एक बार लगाइए पामारोजा, छह साल तक काटिए फसल 

एक बार लगाइए पामारोजा, छह साल तक काटिए फसल गुलाब की तरह महकता है पामारोजा।

अजय मिश्र/शुभम मिश्र, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

कन्नौज/हरदोई। इत्रनगरी और हरदोई समेत कई जनपदों में पामारोजा की फसल होने लगी है, खास बात यह है कि यह फसल एक बार लगाने पर छह साल तक काटी जाती है। पामारोजा का प्रयोग परफ्यूम बनाने में होता है, इसका बाजार भी मुहैया है। किसानों की सुविधा के लिए एफएफडीसी में तेल निकालने के लिए ड्रम भी निर्धारित शुल्क पर मिल जाएगा।

हरदोई जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर बसे हरपाल ब्लॉक इलाके के इशेपुर गाँव निवासी लज्जाराम यादव (54 वर्ष) बताते हैं, ‘‘हम बहुत गरीब हैं। हमारे खेत भी बहुत कम है, हमें अजतुपूर गाँव के सर्वेश ने पामारोजा की खेती के बारे में बताया तो हमने एक बीघा में फसल लगा दी। ये फसल पांच से छह साल चलती है और साल में एक बार काटी जाती है, एक बीघा में पांच लीटर तेल निकलता है और 1500 रुपए लीटर बचत हो जाती है।”

अन्य फसलों को नीलगाय, छुट्टा जानवर खाकर खत्म कर देते हैं, लेकिन खुशबू वाली फसलों का जानवर नहीं छूते हैं। इससे फसलें सुरक्षित रहती हैैं।

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अजतुपुर गाँव निवासी सर्वेश यादव (48 वर्ष) कहते हैं, ‘‘पामा रोजा की फसल हम लोगों के लिए अधिक फायदेमंद है। हमारा लखनऊ जाना-आना रहता है, वहीं हमें एक लोगों ने पामा रोजा की सलाह दी थी। तभी हमने एक बीघा में बुवाई कर दी।

इसमें एक किलोग्राम बीजा पड़ता है और कोई लागत नहीं लगती केवल हर कटिंग में पानी लगाना पड़ता। यह फसल छह साल चलती है। एक साल में पांच बार इसकी कटाई होती है। एक बार में पांच लीटर तेल निकलता है यह तेल 1500 से 1800 रुपए लीटर बिकता है हमको इससे बहुत फायदा हुआ है।’’

सुरस एवं सुगंध विकास केंद्र (एफएफडीसी) कन्नौज के अवर शोधकर्ता कमलेश कुमार बताते हैं, ‘‘फसल के लिए कन्नौज में क्लाइमेट्स है। हरदोई में भी इसकी खेती होती है। एक एकड़ में करीब 60 लीटर तेल निकलता है। बिक्री 1800 से 2000 रुपए लीटर तक होती है।’’

अवर शोधकर्ता आगे कहते हैं, ‘‘पामा रोजा को जर्नियोल के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह गुलाब की तरह महकता है। गुलाब का तेल नौ-दस लाख रुपए लीटर बिकता है और पामारोजा का 2000 से 2200 रुपए लीटर बिकता है, इसे परफ्यूम में प्रयोग करते हैं।’’

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