मदरसों में बायोमीट्रिक मशीन लागू करने वाला पहला जिला बना इलाहाबाद 

मदरसों में  बायोमीट्रिक मशीन लागू करने वाला पहला जिला बना इलाहाबाद मदरसा 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

इलाहाबाद। स्कूलों के साथ-साथ मदरसों में भी पठन-पाठन दुरुस्त करने की योजना पर अमल करते हुए जिले के राजकीय सहायता प्राप्त मदरसों में बायोमीट्रिक मशीन लगने का काम शुरू हो गया है। मदरसों में तालीम में लापरवाही की शिकायत मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है।

जिले में मौजूद 43 राजकीय सहायता प्राप्त मदरसों में बायोमीट्रिक मशीन लगाने का काम शुरू हो गया है। इन मदरसों में नियुक्त मौलवी को अब दो बार हाज़िरी लगानी होगी। उच्च पदस्थ अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश के किसी मदरसे में ऐसी व्यवस्था नहीं लागू हुई है।

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ऐसी व्यवस्था लागू करने वाला पहला जिला बन गया है इलाहाबाद। इसके लिए अल्पसंख्यक विभाग की ओर से कोई आदेश भी जारी नहीं किया गया था, बल्कि मदरसों के प्रबन्धकों ने खुद इसके लिए पहल की है। मदरसे के प्रबन्धकों के प्रस्ताव पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने गम्भीरता से विचार करने के बाद यह व्यवस्था लागू की। इस सम्बंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एसपी तिवारी कहते हैं, “इसके लिए पिछले कई महीनों से प्रयास किया जा रहा था। कुछ शिक्षकों ने इसका कड़ा विरोध किया तो उनका वेतन रोक दिया गया है।”

165 मदरसों में लगाने की चल रही तैयारी

हाज़िरी के लिए 43 मदरसों में बायोमीट्रिक मशीन लगाने के बाद शेष बचे 165 राजकीय सहायता प्राप्त मदरसों में भी यह मशीन लगाने की तैयारी चल रही है। हालांकि इसके लिए अब दूसरे चरण के शासन से अनुदान भी मिलने वाला है। अभी इन 43 मदरसों में प्रबन्धकों की ओर से लगवाया गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एसपी तिवारी के मुताबिक मदरसों में तालीम लेने वाले बच्चों के हित में कई कल्याणकारी कदम उठाए जाने हैं।

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