रिचार्ज शॉप से 50 रुपये देकर मनचले निकलवा लेते हैं लड़कियों के नंबर, करते हैं ब्लैंक कॉल

रिचार्ज शॉप से 50 रुपये देकर मनचले निकलवा लेते हैं लड़कियों के नंबर, करते हैं ब्लैंक कॉलग्रमाीण यूपी के एक स्कूल से लौटती छात्राएं। फोटो सांकेतिक

लख्रनऊ। “मेरे नंबर पर लगातार अनजान नंबर से फोन आते थे। मैंने पांच सिम बदल दिए। एक दिन एक लड़के से मैंने पूछा नंबर कहां से मिला, तो उसने बताया कि जहां से तुम रिचार्ज कराती हो वहां से। मैंने पुलिस में शिकायत करने की धमकी दी तो उसने मेरा नंबर अपने दोस्तों में बांट दिया। तंग आकर मैंने फोन रखना बंद कर दिया।” पुराने लखनऊ में रहने वाली एक 18 वर्ष की एक छात्रा रमा ने बताया।

पांच सिम बदलने के बाद मैंने फोन रखना बंद कर दिया क्योंकि कुछ नंबर से लगातार कॉल आ रहे थे। पता चला उन्होंने नंबर वहां से निकाले थे जहां मैं रिचार्ज कराती थी।
रमा, छात्रा, लखनऊ

इस छात्रा की तरह देश की लाखों लड़कियों को हर दिन ऐसे ब्लैंक कॉल और अऩजान लोगों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा ये समस्या कॉलेज जाने वाली लड़कियों के साथ होती है। राम को फोन करने वाले ये भी बताया था कि उसने 50 रुपये दुकानदार को देकर उसका नंबर लिया था, उसने बातों-बातों में ये भी बताया था कि वो और उसके दोस्त अक्सर 50-100 देकर ऐसा करते हैं।

ऐसे में जरुरी हो जाता कि आप भरोसे की दुकान से रिचार्ज करवाएं। साइबर एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अक्सर छात्र 30-100 रुपये में फुटकर रिचार्ज कराती हैं, जिससे उन्हें बार-बार दुकान पर जाना पड़ते है ऐसे में कई बार नंबर लीक होने की आशंका रहता है। कोशिश करें कि ऑनलाइन रिचार्ज ही कराएं साथ ही अपना नंबर जरुरी साइट पर ही रजिस्टर्ड करें।

समस्या सिर्फ फोन से नहीं हैं बड़े शहरी छात्राएं मनचलों से परेशान हैं। लखनऊ के खुनखुद जी गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली रश्मि (18 वर्ष) बताती हैं, “अक्सर काम होता है लेकिन मैं अकेले शाम को बाजार नहीं जा पाती। क्योंकि बरी रोड की तरफ एक पीपल का पेड़ है। शाम को वहां लड़कों का एक झुंड बैठता है, जिसका काम ही है सिर्फ लड़कियों और महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करना और अगर किसी ने पलट कर कुछ कह भी दिया, तो उनका रास्ता रोक लिया जाता है।"

मैं अकेले शाम को बाजार नहीं जा पाती। क्योंकि बरी रोड की तरफ एक पीपल का पेड़ है। शाम को वहां लड़कों का एक झुंड बैठता है, जिसका काम ही है सिर्फ लड़कियों और महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करना और अगर किसी ने पलट कर कुछ कह भी दिया, तो उनका रास्ता रोक लिया जाता है।”
लता, बालागंज, लखनऊ

रश्मि की तरह पुराने लखनऊ की तमाम लड़कियों ने गांव कनेक्शन की स्वयं टीम से अपने अऩुभव साझा किए। बालागंज की ही रहने वाली लता कुमारी (बदला हुआ नाम 18 वर्ष) का बताती हैं, “अभी कई जगह हालात नहीं बदले हैं। डर की वजह से शाम को निकलना मुश्किल हो गया है। क्योंकि वही रास्ता बाज़ार को जाता है, हम लोग सब काम दिन में ही निपटा लेते हैं और अगर कभी जाना भी हुआ तो भाई या पापा के साथ जाते हैं। अगर उनकी बातों का जवाब दे दिया हमने तो वो कहते हैं की लड़की हो, अपनी इज्ज़त का ख्याल रखके निकला करो।"

बालागंज की रश्मि थोड़ा गुस्से में आगे बताती है, “तंग आकर जब मैं, पुलिस के पास शिकायत दर्ज करने गई तो उन्होंने मेरी एक न सुनी और समझा बुझा कर वापस भेज दिया। पुलिस ने कहा की ऐसी बातों को नज़रअंदाज कर दिया करो, किस-किस को समझाते फिरेंगे हम लोग। इतना समय नहीं है।”

इस बारे में ठाकुरगंज पुलिस थाना के थानाध्यक्ष समर बहादुर सिंह बताते हैं, "हम लड़कियों की मदद करते हैं, कई बार लड़कियां हमारे पास शिकायत करने आती हैं, हम उनकी शिकायत भी लिखते हैं।" वो आगे कहते हैं, "अभी जल्दी ही खुनखुन जी कॉलेज की लड़की आयी थी उसको लड़का परेशान कर रहा था। हमने न केवल लड़की शिकायत दर्ज की बल्कि लड़के को भी हिरासत में ले लिया है।"

हालांकि पिछले कई वर्षों से वुमेन पावर लाइन 1090 के रुप में पुलिस ने महिलाओं और युवतियों को कारगर हथियार दिया है। साथ ही हर कॉलेज स्कूल में पावर एंजिल भी बनाई जा रही हैं जो खुद छात्र हैं लेकिन ऐसे मामलों में पीड़िता को इंसाफ दिलाने में मदद करेंगी।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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