स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रहा सिद्धार्थनगर का भरौली स्कूल

स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रहा सिद्धार्थनगर का भरौली स्कूलसिद्धार्थनगर का भरौली गांव स्कूल में विद्यार्थियों की हो रही कमी।

कम्युनिटी जर्नलिस्ट

सिद्धार्थनगर। सरकारी स्कूलों में दाखिले बढ़ाये जाने के लिये प्रत्येक वर्ष सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन कई जगह स्कूलों के प्रधानाध्यापक ही सर्व शिक्षा अभियान को पलीता लगा रहे हैं। सफाई कर्मचारी भी स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखाने में पीछे नहीं हैं। बढ़नी ब्लाक के भरौली गांव में स्थित प्रथमिक स्कूल की भी स्थित बदहाल है। यहां गंदगी के बीच बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।

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भरौली गांव के प्राथमिक स्कूल का गंदा पड़ा टॉयलेट।

जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर पश्चिम में स्थित भरौली गाँव के प्राथमिक स्कूल में कुल तीन सहायक अध्यापक और एक प्रधानाध्यापक हैं। दो सहायिका सहित कुल मिलाकर छह लोगों का स्टाफ है। 99 बच्चों का नामांकन रजिस्टर में है, लेकिन उसमें से 20 से 40 बच्चे ही स्कूल आते हैं। वहीं सफाई व्यवस्था में भी काफी लापरवाही है। पूरे परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। स्कूल के बरामदे व कमरे कि फर्श पूरी तरह टूटी है।

इस संदर्भ में प्रधानाध्यापिका फहमिदा खातून ने बताया, “ फर्श टूटने को लेकर अपने सीनियर अधिकारी को पत्र लिखकर जल्द से जल्द कार्यवाई कि मांग लगभग दो महीने पहले की थी, लेकिन उसका अभी तक कोई परिणाम नहीं आया।” इस सन्दर्भ में सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी बढ़नी ने बताया, “कुछ दिन पहले स्कूल पर गया था और प्रधानाध्यापिका से सब कुछ मेंटेनेंस करने के लिये कहा भी था। अगर वहां लापरवाही है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

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