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किसान आंदोलन में इतिहास का नया अध्याय बनेगी किसान ट्रैक्टर परेड

किसान संगठनों ने इसे किसान गणतंत्र परेड का नाम दिया गया है। यह परेड देश के समक्ष किसानों की एकता और शक्ति का प्रदर्शन होगी। परेड अनुशासन और शांति से संपन्न हो इसे लेकर किसान नेताओं ने पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बनाया है।

Arvind Kumar SinghArvind Kumar Singh   25 Jan 2021 2:39 PM GMT

किसान आंदोलन में इतिहास का नया अध्याय बनेगी किसान ट्रैक्टर परेड

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड भारत ही नहीं दुनिया के किसान आंदोलनों के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रही है। अब तक किसान आंदोलनों के इतिहास में ऐसी ट्रैक्टर परेड कभी नहीं हुई। परेड दिल्ली के अलावा भी कई राज्यों में अलग-अलग भी होगी। मोटा आकलन है कि इस परेड में करीब छह लाख ट्रैक्टर शामिल होंगे। दिल्ली की परेड को पुलिस ने कई हिदायतों के साथ 12 बजे से 5 बजे के बीच निकालने की अनुमति दी है। तब तक सरकारी स्तर का मुख्य समारोह संपन्न हो जाएगा। किसान अपने अपने ट्रैक्टरों को सजा संवार कर पूरी तैयारी से दिल्ली पहुंचे हैं।

ट्रैक्टर परेड की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पहले इसे लेकर तमाम अवरोध औऱ रुकावटें थीं, लेकिन उसे सरकार ने मान लिया। किसान संगठनों ने इसे किसान गणतंत्र परेड का नाम दिया गया है। यह परेड देश के समक्ष किसानों की एकता और शक्ति का प्रदर्शन होगी। परेड अनुशासन और शांति से संपन्न हो इसे लेकर किसान नेताओं ने पुलिस के बीच बेहतर तालमेल बनाया है। नागरिक संगठन कई जगह परेड का स्वागत भी करेंगे। किसान संगठनों ने इस रैली के बाबत एक अपील भी जारी की है और कहा है कि इसे हर हालत में शांतिपूर्ण और अनुशासन से संपन्न करना है। अपील में कहा गया है कि " हम दिल्ली को जीतने नहीं जा रहे हैं, बल्कि देश की जनता का दिल जीतने जा रहे हैं। ..गणतंत्र दिवस पर गण यानि हम लोगों ने कभी ऐसी परेड नहीं निकाली है। इसके जरिए हमें देश दुनिया को अपना दुख दर्द दिखाना है और तीनों किसान विरोधी कानूनों को सच्चाई बताना है।"

अतीत के किसान आंदोलनों में सरकारों का ध्यान आकृष्ट करने के कई अनूठे तरीके अपनाए गए हैं। तमिलनाडु के किसानों ने नरमुंडों के साथ प्रदर्शन किया तो चौधरी टिकैत ने जानवरों के साथ जेल भरो आंदोलन के साथ धरना, घराव और कई तरह से रणनीति बनायी। पंजाब और हरियाणा के किसान संगठन रेलवे लाइन जाम करने से लेकर लंबे धरने और घेराव करते रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र में विशाल पैदल मार्च जैसे नजारे दिखे। लेकिन ट्रैक्टर परेड किसान आंदोलन के इतिहास का अहम पड़ाव है। इसमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड ही नहीं कई राज्यों के किसानों की भागीदारी होने जा रही है। ट्रैक्टरों पर सम्मान के साथ राष्ट्रीय ध्वज और उन किसान संगठनों का झंडा लगेगा, जिससे वे किसान जुड़े हैं। लेकिन परेड में किसी भी पार्टी का झंडा लगाने पर प्रतिबंध रहेगा।


उत्तर प्रदेश दिल्ली सीमा यानि गाजीपुर बॉर्डर पर ट्रैक्टरों की विशाल संख्या पहुंच चुकी है। यहां पर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश औऱ उत्तराखंड के किसानों के पहुंचने का क्रम जारी है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत अपने सहयोगियों के साथ परेड की तैयारियों में व्यस्त है। यहां पर करीब 25 हजार से तीस हजार ट्रैक्टरों के पहुंचने का आकलन देर रात तक किया गया है। जिनको दिल्ली आने मे बाधा है वे अपने जिलों में ही 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालेंगे।

किसानों की परेड की तैयारी कई दिनों से लगातार चल रही है। सरकारी स्तर पर इसे टालने के सभी संभव उपाय कई राज्यों में पुलिस की मदद से किया गया। लेकिन किसान संगठनों के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा। अब सिंघु बार्डर, टीकरी बार्डर और गाजीपुर से तय रूटों से किसान परेड निकलेगी और वहीं वापस होगी। हालांकि आखिरी दौर में कृषि मत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसी और दिन रैली निकालने की अपील की लेकिन तब तक प्रशासन ने रैली निकालने की रजामंदी दे दी थी। कई दौर की वार्ता के बाद किसान संगठनों ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तरप्रदेश पुलिस को भी पूरा सहयोग देते हुए रूट तैयार करने मे मदद की।

सरकारी स्तर पर गणतंत्र दिवस परेड 26 जनवरी को 9.50 बजे से आरंभ होगी और उसके समाप्त होने के बाद किसानों की परेड निकलेगी। किसान परेड के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने कुछ खास हिदायतें जारी की है। परेड में ट्रैक्टर और दूसरी गाड़ी चलेंगी, लेकिन ट्रॉली नहीं जाएगी। किसान अपने साथ 24 घंटे का राशन पानी और ठंड से बचाव का इंतजाम भी रखें। हर ट्रैक्टर या गाड़ी पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ किसान संगठन का झंडा लगाया जा सकता है लेकिन किसी पार्टी का झंडा नहीं लगेगा। किसान परेड में अपने साथ किसी तरह का हथियार और यहां तक कि लाठी या जेली भी नहीं लाएंगे। एक ट्रैक्टर पर ड्राइवर समेत अधिकतम पांच लोग सवार हों सकेंगे और कोई भी बोनट, बंपर या छत पर कोई नहीं बैठेगा। सभी ट्रैक्टर अपनी लेन में चलेंगे और कोई रेस नहीं लगाएगा। ट्रैक्टर में ऑडियो डेक नहीं बजेगा। किसान संगठनों ने कहा कि हमें गणतंत्र दिवस की शोभा बढ़ानी है, पब्लिक का दिल जीतना है। किसी से अभद्रता या झगड़ा नहीं करना है। न किसी अफवाह पर ध्यान देना है।

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