जर्जर हो रहा चित्रकूट का खजुराहो, 200 साल पहले बाजीराव ने करवाया था निर्माण

Divendra SinghDivendra Singh   23 Jan 2019 5:54 AM GMT

चित्रकूट। खजुराहो के मंदिर अपने स्थापत्य कला और मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में भी मिनी खजुराहो है, जिसका निर्माण बाजीराव पेशवा ने कराया था।

पेशवा बाजीराव ने कराया था इसका निर्माण

चित्रकूट जिला मुख्यालय से तीन किमी. दक्षिण दिशा में कर्वी में 18वीं सदी में पेशवा ने गणेश बाग का निर्माण कराया था। इसी को मिनी खजुराहो के नाम से भी जाना जाता है। इसमें खजुराहो शैली पर आधारित काम कला का विस्तृत चित्राकंन है। पंच मंजिलों के समूह को पंचायतन कहते है।

आकर्षक कलाकृतियां मोह लेंगी आपका मन

मन्दिर के ठीक सामने एक तालाब भी है, जिसके ऊपर मन्दिर की ओर स्नान के लिए एक हौज है, जिसमें दो छिद्रों से पानी आता है। मन्दिर में फानूस में लगे हुए लोहे के हुक आज भी कला-कृति एवं साज-सजावट की कहानी बताते हैं। मन्दिर से कुछ हटकर पंचखंड की वावली है, जिसके चार खण्ड भूमिगत हैं। गर्मियों में जलस्तर कम होने पर तीन खंडों के लिए रास्ता जाता है। कर्वी पेशवाकालीन राजमहल से गणेश बाग तक गुप्त रास्ता है, जो पेशवाओं के पारिवारिक सदस्यों के आने-जाने के लिए प्रयोग किया जाता था।

आकर्षक कलाकृति मोह लेंगे आपका मन

खूबसूरत और विशेष तरह की नक्काशी से बना शिव मंदिर इस बाग का मुख्य आकर्षण है। जिसे स्थानीय लोग 'गणेश मंदिर' के रूप में जानते हैं। इस मंदिर में कामुक मूर्ति कला देखने को मिल सकती है। खास कर इस मंदिर के गुंबदों पर खजुराहो मंदिर की तरह मूर्ति कला उकेरी गई है। मंदिर के बरामदे में चारों ओर से सीढ़ियों से घिरा एक तालाब है जो मंदिर के सौन्दर्य को बढ़ाता है।

इस मंदिर के अलावा यहां सात मंजिला बनी बावड़ी भी देखने को मिलती है। यह पानी एकत्र करने का बेहतरीन तरीका और कला का एक शानदार नमूना है। यही नहीं, इसी के आस-पास पेशवाओं के आवास भी बने हैं, जो लगभग खंडहर हो चुके हैं लेकिन उनकी बनावट आज भी आकर्षित करती है। गणेश बाग घूमते हुए, इसके पास के रामघाट और जानकी कुंड भी देखे जा सकते हैं।

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देखरेख के अभाव में बन रहा है खंडहर

पुरातत्व विभाग करोड़ों रुपए ऐतिहासिक इमारतों की देखरेख के लिए खर्च करती है, लेकिन यहां की इमारते खंडहर हो रही हैं। मुख्य गेट के पास ही सात मंजिला बनी बावड़ी भी देखने को मिलती है। यह पानी एकत्र करने का बेहतरीन तरीका और कला का एक शानदार नमूना है। इसकी कई मंजिल पानी में ही डूबी रहती हैं। लेकिन इसकी छत गिर गयी है।

इसके आस-पास की कई इमारते खंडहर में तब्दील हो गयी हैं

गणेश बाग में पास के ही बनाड़ी गाँव के राम नरेश यादव चौकीदार हैं। वो बताते हैं, "मैं एक वर्ष से यहां पर चौकीदार हूं, कभी कोई देखने नहीं आता है। अगर देखो न तो अन्ना जानवर भी घुस आते हैं। लड़के यहां के तालाब में नहाने आ जाते हैं अगर न मना करो तो बच्चे डूब सकते हैं।"

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