आयुष्मान योजना को पारदर्शी बनाने की तैयारी, यूपी में रिकॉर्ड वेरिफिकेशन अभियान शुरू, अस्पतालों और डॉक्टरों के डाटा की शुरू हुई जाँच
Gaon Connection | May 14, 2026, 17:12 IST
उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आयुष्मान भारत योजना में बड़ा कदम उठा रही है। अस्पतालों और डॉक्टरों के डेटा की गहन जाँच की जा रही है। इसका उद्देश्य योजना का लाभ सही जरूरतमंदों तक पहुंचाना और फर्जीवाड़े को रोकना है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड प्रणाली से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
योगी सरकार ने आयुष्मान योजना को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए चलाया विशेष अभियान
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना यानी आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों और चिकित्सकों के डाटा का विशेष सत्यापन एवं सैनेटाइजेशन अभियान चलाया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल वास्तविक मरीजों तक पहुंचे और किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी साचीज के अनुसार इस अभियान के जरिए अस्पतालों और डॉक्टरों से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की गई, ताकि डाटा को अधिक सटीक और अद्यतन बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि तकनीकी सुधार और मजबूत निगरानी व्यवस्था से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा।
साचीज की सीईओ Archana Verma ने बताया कि हाल ही में चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान अस्पतालों और चिकित्सकों के डाटा का विस्तृत परीक्षण किया गया। जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों से जुड़े हुए थे, जबकि 274 चिकित्सकों के नाम सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज थे। ऐसे मामलों में संबंधित अस्पतालों और चिकित्सकों को नोटिस जारी किए गए और तीन दिन का सत्यापन अभियान चलाया गया।
इस प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को सही और पारदर्शी बनाना है।
जाँच के दौरान यह भी सामने आया कि कई चिकित्सक पहले संबंधित अस्पतालों में कार्यरत थे, लेकिन समय पर रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने के कारण उनके नाम अब भी पुराने अस्पतालों से जुड़े दिखाई दे रहे थे। वहीं कुछ मामलों में यह स्पष्ट हुआ कि कई विशेषज्ञ डॉक्टर वास्तव में एक से अधिक अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। सरकार का कहना है कि इससे दूरस्थ और जरूरतमंद इलाकों में भी विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो पा रही हैं, जो मरीजों के लिए राहत की बात है।
योगी सरकार का फोकस आयुष्मान योजना में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े, डाटा विसंगति और अनियमितताओं को रोकने पर है। सरकार का मानना है कि अगर रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और अपडेटेड रहेगा तो सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का फायदा पहुंचेगा। सरकार तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सुधार कर रही है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाया जा सके।
साचीज की ओर से बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड यानी EHR प्रणाली को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा। इसके जरिए मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि EHR सिस्टम लागू होने से मरीजों को बार-बार जाँच कराने की जरूरत कम होगी। अगर कोई मरीज अस्पताल बदलता है तो उसका पूरा इलाज रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा, जिससे डॉक्टरों को इलाज करने में आसानी होगी और समय भी बचेगा। इसके साथ ही सरकारी निगरानी तंत्र और मजबूत होगा, जिससे योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी साचीज के अनुसार इस अभियान के जरिए अस्पतालों और डॉक्टरों से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच की गई, ताकि डाटा को अधिक सटीक और अद्यतन बनाया जा सके। सरकार का मानना है कि तकनीकी सुधार और मजबूत निगरानी व्यवस्था से गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अस्पतालों और चिकित्सकों के डाटा की हुई गहन जाँच
समीक्षा के दौरान पाया गया कि 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों से जुड़े हुए थे, जबकि 274 चिकित्सकों के नाम सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज थे। ऐसे मामलों में संबंधित अस्पतालों और चिकित्सकों को नोटिस जारी किए गए और तीन दिन का सत्यापन अभियान चलाया गया।
इस प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को सही और पारदर्शी बनाना है।