योगी सरकार का बड़ा अभियान, हर कार्यस्थल बनेगा महिलाओं के लिए सुरक्षित, ‘पॉश’ कानून से बढ़ेगी सुरक्षा
Gaon Connection | Apr 27, 2026, 15:29 IST
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को नई मजबूती दे रही है। 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत कार्यस्थलों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाया जा रहा है। 'पॉश' कानून के जरिए लैंगिक उत्पीड़न के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई हो रही है।
UP CM Yogi Adityanath
उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को नई मजबूती देने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा और व्यापक अभियान छेड़ दिया है। अब लक्ष्य सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि हर कार्यस्थल को महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त बनाने का है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहा ‘मिशन शक्ति’ अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जहां ‘पॉश’ कानून के जरिए कार्यस्थलों पर लैंगिक उत्पीड़न के खिलाफ सख्त जागरूकता और कार्रवाई का माहौल तैयार किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में चल रहे इस अभियान के माध्यम से न केवल महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
जागरूकता अभियान में सरकारी-निजी कार्यालयों के अधिकारी, कर्मचारी, महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य, कॉलेज छात्राएं, अधिवक्ता, श्रमिक संगठन और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महिला सशक्तीकरण मुहिम का हिस्सा यह अभियान कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतिकार) अधिनियम, 2013 (पॉश) और कामकाजी महिलाओं के वित्तीय-कानूनी अधिकारों पर केंद्रित है, जो नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की दिशा में नया आयाम जोड़ रहा है।
अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है। अभियान के तहत ‘पॉश’ अधिनियम के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। अधिनियम कार्यस्थल पर शारीरिक, मौखिक या गैरमौखिक आचरण को, जो महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, यौन उत्पीड़न की श्रेणी में परिभाषित करता है। दस से अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है, जबकि जिला स्तर पर स्थानीय समिति शिकायतों की सुनवाई करती है। शिकायत दर्ज करने की समय-सीमा तीन महीने है, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकता है। 90 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करना जरूरी है। यह अधिनियम महिला की गोपनीयता की रक्षा करता है और दोष सिद्ध होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई या जुर्माना करने का नियोक्ता को अधिकार है। नियोक्ता का दायित्व है कि कार्यस्थल सुरक्षित बने, जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हों और समिति की सिफारिशों का पालन हो।
अभियान में ‘पॉश’ अधिनियम के अलावा कामकाजी महिलाओं के वित्तीय और कानूनी अधिकारों पर भी चर्चा की जा रही है। मातृत्व अवकाश के लाभ, समान कार्य के लिए समान वेतन का अधिकार, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य-सुरक्षा प्रावधान, श्रमिक कानूनों के तहत विशेष सुरक्षा, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग और बीमा योजनाओं तक पहुंच जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक सशक्तीकरण ही वास्तविक महिला सुरक्षा का आधार है।