अल नीनो की आशंका पर केंद्र अलर्ट, राज्यों को जारी किए विशेष निर्देश; किसानों को बचाने के लिए तैयार हुआ एक्शन प्लान
Gaon Connection | Jun 03, 2026, 13:07 IST
अल नीनो की आशंका और सामान्य से कम मानसून के अनुमान के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को जिला स्तरीय आकस्मिक योजनाएं तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सूखा-सहिष्णु बीज, जल संरक्षण, वैकल्पिक फसल व्यवस्था और किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने पर जोर दिया। सरकार ने कहा कि संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तैयारी की जा रही है।
अल नीनो की आशंका बढ़ी
खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही इस वर्ष मानसून को लेकर बढ़ती चिंताओं ने केंद्र सरकार की सक्रियता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने जहां इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने का अनुमान जताया है, वहीं मौसम के आगे बढ़ने के साथ अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना भी व्यक्त की है। अल नीनो आमतौर पर बारिश में कमी, लंबे शुष्क अंतराल और कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार ने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों को अभी से तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए हैं। कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों से जिला स्तर पर तैयार आकस्मिक योजनाओं को तत्काल लागू करने को कहा है ताकि किसानों और फसलों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कृषि भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों तक समय पर सलाह पहुंचाने, सूखा सहन करने वाली प्रमाणित बीज किस्मों की उपलब्धता सुनिश्चित करने, नमी संरक्षण बढ़ाने और जलाशयों के पानी का वैज्ञानिक उपयोग करने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि आकस्मिक योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उनका प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए।
चौहान ने राज्यों को निर्देश दिया कि यदि दो से चार सप्ताह तक बारिश में कमी रहती है तो दोबारा बुवाई, जीवन रक्षक सिंचाई और वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए स्पष्ट रणनीति तैयार रखी जाए। किसानों को मौसम से जुड़ी जानकारी और सलाह तेजी से उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल सेंटर सेवाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
आईएमडी ने अनुमान जताया है कि इस वर्ष मानसून दीर्घकालिक औसत का करीब 90 प्रतिशत रह सकता है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल पहुंच सकता है। हालांकि मौसम के उत्तरार्ध में अल नीनो की स्थिति विकसित होने की आशंका बनी हुई है, जिस पर सरकार लगातार नजर बनाए हुए है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए देश में बीजों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व भी तैयार किया गया है। कृषि मंत्री ने जरूरत पड़ने पर दोबारा बुवाई के लिए कम अवधि वाली फसल किस्मों के बीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कृषि मंत्री ने ग्रामीण विकास एजेंसियों को खेत तालाबों, वर्षा जल संचयन और अन्य स्थानीय जल संरक्षण उपायों को तेजी से बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है, वहां उसका उपयोग वैज्ञानिक, संतुलित और प्राथमिकता आधारित तरीके से किया जाना चाहिए ताकि अधिकतम किसानों और फसलों को लाभ मिल सके।
मौसम में बदलाव के कारण बढ़ने वाले कीटों और रोगों की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी। किसानों को समय रहते उपचार और बचाव संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाएगी ताकि फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे संभावित मौसमीय चुनौतियों को लेकर घबराएं नहीं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास, बेहतर जल प्रबंधन, आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों के जरिए संभावित चुनौतियों के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि समय पर तैयारी और प्रभावी रणनीति के जरिए किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।