World Oceans Day: जहाँ महिलाओं का जाना मना था, वहीं गहरे समंदर में उतरी रेखा; डीप सी फिशिंग में बनाई अपनी अलग पहचान

Preeti Nahar | Jun 08, 2026, 16:13 IST
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विश्व महासागर दिवस पर यह कहानी केरल की रेखा कार्तिकेयन की है, जिन्होंने उन सामाजिक बंदिशों को तोड़ा जिनके कारण महिलाएं गहरे समंदर में मछली पकड़ने नहीं जाती थीं। आज रेखा अपनी बेटियों के साथ ट्रॉलर लेकर समुद्र में उतरती हैं और हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

भारत की गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली महिला मछुआरा
भारत की गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाली महिला मछुआरा
कभी उन्हें कहा गया कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ना महिलाओं का काम नहीं है। कभी लाइसेंस देने से मना किया गया और कभी समाज ने ताने दिए। लेकिन रेखा कार्तिकेयन ने हार नहीं मानी। उन्होंने उन सभी बंदिशों को चुनौती दी, जो सिर्फ इसलिए लगाई गई थीं क्योंकि वह एक महिला थीं।

आज विश्व महासागर दिवस पर उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि जब इरादे मजबूत हों तो सबसे ऊंची लहरें भी रास्ता नहीं रोक सकतीं। केरल के एक छोटे से समुद्री गाँव से निकलकर रेखा ने न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि यह भी साबित किया कि महिलाएं हर उस क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं, जिसे कभी केवल पुरुषों के लिए आरक्षित माना जाता था।

केरल के त्रिशूर जिले के चेट्टुवा बीच की रहने वाली रेखा ने उस काम को चुना, जिसे लंबे समय तक केवल पुरुषों का पेशा माना जाता रहा। आज वह भारत की उन गिनी-चुनी महिलाओं में शामिल हैं, जिनके पास डीप सी फिशिंग का लाइसेंस है।

जब मजबूरी ने बदल दी जिंदगी की दिशा

रेखा की शादी पेशे से मछुआरे कार्तिकेयन से हुई थी। परिवार बढ़ा तो जिम्मेदारियां भी बढ़ने लगीं। घर की आय सीमित थी, इसलिए रेखा ने फैसला किया कि वह भी अपने पति के साथ काम करेंगी।

केरल के त्रिशूर जिले की रेखा कार्तिकेयन गहरे समुद्र में मछली पकड़ते हुए
केरल के त्रिशूर जिले की रेखा कार्तिकेयन गहरे समुद्र में मछली पकड़ते हुए
लेकिन समस्या यह थी कि उस समय महिलाओं का गहरे समुद्र में जाकर मछली पकड़ना लगभग ना के बराबर माना जाता था। समाज की सोच और परंपराएं दोनों उनके रास्ते में खड़ी थीं। लेकिन रेखा ने ठान लिया कि उन्हें हार नहीं माननी।

पहली बार समंदर में उतरीं तो आसान नहीं था सफर

रेखा जब पहली बार अपने पति के साथ समुद्र में गईं तो तेज लहरों और समुद्री मौसम की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई। कई लोगों ने कहा कि यह काम महिलाओं के लिए नहीं है।

समुद्र की ऊंची लहरों के बीच नाव संभालतीं और मछली पकड़तीं रेखा कार्तिकेयन
समुद्र की ऊंची लहरों के बीच नाव संभालतीं और मछली पकड़तीं रेखा कार्तिकेयन
लेकिन रेखा ने हार नहीं मानी। उन्होंने धीरे-धीरे समुद्र को समझा, नाव चलाना सीखा और मछली पकड़ने की बारीकियां सीखीं। उनका आत्मविश्वास हर दिन बढ़ता गया।

लाइसेंस लेने के लिए भी करनी पड़ी लड़ाई

रेखा की सबसे बड़ी चुनौती तब आई जब उन्होंने डीप सी फिशिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया। शुरुआत में उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि यह पेशा महिलाओं के लिए नहीं है।

जिस पेशे को कभी केवल पुरुषों का माना जाता था, उसमें अपनी जगह बनातीं रेखा कार्तिकेयन
जिस पेशे को कभी केवल पुरुषों का माना जाता था, उसमें अपनी जगह बनातीं रेखा कार्तिकेयन
हालांकि उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखे और आखिरकार वर्ष 2016 में उन्हें लाइसेंस मिल गया। इसके साथ ही उन्होंने एक ऐसी बाधा तोड़ दी, जिसे बहुत लोग अटूट मानते थे।

आज बेटियां भी बन रही हैं उनकी ताकत

रेखा अब अकेले नहीं हैं। उनकी बेटियां भी उनके साथ समुद्र में जाती हैं और मछली पकड़ने से लेकर बाजार तक के कामों में हाथ बंटाती हैं।

डीप सी फिशिंग का लाइसेंस हासिल करने वाली देश की चुनिंदा महिलाओं में शामिल रेखा कार्तिकेयन
डीप सी फिशिंग का लाइसेंस हासिल करने वाली देश की चुनिंदा महिलाओं में शामिल रेखा कार्तिकेयन
रेखा का मानना है कि अगर महिलाओं में आत्मविश्वास और धैर्य हो तो वे किसी भी क्षेत्र में सफल हो सकती हैं। वह चाहती हैं कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे आएं।

समंदर में हर दिन होती है नई चुनौती

गहरे समुद्र में काम करना आसान नहीं है। अचानक मौसम बदल सकता है, तेज हवाएं चल सकती हैं और ऊंची लहरें नाव का संतुलन बिगाड़ सकती हैं।

हौसलों की नाव लेकर लहरों से मुकाबला करतीं रेखा कार्तिकेयन
हौसलों की नाव लेकर लहरों से मुकाबला करतीं रेखा कार्तिकेयन
खासकर बारिश के मौसम में खतरे और बढ़ जाते हैं। फिर भी रेखा हर दिन इन चुनौतियों का सामना करती हैं और अपने काम को पूरी जिम्मेदारी से निभाती हैं।

महासागर दिवस पर एक बड़ा संदेश

विश्व महासागर दिवस केवल समुद्रों के संरक्षण का दिन नहीं है, बल्कि उन लोगों को याद करने का भी अवसर है जो अपनी जिंदगी समुद्र से जोड़ते हैं। रेखा कार्तिकेयन की कहानी बताती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और हौसले के सामने कोई भी सामाजिक दीवार ज्यादा देर तक खड़ी नहीं रह सकती। उन्होंने साबित किया है कि अवसर मिलने पर महिलाएं उन क्षेत्रों में भी सफलता हासिल कर सकती हैं जिन्हें कभी केवल पुरुषों के लिए माना जाता था।

समंदर से रोज़ी-रोटी के साथ-साथ अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं रेखा कार्तिकेयन
समंदर से रोज़ी-रोटी के साथ-साथ अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं रेखा कार्तिकेयन
केरल के एक छोटे से समुद्री गाँव से निकली रेखा कार्तिकेयन आज हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि चाहे लहरें कितनी भी ऊंची क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो हर मंजिल हासिल की जा सकती है। विश्व महासागर दिवस पर उनकी यह यात्रा साहस और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आती है।
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