पिछले नौ माह में केवल 62 लोगों को ही रोजगार दिला सका सेवायोजन कार्यालय  

Uzaif MalikUzaif Malik   5 Oct 2017 5:46 PM GMT

पिछले नौ माह में केवल 62 लोगों को ही रोजगार दिला सका सेवायोजन कार्यालय  फोटो प्रतीकात्मक 

स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

पीलीभीत। जहां एक ओर देश व प्रदेश सरकार विभिन्न विभागों में लाखों रिक्तियाँ निकालकर युवाओं को रोजगार देने का दावा कर रही है। साथ ही विभिन्न कौशल आधारित पाठ्यक्रमों में युवाओं की ट्रेनिंग कराकर भी उनको आत्मनिर्भर बनाए जाने की कवायद चल रही है। वहीं दूसरी तरफ तराई के पीलीभीत जिले में रोजगार के अवसरों की भारी कमी के चलते यहां के बेरोजगार युवाओं को महानगरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है।

इस संबंध में जब गाँव कनेक्शन ने जिले में रोजगार की स्थिति पर कुछ युवाओं से बात की तो अधिकांश युवाओं ने जिले में रोजगार के पर्याप्त संसाधन ना होने की बात कही। इसमें खास बात यह है कि उन्होंने इसके लिए जिले के जनप्रतिनिधियों को ही दोषी ठहराया। तराई के इस छोटे से जिले का औद्योगिक विकास ना हो पाने की वजह से न जाने कितने युवा डिग्रियां लेकर अपने घर में बैठे हैं। हर बार चुनाव के समय में राजनेता तमाम तरह के रोजगार दिलाने की बात करते हैं। लेकिन चुनाव के बाद कोई भी राजनेता पलट कर इधर नहीं देखता है।

रोजगार देने वाले जिला सेवायोजन विभाग के आंकड़ों की मानें तो जनवरी से अब तक पंजीकृत 13,043 युवाओं में से मात्र 62 बेरोजगार युवाओं को ही रोजगार मिल सका है।

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रोजगार देने में पिछड़ गया पीलीभीत जिला

बीटेक करने बाद बेरोजगार नीतीश कहते हैं, "इस छोटे से जिले में रोजगार नाम की चीज ही नहीं है। जिले की युवा आबादी पर गौर किया जाए तो करीब 60 प्रतिशत युवा दिल्ली, नोएडा, लखनऊ आदि महानगरों में जॉब करते मिलेंगे। मैं भी कुछ समय पहले तक नोएडा में सैमसंग कंपनी में जॉब करता रहा, लेकिन किन्हीं कारणों से जॉब छोड़ कर वापस अपने शहर आना पड़ा। अब बैंक की सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा हूं। खास बात यह है कि यहां बेरोजगारी तो बढ़ ही रही है। साथ ही साथ औद्योगिक विकास ना होने से जिला भी पिछड़ता जा रहा है।"

जिले में रोजगार परक शिक्षा की कमी

"पीलीभीत जिले में रोजगार परक शिक्षा की खासी कमी है। छोटे-छोटे प्रोफेशनल कोर्स करने के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। यदि वहां से डिप्लोमा ले भी लिया तो लड़कियों का दूसरे शहरों में जॉब करना मुश्किल होता है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि युवाओं को अपने ही शहर में सही रोजगार मिल सके।"

- पूजा सक्सेना, पीलीभीत।

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क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि

पीलीभीत जिले की सांसद व केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी से इस संबंध में जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह पीलीभीत चुनाव लड़ने नहीं आतीं बल्कि यहां रहने वाले लोगों की मदद करने आती हैं। वह जिले के एक-एक परेशान आदमी की मदद करना चाहती हैं। लोग अपनी समस्या उन्हें बेझिझक बता सकते हैं। उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जाएगा। जिले का चहुंमुखी विकास उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही लोकसभा क्षेत्र में 40 सड़कें बनवाई जाएंगी।

अपने दो दिवसीय दौरे पर पीलीभीत पहुंची केंद्रीय मंत्री ने कहा, "वह कौशल विकास योजना के तहत जिले के सभी इच्छुक बेरोजगारों को प्रशिक्षण दिलवाना चाहती हैं। इच्छुक युवा इस संबंध में उनके प्रतिनिधियों से संपर्क कर सकते हैं। उनका इस कौशल विकास योजना के तहत जिले के प्रत्येक युवक-युवती को ट्रेनिंग कराकर उनको जॉब दिलाने का लक्ष्य है।"

साथ ही पीलीभीत की सांसद व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने यह भी कहा, "बहुत जल्द सौभाग्य विद्युत योजना शुरू होने वाली है। इससे सभी लोगों को लाभान्वित किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि पूरे संसदीय क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत 1.40 लाख स्वच्छ शौचालय भी बनाए जाएंगे।

शिक्षित बेरोजगार उद्योग के लिए करें आवेदन

ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत जिला उद्योग केंद्र उन्हें बैंक के माध्यम से रोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराएगा। उपायुक्त उद्योग मायाराम सरोज ने बताया, "इसके लिए इच्छुक युवक-युवती उद्योग/ सेवा कार्य के लिए पीएमजी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसकी अंतिम तिथि 8 अक्टूबर है। आवेदनकर्ता को ऑनलाइन किए गए आवेदन की हार्ड कॉपी भी उक्त तिथि तक जिला उद्योग कार्यालय में जमा करनी होगी। आवेदनकर्ता विभिन्न बेरोजगारों के लिए 25 लाख तक के ऋण के लिए आवेदन कर सकता है।"

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