अब दस लाख किलोमीटर चलने के बाद परिवहन विभाग बसों को कहेगा अलविदा

अब दस लाख किलोमीटर चलने के बाद परिवहन विभाग बसों को कहेगा अलविदाकार्यशाला में खड़ी बसें।

हरिनरायण शुक्ला, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

गोंडा। परिवहन निगम के रोडवेज बेड़े में शामिल बसों की दूरी साढ़े आठ से बढ़ाकर दस लाख किलोमीटर कर दी गई जबकि इन बसों की देखरेख करने वाले कर्मचारियों की संख्या दिन-ब-दिन घटती जा रही है। परिवहन निगम बरेली हादसे से सबक नहीं ले पा रहा है, जिससे निगम की बसों की सुरक्षा भगवान-भरोसे दिख रही है।

पूर्व में रोडवेज के बस का रिटायरमेंट साढ़े आठ लाख किलोमीटर की दूरी तय करने पर कर दिया जाता था, जिसके बाद उसकी नीलामी कर नई खरीदी जाती थी, लेकिन अब नए वित्तीय साल में निगम ने बस की उम्र दस लाख किलोमीटर कर दी, जिससे संरक्षा खतरे में आ गई। खास पहलू कि बसों की वापसी के बाद जिस कार्यशाला में इनकी जांच-पड़ताल व ऑयलिंग, ग्रिसिंग होती है। वहां पर 2015 में मैकेनिक भर्ती छोड़ और कोई भर्ती नहीं हुई।, जिससे सीनियर फोरमैन, जूनियर फोरमैन, बॉडी मैकेनिक, बिजली मिस्त्री की कमी है।

संरक्षा के क्या हैं नियम

नियमतः रोडवेज की बस वापसी पर कार्यशाला में जाती है, जहां पर सीनियर फोरमैन की देखरेख में बसों की जांच-पड़ताल की जाती है। इनमें बस के टायर, तेल, आयल, ब्रेक शू, स्टेरिंयग, बैट्री का परीक्षण कर ओके की रिपोर्ट दी जाती है, जिससे चालक बस को ऑनरोड कर सके लेकिन यह कार्य बहुत ही कम किया जाता है, कारण स्टाफ और बसें ज्यादा। अगर बसें समय से न निकली तो चालक की दिहाड़ी मर जाती है, नतीजा चालक बगैर जान की परवाह के बस को दौड़ा देता है। इससे संरक्षा के नियम टूट रहे हैं।

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फर्स्ट एड बाक्स व अग्निशमन यंत्र नहीं

रोडवेज की 40 बसों में अग्निशमन यंत्री व फर्स्ट एड बाक्स नहीं है। कारण ये सामान क्षेत्रीय कार्यशाला से यहां नहीं आया है। इन सुरक्षा के सामान की आपूर्ति निगम कराने में फेल दिख रहा है।

देवीपाटन मंडल के क्षेत्रीय प्रबंधक जुनेद अहमद ने बताया कि किलोमीटर का मामला बोर्ड तय करता है। योगा में जो बसें जा रही हैं उनमें फर्स्ट एड बाक्स लगा दिया है, शेष में शीघ्र ये सामान मुहैया कराया जाएगा।

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