UP NEWS: बाढ़ नियंत्रण में योगी सरकार का बड़ा बदलाव, नए मॉडल से करोड़ों की बचत और किसानों को राहत
Gaon Connection | May 08, 2026, 19:26 IST
उत्तर प्रदेश सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए नई रणनीति अपनाई है। अब नदियों और नालों की जल धारण क्षमता बढ़ाई जाएगी। इससे करोड़ों रुपये की बचत होगी और किसानों की जमीन भी सुरक्षित रहेगी। प्रदेश सरकार ने बताया कि लखीमपुर खीरी, बाराबंकी और सरयू क्षेत्र में यह मॉडल सफल रहा है। भविष्य में ड्रोन और सेंसर से निगरानी की जाएगी।
मानसून से पहले नदियों और बड़े नालों का पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाया जा रहा
मानसून से पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने बाढ़ नियंत्रण और प्रबंधन की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब पारंपरिक तटबंध, पत्थर की मेड़ और महंगे ढांचागत उपायों के बजाय नदियों और बड़े नालों की जल धारण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस नई रणनीति से करोड़ों रुपये की बचत होगी और बाढ़ नियंत्रण के लिए किसानों की जमीनों के बार-बार अधिग्रहण की जरूरत भी कम पड़ेगी।
प्रदेश सरकार के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों को अपनाकर अब तक करीब 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया गया है, जिससे 3 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा मिला है। इस मॉडल को अब और जिलों में लागू करने की तैयारी की जा रही है।
अब तक बाढ़ नियंत्रण के लिए बड़े पैमाने पर पत्थर की मेड़, गैबियन दीवारें, बड़े बांध और तटबंध बनाए जाते थे, जिन पर भारी खर्च आता था। लेकिन अब सरकार संवेदनशील इलाकों में नदियों और बड़े नालों से गाद निकालने, कीचड़ हटाने और जल प्रवाह के रास्ते को साफ करने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इससे नदी की क्षमता बढ़ रही है और बाढ़ के दौरान पानी का दबाव कम हो सकता है।
Lakhimpur Kheri में बाढ़ सुरक्षा परियोजना के तहत इस नए मॉडल को लागू किया गया। यहां इंजीनियरों ने नदी की क्षमता बढ़ाने के लिए गाद निकाली, जिस पर सिर्फ 22 करोड़ रुपये खर्च हुए। पहले इसी काम के लिए पारंपरिक मॉडल के तहत करीब 180 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था।
Barabanki के एल्गिन ब्रिज क्षेत्र और सरयू नदी के आसपास भी इसी मॉडल को अपनाया गया। यहां केवल 5 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि पुराने उपायों के जरिए करीब 115 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। इससे सरकार को बड़ी वित्तीय बचत हुई।
बाढ़ नियंत्रण विभाग ने इंजीनियरों के साथ मिलकर Ghaghara River, Sharda River और Suheli River के कई हिस्सों में बदलाव किए हैं। इन नदियों के करीब 9 से 16 किलोमीटर हिस्से से गाद निकाली गई है, जिससे उनकी जल वहन क्षमता बढ़ी है।
हर साल तटबंध और मिट्टी के बांध बनाने के लिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाता था। नए मॉडल से इस जरूरत में कमी आएगी, जिससे किसानों की खेती योग्य जमीन सुरक्षित रहेगी।
सरकार ने वर्ष 2026 के लिए हाई रिस्क नदियों और नालों की ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी की योजना बनाई है। इसके साथ ही गाद निकालने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा कम किया जा सके।
योगी सरकार के पिछले 8 वर्षों में राज्य में 1,665 बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इसके अलावा 60 नदियों से गाद निकासी और कई नहरों के निर्माण का काम भी किया गया है।
सरकार ने साफ किया है कि स्पुर, जियो बैग्स, पुराने ढांचों की मरम्मत और आपातकालीन सुदृढ़ीकरण जैसे पारंपरिक उपाय पूरी तरह बंद नहीं होंगे। लेकिन अब इन पर होने वाले भारी खर्च को कम करने के लिए नए विकल्पों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रदेश सरकार के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित जिलों में नए तरीकों को अपनाकर अब तक करीब 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया गया है, जिससे 3 करोड़ से अधिक लोगों को फायदा मिला है। इस मॉडल को अब और जिलों में लागू करने की तैयारी की जा रही है।