शिक्षकों-छात्रों की उपस्थिति पर मुख्यमंत्री कार्यालय की नज़र 

शिक्षकों-छात्रों की उपस्थिति पर मुख्यमंत्री कार्यालय की नज़र फोटो प्रतीकात्मक 

नवनीत अवस्थी/ स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। परिषदीय स्कूलों में बेहतर पढ़ाई का माहौल बनाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिक्षकों की मॉनीटरिंग खुद करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय शिक्षकों के स्कूल आने-जाने के समय के साथ ही बच्चों की उपस्थित का रिकार्ड चेक करेगा। ब्योरा रोजाना आईवीआरएस (इंटएक्टिव वायस रिस्पांस सिस्टम) के जरिए जुटाया जाएगा। सीएम के फैसले से शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी का माहौल बना है। तमाम कवायदों के बाद भी परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक स्तर में बहुत सुधार नहीं हो पाया।

छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिक्षकों पर मॉनीटरिंग का शिकंजा कसा है। सीएम कार्यालय शिक्षकों के साथ ही बच्चों की उपस्थित पर भी नजर रखेंगे। बीएसए को प्रतिदिन की उपस्थित का ब्योरा इंटएक्टिव वायस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) पोर्टल व वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। साथ ही ड्रेस, एमडीएम, पाठ्य समाग्री,जूते-मोजे, स्कूल बैग वितरण भी मॉनीटरिंग का हिस्सा होंगे। सीएम के सख्त फैसले से जिले के शिक्षकों में ऊहापोह के हालात बने हैं।

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प्रभारी बीएसए नसरीन फारूकी ने बताया, “शिक्षकों के स्कूल आने-जाने के समय को हर दिन चेक कराया जा रहा है। सीएम कार्यालय से निर्देश के बाद इस हफ्ते से ब्लाक स्तर पर शिक्षकों की निगरानी शुरू हो गई है।”

सात दिन में लग जाएं शिक्षकों की फोटो

स्कूल के बच्चे व अभिभावक स्कूल में तैनात शिक्षकों को पहचान सकें। वहीं शिक्षकों के फर्जीवाड़ा रोकने को सरकार ने दो माह पहले स्कूलों में तैनात शिक्षकों के फोटो व मोबाइल नंबर नोटिस बोर्ड पर चस्पा कराने के निर्देश दिए थे। बीएसए की लापरवाही से अधिकांश स्कूलों में आदेश का अमल नहीं हो सका है। अधिकारियों की लापरवाही पर निदेशक बेसिक शिक्षा डॉ. सवेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है। निदेशक ने 22 सितंबर को पत्र जारी कर एक सप्ताह के भीतर विद्यालयों में शिक्षकों की फोटो चस्पा हो जाने के आदेश बीएससी को दिए हैं। अमल न होने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

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