औरैया में शौचालय निर्माण में धांधली, प्रधान-सेक्रेटरी पर गिरी गाज 

Ishtyak KhanIshtyak Khan   1 Nov 2017 5:12 PM GMT

औरैया में शौचालय निर्माण          में धांधली, प्रधान-सेक्रेटरी पर गिरी गाज 12 हज़ार की जगह ठेकेदार से 10 हज़ार में कराया जा रहा निर्माण 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

औरैया। जिले को दिसंबर 2018 तक ओडीएफ घोषित करने के लिए सरकार से लेकर विभाग पूरा जोर लगा रहा है, लेकिन प्रधान और सेक्रेटरी अपनी जेब भरने के लिए इज्जत घर तो बनवा रहें, लेकिन बहुत ही घटिया किस्म के। 12 हजार की जगह ठेकेदार को 10 हजार रुपए देकर इज्जत घर का निर्माण करवा रहे हैं।

जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर बसे गाँव दशहरा में शौचालय का निर्माण कार्य चल रहा है। ग्राम प्रधान ऊषा देवी और ग्राम पंचायत अधिकारी राकेश भूषण मिश्रा ने लाभार्थियों को स्वयं इज्जत घर का पैसा न देकर ठेकेदार द्वारा निमार्ण कराने का ठेका दिया है। प्रत्येक लाभार्थी को 12 हजार रुपए सीधे खाते में दिये जाने का आदेश है इसके बावजूद ग्राम पंचायत निधि के खातों में पैसा भेजा जा रहा है। ठेकेदार को 12 हजार रुपए की जगह 10 हजार रुपए निर्माण कार्य के लिए दिये गये हैं। दो हजार सीधा कमीशन प्रधान और सेक्रेटरी ले रहे हैं। एक शौचालय बनवाने में 12 हजार रुपए की धनराशि भी कम है, लेकिन प्रधान और सेक्रेटरी उसमें से भी दो हजार रुपए अपने जेब में ले रहे हैं।

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आखिर ठेकेदार 10 हजार रुपए में कैसे शौचालय का निर्माण कर रहा है। इसकी पड़ताल जब जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय द्वारा की गई तो गाँव के लोगों ने बताया कि तीन नंबर की ईंट का प्रयोग कर बालू से प्लास्टर किया जा रहा है। इससे शौचालय बहुत ही घटिया किस्म का पाया गया। दो हजार एक शौचालय पर कमीशन लेने के कारण प्रधान और सेक्रेटरी दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर रिकवरी का आदेश दिया गया है।

मानकों को दरकिनार कर की जा रही कमीशन खोरी

जिला पंचायत राज अधिकारी केके अवस्थी ने बताया, “इज्जत घर बनवाने में मानकों को दर किनार किया गया है इसके अलावा कमीशनखोरी की जा रही है, जिससे शौचालय बहुत ही घटिया किस्म के हैं नोटिस जारी कर रिकवरी का आदेश जारी कर दिया गया है।”

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पर्यवेक्षक से भी मांगा गया जवाब

मुख्य विकास अधिकारी सत्येन्द्र नाथ चौधरी ने बताया, “शौचालयों का निर्माण घटिया किस्म पाया गया, इसके अलावा ग्राम पंचायत दशहरा में बन रहे इज्जत घर के पर्यवेक्षक एडीओ पंचायत अछल्दा को बनाया गया है। जिनकी देखरेख में शौचालय बन रहे है। इसके बावजूद अनियमितता पाई जानी सबसे बडी विकास खंड स्तर से चूक है। पर्यवेक्षक को नोटिस दिया गया कि आखिर शौचालयों का घटिया निर्माण क्यों कराया जा रहा है।”

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