ग्लोबल हैंड वाशिंग डे: “हमारा हाथ, हमारा भविष्य“

ग्लोबल हैंड वाशिंग डे: “हमारा हाथ, हमारा भविष्य“प्रतीकात्मक तस्वीर।

लखनऊ। ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे प्रति वर्ष 15 अक्टूबर को मनाया जाने वाला वार्षिक विश्व समर्थित दिवस है जो साबुन के साथ हाथ धोने एवं बीमारियों से बचाव और जीवन की सुरक्षा के लिए एक आसान, प्रभावी और बेहतर तरीके के रूप में जागरूकता बढ़ाने और समझने के लिए समर्पित है।

इस वर्ष यह दिवस ”हमारा हाथ, हमारा भविष्य” के विषय पर मनाया जाएगा जिसका उद्देश्य हाथ धोने से हमारे स्वास्थ्य की सुरक्षा और विशेषकर उन प्रमुख बीमारियों की रोकथाम जिनसे युवा बच्चों की मृत्यु हो रही है। यूनिसेफ के एक अध्ययन के अनुसार, विश्व भर में बाल मृत्यु के दो प्रमुख कारण डायरिया और निमोनिया हैं। एक वर्ष के दौरान, पांच वर्ष से कम आयु के 1.8 मिलियन बच्चे निमोनिया और 1.5 मिलियन बच्चे डायरिया के कारण अपना जीवन खो देते हैं।

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ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज रिपोर्ट, 2013 और लांसेट 2015 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रति वर्ष उत्तर प्रदेश में लगभग 50 लाख बच्चे जन्म लेते हैं और लगभग 5 लाख बच्चे 5 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले मर जाते हैं। इन पांच लाख बच्चों में निमोनिया से 17 प्रतिशत और डायरिया से 13 प्रतिशत बच्चे मर जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, औसतन, उत्तर प्रदेश में प्रत्येक बच्चा एक वर्ष में लगभग 2-3 बार डायरिया और न्यूमोनिया से पीड़ित होता है।

महत्वपूर्ण समय

खाना बनाते या खाना खाने से पहले और शौच के बाद, साबुन से हाथ धोने से तेज श्वास संक्रमण की दर को 23 प्रतिशत और डायरिया की दर को 40 प्रतिशत से अधिक तक कम किया जा सकता हैं। एक अध्ययन से पता चलता है कि बच्चों का प्रसव कराने वाले व माताओं के साबुन से हाथ धोने से नवजात शिशु के जीवित रहने की संभावना 44 प्रतिशत तक बढ़ जाती हैं।

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प्रथम ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे 2008 में मनाया गया, जिसमें विश्व भर के 70 से अधिक देशों के 120 मिलियन से अधिक बच्चों ने साबुन से हाथ धोये । 2008 के बाद से, समुदाय और राष्ट्रीय नेताओं ने हाथ धोने, सिंक एवं टिपी नल बनाने और साफ हाथों की सादगी तथा मूल्य का प्रदर्शन करने के लिए ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे का इस्तेमाल किया है। प्रतिवर्ष विश्व भर के 100 से अधिक देशों में 200 मिलियन लोग इस दिवस के आयोजन में शामिल होते हैं। ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे का सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, निजी कंपनियों और व्यक्तियों की एक विस्तृत श्रेणी के द्वारा समर्थन किया गया है ।

महिला स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं वात्सल्य संस्था की प्रमुख डॉक्टर नीलम सिंह कहती हैं “ हाथ धोना एक सरल लेकिन बहुत ही महत्वपूर्ण व्यवहार है जो प्रदेश में बच्चों में डायरिया से होने वाली मृत्यु को पचास फीसदी और श्वास संबंधी बीमारियों से होने वाली मृत्यु को एक चौथाई तक रोक सकता है। पांच वर्ष से छोटे बच्चों में होने वाली मृत्यु को कम करने हेतु स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वच्छ भारत मिशन को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है जिससे हाथ धोने के सन्दर्भ में जागरूकता पैदा की जा सके और इस व्यवहार को प्रोत्साहित किया जा सके साथ ही घरेलू स्तर पर हाथ धोने के व्यवहार को बढ़ावा दिया जा सके और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और आंगनवाड़ी केन्द्रों जैसे संस्थानों पर हाथ धोने संबंधी सुविधाओं को सुनिश्चित किया जा सके|”

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हाथों को धोना निम्न स्थितियों में अनिवार्य हैं

  • खाना-खाने से पहले और बाद में।
  • नवजात शिशु को छूने से पहले।
  • शौच के बाद।
  • छींकने, खांसने या नाक साफ़ करने के बाद।
  • जानवर या जानवरों के कचरे को छूने के बाद।
  • कचरे से निपटने के बाद।
  • घावों के उपचार से पहले और बाद में।
  • बीमार या घायल व्यक्ति को छूने से पहले और बाद में।
  • सर्दी को दूसरों तक फैलाने से रोकने के लिए 10 बार हैंड वाश का नियमित हाथ धोने का अभ्यास करें। सबसे महत्वपूर्ण बात, हाथ धो लो

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