बच्चों को अगर पेट के कीड़े सताएं तो अपनाएं ये हर्बल उपाय

"बच्चों को यदि पेट में कृमि (कीड़े) की शिकायत हो तो लहसुन की कच्ची कलियों का 20-30 बूंद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।"

बच्चों को अगर पेट के कीड़े सताएं तो अपनाएं ये हर्बल उपाय

अक्सर देखा जाता है कि बच्चों को भूख कम लगती है और उनका पेट भी खराब रहता है और कई बार तो बच्चे पेट के निचले हिस्से में दर्द होने की शिकायत भी करते रहते हैं। बच्चों में चिड़चिड़ापन, चेहरे पर सफेद से निशान और शरीर कमजोर सा दिखायी देना आदि पेट में कीड़ों या कृमियों के होने के लक्षण हैं। कीड़ों के होने की वजह से बच्चों में रक्त अल्पता यानि एनिमिया और कुपोषण भी होता है। इसी कुपोषण, खून की कमी और कई बार मल के साथ खून जाने के कारण बच्चों को बेहद थकान और कमजोरी महसूस होती है।

संक्रमित भोजन और पेय पदार्थों के सेवन, घरों के आसपास की गंदगी, अधकचे भोजन का सेवन जैसी अनेक वजहें हैं जो पेट में कीड़ों की वजह बनते हैं। पेट में कीड़े होने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर काफी प्रभाव पड़ता है। थकान, चिड़चिड़ापन और शारीरिक दुर्बलता के अलावा चेहरे और शरीर की त्वचा पर सफेद धब्बे, पेट का फूला हुआ सा दिखाई देना आदि इस रोग के लक्षणों के तौर पर मुख्य माने जाते हैं।

हमारे शरीर के भीतर पाए जाने वाले सभी कृमि अपनी प्रजनन क्रिया के बाद आंतो में अंडे देते हैं। जब कृमिग्रसित व्यक्ति खुले में शौच करता है तो ये अंडे शौच के माध्यम से मिटटी में पहुंच जाते हैं। इस मिट्टी के संपर्क में आने पर अन्य व्यक्ति भी कृमियों की चपेट में आ जाता है। मिट्टी से कृमि के अंडे दरअसल गंदे और धूल आदि से सने हाथों के जरिये हमारे खाने की चीज़ों तक पहुंच जाते हैं और इस तरह कृमियों का जीवनचक्र चलता है, इसलिए खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से रगड़-रगड़कर हाथ धोना बेहद आवश्यक होता है। इन सब में महत्वपूर्ण बात ये है कि हमें साफ-सफ़ाई पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

स्वस्थ रहन-सहन अनेक रोगों को हमसे दूर रखता है फिर भी यदि आप या आपका बच्चा पेट के कीड़ों से संक्रमित हो जाएं तो घबराने की बात नहीं। हिन्दुस्तानी आदिवासियों के हर्बल नुस्खे अपनाकर और प्राकृतिक हर्बल उपायों के आधार पर आप भी इस समस्या से निजात पा सकते हैं। चलिए इस सप्ताह जानते हैं आदिवासियों के कुछ जबरदस्त हर्बल उपाय जिनका उपयोग कर आप भी पेट के कृमियों की समस्या से निपट सकते हैं।

बच्चों को यदि पेट में कृमि (कीड़े) की शिकायत हो तो लहसुन की कच्ची कलियों का 20-30 बूंद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

आदिवासियों के अनुसार सूरनकंद की सब्जी अक्सर खाने वाले लोगों को पेट में कृमि की शिकायत नहीं रहती है। कच्चे सूरनकंद को छीलकर नमक के पानी में धोया जाए और लगभग 4 ग्राम कंद को सोने से पहले एक सप्ताह प्रतिदिन चबाया जाए तो पेट के कीड़े बाहर निकल आते हैं।

पपीता के कच्चे फलों से निकलने वाले दूध को बच्चों को देने से भी पेट के कीड़े मर कर बाहर निकल आते है। तीन दिनों तक प्रतिदिन रात को आधा चम्मच रस का सेवन कराया जाए तो पेट के कृमि मर जाते हैं।

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पातालकोट के आदिवासी कच्चे सीताफल को फोड़कर सुखा लेते हैं और इसका चूर्ण तैयार करते है। इस चूर्ण को बेसन के साथ मिलाकर बच्चों को खिलाते है, इससे भी पेट के कीड़े मर जाते हैं।

बेल का रस पीने से भी पेट के कीड़े मर जाते हैं।

बेल के पके फलों के गूदे का रस या जूस तैयार करके पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। डांग, गुजरात के आदिवासी मानते हैं कि बेल के फलों के बजाए पत्तों के रस का सेवन किया जाए तो ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

पपीता के कच्चे फलों से निकलने वाले दूध को बच्चों को देने से भी पेट के कीड़े मर कर बाहर निकल आते है। तीन दिनों तक प्रतिदिन रात को आधा चम्मच रस का सेवन कराया जाए तो पेट के कृमि मर जाते हैं।

पपीते के फलों के डंठल से निकलने वाले दूध (3 मिली) को बच्चों को रात में सोते समय देने से पेट के कीड़े मर जाते है और शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

पातालकोट के हर्बल जानकारों की मानी जाए तो पेट में कीड़े होने पर 1 चम्मच हल्दी चूर्ण रोज सुबह खाली पेट एक सप्ताह तक ताजे पानी के साथ लेने से कीड़े खत्म हो सकते हैं।

जीरा के कच्चे बीजों को दिन में 5 से 6 बार करीब 3 ग्राम की मात्रा चबाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। आदिवासियों के अनुसार कच्चा जीरा पाचक को दुरुस्त भी करता है और गर्म प्रकृति का होने की वजह से कीड़ों को मार देता है और कीड़े शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

कच्चे नारियल को चबाते रहने से पेट के कीड़े मर जाते हैं, डांग में आदिवासी बच्चों को अक्सर कच्चा नारियल खिलाते हैं और जीरे का चूर्ण बनाकर पानी में घोलकर एक गिलास जीरा पानी का भी सेवन कराते हैं ताकि पेट के कृमि मर जाएं।

परवल और हरे धनिया की पत्तियों की समान मात्रा (20 ग्राम प्रत्येक) लेकर कुचल लिया जाए और एक पाव पानी में रात भर के लिए भिगोकर रख दिया जाए, सुबह इसे छानकर तीन हिस्से कर प्रत्येक हिस्से में थोड़ा सा शहद डालकर दिन में 3 बार रोगी को देने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

गोरखमुंडी के बीजों (सूखे फ़ूल) को पीसकर चूर्ण तैयार कर सेवन कराने से आंतों के कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

गोरखमुंडी के बीजों (सूखे फ़ूल) को पीसकर चूर्ण तैयार कर सेवन कराने से आंतों के कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।

तेजपात की पत्तियों में कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं। सूखी पत्तियों का चूर्ण बनाकर प्रतिदिन रात में सोने से पहले 2 ग्राम, गुनगुने पानी के साथ मिलाकर पिया जाए तो पेट के कृमि मर कर मल के साथ बाहर निकल आते है।

लगभग 10 ग्राम चिरोटा के बीजों को एक कप पानी में उबालकर काढ़ा तैयार कर के बच्चों को देने से भी पेट के कीड़े मर जाते हैं और शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।

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