भारत सीखे, नवोन्मेष के क्षेत्र में क्यों अग्रणी है इज़राइल? 

भारत सीखे, नवोन्मेष के क्षेत्र में क्यों अग्रणी है इज़राइल? प्रताकात्मक तस्वीर

भारत और इजराइल दोनों ही शत्रुतापूर्ण पड़ोस से जूझते आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली इजराइल यात्रा से दोनों ही लोकतंत्रों के संबंधों में एक नई ऊंचाई देखने को मिल रही है। भारत को इजराइल से एक अहम सबक यह सीखना चाहिए कि विफलताओं का सामना करने के बावजूद दोबारा उठकर कैसे खड़ा हुआ जाता है। इजराइल को ‘स्टार्टअप नेशन’ भी कहा जाता है। मोदी ने भारत से भी ‘स्टार्टअप एंड स्टैंडअप’ (स्टार्ट अप शुरू करने और उठ खड़े होने) का आह्वान किया था।

मोदी ने कहा कि ‘विकास की राह में नवोन्मेष सबसे बड़ा लक्ष्य है, इजराइल ने हमेशा नवोन्मेष और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा दिया है।’ भारतीयों और इजराइल नवोन्मेषी तंत्र में एक बड़ा अंतर उस तरीके में है, जिससे इजराइली लोग विफलता को स्वीकारते हैं, यहां विफल उद्यमी विफलता को अपने ऊपर एक दाग की तरह नहीं देखते। दशकों तक भारत और इजराइल ने आंख से आंख मिलाकर नहीं देखा था। दशकों तक भारत का झुकाव फलस्तीन की ओर था और यह संबंध करगिल युद्ध के दौरान उस समय विकसित हुआ, जब इस्राइल ने भारत को आधुनिक हथियार उपलब्ध करवाए। इससे पाकिस्तानी घुसपैठियों को करगिल से खदेड़ने में मदद मिली। तब से यह संबंध विकसित होता आ रहा है।

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भारत ने वर्ष 2008 में एक इजराइल जासूसी उपग्रह टेकसार प्रक्षेपित किया था। भारत ने इजराइल से ऐसा ही एक उपग्रह रिसैट-2 खरीदा भी था। यह उपग्रह शत्रु पड़ोसियों पर नजर रखने के लिए था, यह सरकारी स्तर पर सहयोग था। मोदी की इस यात्रा के बाद दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां अब तत्परता के साथ सहयोग शुरू कर सकती हैं। आज इजराइल उच्च प्रौद्योगिकी का केंद्र है, यदि ‘स्टार्ट अप’ देश के तौर पर भारत के अभियान को आगे बढ़ाना है तो मौलिक ‘स्टार्ट अप नेशन’ इजरायल से बहुत कुछ सीखना होगा।

इजराइल से सीखे जा सकने वाले सबक में एक सबक शीर्ष 10 सफल उद्यमी पूंजी कंपनियों में से एक जेवीपी की कार्यप्रणाली से सीखा जा सकता है। बंजर रेगिस्तान नेगेव में स्थित जेवीपी साइबर लैब्स को सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशालाओं में से एक माना जाता है, यह नए-नए विचारों को प्रोत्साहन देता है और पिछले कुछ साल में इसने 1.3 अरब डॉलर की 120 कंपनियां खड़ी करने में मदद की। लेकिन ऐसा क्या है जो इजराइल को स्टार्ट अप के लिए एक अदभुत तंत्र बनाता है?

इजराइल में जेवीपी साइबर लैब्स में साझेदार योव जरुया ने कहा, ‘स्टार्टअप देश के तौर पर इजराइल में सांस्कृतिक आधार पर जो मूलभूत अंतर है, उनमें से एक अंतर विफलता के प्रति हमारे नजरिए में है। इजराइल में हम विफल होने पर किसी को दंडित नहीं करते। विफल हुई कंपनियों के उद्यमियों को हम उन लोगों के तौर पर देखते हैं, जिन्होंने अपने अनुभव से लाभ लिया है।’

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उन्होंने कहा, ‘दुनिया के कई देशों ने हमसे ठीक ऐसा बनने के लिए, नवोन्मेष का सफल मॉडल बनाने के बारे में पूछा है लेकिन यहां संस्कृति एक अवरोधक है, असल में विफलता को स्वीकार कर पाना थोड़ा जटिल है या तो आप इसे स्वीकार कर लीजिए या फिर इसे नीची निगाह से देखिए।’इजराइल स्टार्टअप के माहौल केा बढ़ावा देता है, उम्मीदों से भरे स्टार्ट अप को इजराइली सरकार छह लाख डॉलर का जोखिम मुक्त ऋण देती थी। यदि कंपनियां विफल होती हैं तो उन्हें ऋण वापस करने की जरुरत नहीं है, यदि वे सफल होते हैं तो उन्हें वार्षिक तौर पर तीन प्रतिशत की रॉयल्टी देनी होगी।

इजराइल को सौर एवं जल प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के क्षेत्र में वैश्विक नेता माना जाता है। इजराइल एक बेहद शुष्क देश है, उसे भारत की तरह मानसून का वरदान नहीं प्राप्त है, इजराइल में बारिश की कमी हो सकती है लेकिन देश ने उच्च प्रौद्योगिकी लगाई है ताकि एक-एक बूंद को एकत्र किया जा सके और खराब पानी का भी पुनर्चक्रण किया जा सके। आज इजराइल पानी का इस्तेमाल शांति के हथियार के रूप में कर रहा है।

(पल्लव बाग्ला विज्ञान के जाने माने लेखक हैं यह उनके अपने विचार हैं, पीटीआई भाषा)

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