वैज्ञानिक पशुपालन और डेयरी प्रबंधन पर इसी तरह ध्यान दिया जाता रहा, तो भारत का डेयरी क्षेत्र और अधिक सशक्त बन सकता है।
मुर्रा भैंस क्यों कहलाती है ‘ब्लैक गोल्ड’?
दूध उत्पादन के आधार पर किसानों को प्रोत्साहन
| दुग्ध उत्पादन (Lactation Yield) | प्रतिदिन अधिकतम दूध उत्पादन (Peak Yield/Day) | नकद प्रोत्साहन राशि (रुपये) |
|---|---|---|
| 2600 – 3200 किलोग्राम | 13 से 16 किलोग्राम | ₹5,000 |
| 3201 – 3800 किलोग्राम | 16 से 19 किलोग्राम से अधिक | ₹10,000 |
| 3801 – 5000 किलोग्राम से कम | 19 से 25 किलोग्राम से कम | ₹15,000 |
| 5000 किलोग्राम या उससे अधिक | 25 किलोग्राम या उससे अधिक | ₹25,000 |