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विश्व किडनी दिवस: बीमार गुर्दे को स्वस्थ रखने के लिए करें पुनर्नवा पौधे का सेवन

पीलिया होने पर पुर्ननवा के संपूर्ण पौधे के रस में हरड़ या हर्रा के फलों का चूर्ण मिलाकर लेने से रोग में आराम मिलता है, हृदय रोगियों के लिए पुर्ननवा का पांचांग (समस्त पौधा) का रस और अर्जुन छाल की समान मात्रा बड़ी फाय़देमंद होती है

Chandrakant MishraChandrakant Mishra   12 March 2020 12:20 PM GMT

विश्व किडनी दिवस: बीमार गुर्दे को स्वस्थ रखने के लिए करें पुनर्नवा पौधे का सेवन

लखनऊ। देश में किडनी की समस्या से जूझ रहे अधिकतर मरीजों के लिए डायलिसिस जिंदगी का जरिया है। एलोपैथी में किडनी की समस्या के उपचार के लिए सीमित विकल्प को देखते हुए पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञों ने दावा किया है कि सावधानी से भोजन करने और पुनर्नवा का सेवन बीमारी के बढ़ने की गति को धीमी कर सकती है और बीमारी के लक्षणों से निजात दिला सकती है।

दो हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों में दावा किया गया है कि पुनर्नवा जैसे पारंपरिक औषधीय पौधे पर आधारित औषधि का फार्मूलेशन किडनी की बीमारी में रोकथाम में कारगर हो सकता है और बीमारी से राहत दिला सकता है। एक नए अध्ययन के मुताबिक, किडनी की समस्या से जूझ रही एक महिला को पुनर्नवा से बनाया गया सीरप एक महीने तक दिया गया, जिससे उनके रक्त में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर स्वस्थ स्तर पर आ गया।

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नेत्र रोगों में भी फायदेमंद है पुनर्नवा का पौधा। साभार: इंटरनेट

हर्बल एक्सपर्ट दीपक आचार्य का कहना है, " पुनर्नवा का पौधा एक ऐसा पौधा है जो हर वर्ष फिर से नया हो जाता है, इसलिए इसे पुनर्नवा कहा जाता है। इसका प्रयोग पेशाब की रुकावट और गुर्दे से संबंधित बीमारियों में फायदेमंद होता है। पुर्ननवा की ताजी जड़ों का रस (2 चम्मच) दो से तीन माह तक लगातार दूध के साथ सेवन करने से वृद्ध व्यक्ति भी युवा की तरह महसूस करता है। वैसे आदिवासी पुर्ननवा का उपयोग विभिन्न विकारों में भी करते हैं, इसके पत्तों का रस अपचन में लाभकारी होता है।"

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बनारस हिंदू विश्वविद्यालय(बीएचयू) में किया गया अध्ययन 2017 में वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मेसी एंड फार्मास्युटिकल्स साइंस प्रकाशित हुआ। इंडो अमेरिकन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में भी कमल के पत्ते, पत्थरचूर और अन्य जड़ी बूटियों सहित पुनर्नवा से बनायी गयी औषधि के प्रभाव का जिक्र किया है।


बीएचयू के द्रव्यगुण विभाग के प्रमुख के एन द्विवेदी ने कहा," नीरी केएफटी (सीरप) में औषधीय फार्मूलेशन कुछ हद तक डायलिसिस का विकल्प हो सकता है। दरअसल, एलौपैथी में किडनी की बीमारी के उपचार के लिए सीमित विकल्प होने के कारण आयुर्वेदिक औषधि पर जोर बढ़ रहा है।

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सर गंगाराम अस्पताल में सीनियर नेफ्रोलॉजस्टि मनीष मलिक ने कहा कि एलोपैथी में किडनी की बीमारी के उपचार के लिए सीमित संभावना है। उपचार महंगा भी है और पूरी तरह सफल भी नहीं होता। इसलिए, मलिक का कहना है कि पुनर्नवा जैसी जड़ी बूटी पर आधारित नीरी केएफटी की तरह की किफायती आयुर्वेदिक दवा नियमित डायलिसिस करा रहे मरीजों के लिए मददगार हो सकती है।

इनपुट:भाषा

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