यूपी का ये सरकारी स्कूल बना ‘गरीब बच्चों का कान्वेंट’

Vinod SharmaVinod Sharma   22 July 2017 8:19 AM GMT

यूपी का ये सरकारी स्कूल बना ‘गरीब बच्चों का कान्वेंट’सरकारी स्कूल में कम्प्यूटर सीखते बच्चे ।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में चल रही तमाम परियोजनाओं से शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों की भी तस्वीर बदल रही है। इसकी एक बानगी दिखी खुद पीएम के आदर्श गाँव नागेपुर में। जहां का प्राथमिक विद्यालय अब किसी भी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं है। विद्यालय में कम्प्यूटर, टेबलेट, लैपटाप, प्रोजेक्टर समेत कई हाईटेक सुविधाएं मिलेंगी और भविष्य में बहुत कुछ प्रस्तावित भी हैं। ये सुविधाएं सरकार की ओर से नहीं, बल्कि वाराणसी के सनबीम शिक्षण समूह, यूनियन बैंक ने संयुक्त रूप से उपलब्ध करायी है। हालांकि स्कूल को हाईटेक बनाने की पहल बीईओ स्कंद गुप्ता ने की थी।

सनबीम शिक्षण समूह के चैयरमैन दीपक मधोक ने नागेपुर प्राथमिक विद्यालय को गोद लिया है। समूह की ओर से सबसे पहले विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं के तहत कक्षाओं की टूटी-फूटी दीवारों और फर्श की मरम्मत कराकर उसका रंग-रोगन कराया गया। इसके बाद छात्रों को बैठने के लिए बेंच व टेबल की भी व्यवस्था की गयी। विद्यालय के अंदर बिजली की वायरिंग और बच्चों के लिए खेलकूद के सामान कैरम बोर्ड, शतरंज बॉलीबॉल, फुटबॉल सहित झूलों की व्यवस्था की गयी।

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यही नहीं इन बच्चों को शिक्षा के मुख्य धारा से जोडऩे के लिए सनबीम ने तीन कम्प्यूटर लगवाया। बीईओ स्कंद गुप्ता की पहल पर यूनियन बैंक ने 12 टैबलेट, एक लैपटाप और प्रोजेक्टर दिया है। कांवेंट स्कूल जैसी सुविधाएं पाकर बच्चों में काफी उत्साह है। स्कूल के शिक्षक भी खुश हैं। हालांकि अभी स्कूल में स्पेशली कम्प्यूटर के लिए कोई शिक्षक नहीं हैं, जो हैं, वे अपने ज्ञान के आधार पर बच्चों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।

कम्प्यूटर सीखकर खुश हुए बच्चे ।

सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष दीपक मधोक ने कहा,“ सनबीम शिक्षण समूह देश की भावी पीढ़ी के अंदर शिक्षा का दीपक जलाने के लिए संकल्पित हैं और उसका यही प्रयास है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो। उन्होंने कहा कि जल्द ही विद्यालय में वाटर कूलर, मंच और बॉलीबाल के लिए कोर्ट की व्यवस्था कराएंगे।”

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बीईओ स्कंद गुप्ता कहते हैं, “ सरकारी स्कूल के बच्चे काफी होनहार है। इनमें काफी टैलेंट है। वैसे भी हमारा प्रयास है कि प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को कांवेंट स्कूल की तरह सुविधाएं मिले। उनका समुचित विकास हो सके। आगे की पढ़ाई के दौरान उन्हें कोई दिक्कतों का सामना न करना पड़े, ये हमारी कोशिश है। ”

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