घरेलु यूरिया उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का ज़ोर, 6 नए सयंत्रों से बढ़ी क्षमता
Gaon Connection | Jul 25, 2026, 19:08 IST
सरकार ने किसानों को उर्वरक की कमी न हो इसके लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाया है। 6 नए यूरिया संयंत्रों से उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। आयात स्रोतों का विस्तार कर वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का असर कम किया गया है। यूरिया उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है और फॉस्फेट व पोटाश उर्वरकों पर भी ध्यान दिया गया है। इन पहलों से देश उर्वरक उत्पादन में अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।
उर्वरक उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सरकार के नए कदम
देश में खरीफ और रबी दोनों मौसम में उर्वरकों की समय पर उपलब्धता किसानों के लिए सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों तक उर्वरक की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
इसी दिशा में सरकार ने नए यूरिया संयंत्र स्थापित करने, आयात के स्रोतों का विस्तार करने और उर्वरकों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कई कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य किसानों को हर फसल सीज़न में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और देश को उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
केंद्र सरकार के अनुसार नई निवेश नीति के तहत देश में छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इन संयंत्रों से 76.2 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ी है। इसके बाद देश की कुल घरेलू यूरिया उत्पादन क्षमता 2014-15 के 207.54 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से बढ़कर 2026-27 में 269.42 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष हो गई है।
इनमें तेलंगाना के रामागुंडम, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, झारखंड के सिंदरी, बिहार के बरौनी, पश्चिम बंगाल के पानागढ़ और राजस्थान के गड़ेपन स्थित संयंत्र शामिल हैं। सभी संयंत्र आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है और उत्पादन क्षमता बेहतर बनी रहती है।
सरकार ने केवल घरेलू उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि आयात व्यवस्था को भी मजबूत किया है। उर्वरक विभाग ने विभिन्न देशों से आयात के नए स्रोत विकसित किए हैं और भारतीय मिशनों की मदद से अतिरिक्त आपूर्तिकर्ताओं की पहचान की है।
इसी प्रयास के तहत अप्रैल 2026 में वैश्विक निविदा के माध्यम से 25 लाख मीट्रिक टन और जून 2026 में 17.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद सुनिश्चित की गई। सरकार का कहना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति में आने वाली बाधाओं का असर कम करने में मदद मिली है।
सरकार के अनुसार प्रत्येक फसल मौसम शुरू होने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्यों से परामर्श कर उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है। इसी आधार पर उर्वरक विभाग राज्यों को मासिक आपूर्ति योजना जारी करता है। देशभर में उर्वरकों की आवाजाही पर एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाती है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों के बीच नियमित समीक्षा बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती हैं, ताकि आवश्यकता के अनुसार समय पर अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
सरकार के अनुसार नई यूरिया नीति और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के उपायों का असर उत्पादन पर भी दिखाई दिया है। वर्ष 2014-15 में देश में लगभग 225 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ था, जो बढ़कर 2023-24 में 314.07 लाख मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। वहीं 2025-26 के दौरान देश में 293.30 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन दर्ज किया गया। सरकार ने हाल ही में यूरिया-2026 राष्ट्रीय निवेश नीति को भी मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य घरेलू निवेश बढ़ाकर यूरिया उत्पादन क्षमता को और मजबूत करना है।
सरकार ने फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। खरीफ 2026 के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के तहत 41,533.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी को मंजूरी दी गई है।
इसके साथ ही घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने, नई उत्पादन इकाइयों को प्रोत्साहन देने और सिंगल सुपर फॉस्फेट के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न नीतिगत फैसले किए गए हैं। सरकार के अनुसार वर्ष 2021 की तुलना में पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के तहत उपलब्ध उर्वरकों के ग्रेड 22 से बढ़कर 28 हो गए हैं।
सरकार का कहना है कि घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आयात स्रोतों में विविधता लाने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने से किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। आने वाले वर्षों में नए संयंत्रों के शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे उर्वरकों के मामले में देश की आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिल सकती है।
इसी दिशा में सरकार ने नए यूरिया संयंत्र स्थापित करने, आयात के स्रोतों का विस्तार करने और उर्वरकों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कई कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य किसानों को हर फसल सीज़न में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना और देश को उर्वरक उत्पादन के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
छह नए यूरिया संयंत्रों से बढ़ी उत्पादन क्षमता
इनमें तेलंगाना के रामागुंडम, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, झारखंड के सिंदरी, बिहार के बरौनी, पश्चिम बंगाल के पानागढ़ और राजस्थान के गड़ेपन स्थित संयंत्र शामिल हैं। सभी संयंत्र आधुनिक तकनीक पर आधारित हैं, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है और उत्पादन क्षमता बेहतर बनी रहती है।
उर्वरकों की उपलब्धता के लिए आयात स्रोतों का विस्तार
इसी प्रयास के तहत अप्रैल 2026 में वैश्विक निविदा के माध्यम से 25 लाख मीट्रिक टन और जून 2026 में 17.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया की खरीद सुनिश्चित की गई। सरकार का कहना है कि इससे वैश्विक आपूर्ति में आने वाली बाधाओं का असर कम करने में मदद मिली है।
हर सीज़न से पहले तैयार होती है आपूर्ति योजना
यूरिया उत्पादन में लगातार दर्ज हुई बढ़ोतरी
फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों पर भी ध्यान
इसके साथ ही घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने, नई उत्पादन इकाइयों को प्रोत्साहन देने और सिंगल सुपर फॉस्फेट के उपयोग को बढ़ाने के लिए भी विभिन्न नीतिगत फैसले किए गए हैं। सरकार के अनुसार वर्ष 2021 की तुलना में पोषक तत्व आधारित सब्सिडी योजना के तहत उपलब्ध उर्वरकों के ग्रेड 22 से बढ़कर 28 हो गए हैं।
सरकार का कहना है कि घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आयात स्रोतों में विविधता लाने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने से किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। आने वाले वर्षों में नए संयंत्रों के शुरू होने के बाद उत्पादन क्षमता में और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे उर्वरकों के मामले में देश की आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिल सकती है।