फ्री में खाने के लिए ढाबों पर खड़ी कर देते हैं रोडवेज बसें, यात्री परेशान 

फ्री में खाने के लिए ढाबों पर खड़ी कर देते हैं रोडवेज बसें, यात्री परेशान घंटो तक खड़ी रहती है रोडवेज बस  

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। चालक और परिचालक के फ्री में खाना खाने का खामियाजा अक्सर यात्रियों को भुगतना पड़ता है। रात के समय होटल-ढाबों पर एक से डेढ़ घंटे तक रोडवेज बसें खड़ी रहती हैं। ऐसे में अनहोनी की भी संभावना बढ़ जाती है। अफसर इस पर अंजान बने हुए हैं।

‘‘कानपुर से आते समय ढाबे में खाना खाने को लेकर रात के समय रोडवेज बसें रोक देते हैं। उनकी सेटिंग होती है। यात्रियों से लुटाई की जाती है। केवल चाय 10 और 15 रूपए में दी जाती है। ड्राइवर और कंडक्टर ठाठ से फ्री में खाते हैं।’’ जिला मुख्यालय कन्नौज से 16 किमी दूर तिर्वा के शास्त्रीनगर मोहल्ला निवासी 45 वर्षीय प्रदीप सैनी आगे बताते हैं कि ‘‘एक बार तो मैं शाम साढ़े सात बजे बस में झकरकटी कानपुर से बैठा और 11 बजे घर लगा। अरौल में डेढ घंटे गाड़ी खड़ी रही। होटल पर बस खड़ी करने से यात्री लेट-लपेट होते हैं।’’

यह दर्द कोई प्रदीप सैनी का ही नहीं है। प्रतिदिन लाखों यात्री रोडवेज बसों से सूबे में यात्रा करते हैं। इसका खामियाजा रात में उनको भुगतना भी पड़ता है।

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तिर्वागंज निवासी 38 वर्षीय भाष्कर त्रिपाठी बताते हैं, ‘‘रोडवेज बसों के चालक और परिचालक के होटल और ढाबे पहले से तय होते हैं। यहां उनको निषुल्क भोजन भी मिलता है। रोडवेज की मिलीभगत से यात्री परेशान होते हैं।’’भाष्कर आगे बताते हैं, ‘‘अंजान लोग परेशान होते हैं। आमतौर पर मैं पूछकर ही बैठता हूं कि रास्ते में खड़ी तो नहीं करोगे नहीं तो मैं किसी और बस से जाऊं।’’

‘‘होटल-ढाबों पर बसें खड़ी होना अवैध है। अनुबंध सिर्फ गुरसहायगंज में एक होटल का है। इसे बंद कराएंगे।’’
राजेश कुमार,एआरएम- उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग,कन्नौज

15 सितम्बर को रात 11 बजे के करीब कानपुर से चली यूपी 87 एटी 1791 बस नंबर सरायमीरा कन्नौज के अंधामोड़ पर एक होटल पर खड़ी हो गई। यहां पर कुछ यात्रियों ने मरीज के होने की बात कही। साथ ही कहा, कन्नौज बस स्टाप पर उतार दो फिर खाना खा लेना। लेकिन परिचालक और चालक ने एक न सुनी। चालक बोला मैं खाना ही खाकर जाऊंगा। उसने ऐसे ही किया। बस में बैठे कुछ पुलिसकर्मी भी बाद में खाने लगे। इससे यात्रियों को खासी परेशानी हुई।

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‘‘इस विषय में रोडवेज वाले बता सकते हैं, हम नहीं बता सकते अनुबंध है कि नहीं।’’
केशव चंद्र गोस्वामी,एएसपी,कन्नौज

कुछ जरूरी तथ्य

  • रात में होटल पर बसें खड़ी करने से यात्रियों को घर पहुंचने में देरी होती।
  • गाँव के लोगों को घर पहुंचने के लिए साधन नहीं मिलते।
  • रास्ते में बस खड़ी होने से अराजकतत्व और लुटेरे भी बैठने का खतरा होता।
  • बिना सुरक्षा के रात में बस लुटने का भी खतरा होटल के आस-पास रहता।

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