हरियाणा-राजस्थान के बीच बड़ा जल समझौता, 30 साल पुराना विवाद सुलझा, पाइपलाइन से पहुँचेगा यमुना का पानी

Gaon Connection | Jun 29, 2026, 19:12 IST
Share

हरियाणा और राजस्थान के बीच यमुना जल परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं। सरकार के अनुसार, इससे दोनों राज्यों की करीब 30 साल पुरानी पेयजल समस्या का समाधान हो गया है। परियोजना के तहत पश्चिमी यमुना नहर से अतिरिक्त वर्षा जल भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए राजस्थान पहुँचाया जाएगा। इससे कई जिलों में पेयजल आपूर्ति, भूजल संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यमुना जल बँटवारे पर बनी सहमति
यमुना जल बँटवारे पर बनी सहमति
हरियाणा और राजस्थान के बीच करीब तीन दशक से लंबित यमुना जल बँटवारे और पेयजल आपूर्ति से जुड़ा विवाद अब सुलझने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सोमवार को दोनों राज्यों ने यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर महत्वपूर्ण समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य हरियाणा से राजस्थान तक भूमिगत पाइपलाइन के ज़रिए यमुना के अतिरिक्त वर्षा जल को पहुँचाकर पेयजल संकट वाले इलाकों को राहत देना है।

सरकार का कहना है कि इस समझौते से हरियाणा और राजस्थान के लोगों की पानी से जुड़ी लगभग तीन दशक पुरानी समस्या का आज समाधान हो गया है।सरकार का कहना है कि परियोजना लागू होने के बाद राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूँ के साथ हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद जैसे क्षेत्रों में नियमित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही अब तक बिना उपयोग बह जाने वाला वर्षा का अतिरिक्त पानी लोगों की प्यास बुझाने, बड़े जलाशयों में संग्रहित करने और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस परियोजना को दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चली आ रही जल समस्या के समाधान और सहकारी संघवाद की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




जुलाई से अक्टूबर तक 580 एमसीएम पानी पहुँचेगा

समझौते के अनुसार जुलाई से अक्टूबर के बीच पश्चिमी यमुना नहर से लगभग 580 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) अतिरिक्त वर्षा जल तीन भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से राजस्थान तक पहुँचाया जाएगा। इन पाइपलाइनों का व्यास 3.6 मीटर से अधिक होगा। परियोजना के तहत हथनीकुंड बैराज से पाइपलाइन बिछाकर राजस्थान के हिस्से का पानी पहुँचाया जाएगा, जिससे 1994 के अपर यमुना बेसिन जल बँटवारा समझौते के तहत राज्य को आवंटित जल का बेहतर उपयोग हो सकेगा।

समझौते में परियोजना की लागत साझेदारी, वित्तीय ज़िम्मेदारी, जल आवंटन, पानी छोड़ने के प्रोटोकॉल, संचालन, रखरखाव, निगरानी व्यवस्था, पारदर्शिता और विवाद समाधान की प्रक्रिया को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि वैज्ञानिक आधार पर तैयार यह ढाँचा आने वाले वर्षों में किसी नए विवाद की संभावना को कम करेगा।

पेयजल के साथ भूजल संरक्षण और विकास को भी मिलेगा लाभ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस समझौते के बाद राजस्थान के सूखे और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता बेहतर होगी। साथ ही अब तक अनुपयोगी रहने वाला अतिरिक्त वर्षा जल बड़े तालाबों और जलाशयों में संग्रहित किया जा सकेगा, जिससे भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी। इससे जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा, राजस्थान और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने मिलकर प्रधानमंत्री के सहकारी संघवाद के संदेश को व्यवहार में उतारा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठकों के बाद कम समय में इस समझौते पर सहमति बन सकी। सरकार का मानना है कि इससे दोनों राज्यों में सामाजिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी तथा लाखों लोगों को दीर्घकालिक लाभ पहुँचेगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ, क्या है परियोजना का उद्देश्य

यमुना जल परियोजना का मुख्य उद्देश्य पश्चिमी यमुना नहर से भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान के हिस्से का पानी पहुँचाना है। इससे राजस्थान के जल संकट वाले इलाकों में पेयजल आपूर्ति मज़बूत होगी, जबकि हरियाणा में वर्षा के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त पानी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। परियोजना से राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझुनूँ के अलावा हरियाणा के भिवानी और फतेहाबाद क्षेत्र सीधे लाभान्वित होंगे।

सरकार के अनुसार, यह समझौता केवल जल आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, भूजल संरक्षण और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया दीर्घकालिक ढाँचा है। दोनों राज्य और केंद्र सरकार मिलकर इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करेंगे, ताकि आने वाले वर्षों में पेयजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को स्थायी राहत मिल सके।
Tags:
  • Yamuna Water Project
  • Haryana Rajasthan Agreement
  • Yamuna Water Dispute
  • Drinking Water Supply
  • Underground Pipeline
  • Water Conservation
  • Groundwater Recharge
  • Western Yamuna Canal
  • Inter-State Water Agreement
  • Water Resources Management