अनाज भंडारण से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार

Neetu SinghNeetu Singh   16 April 2017 8:26 PM GMT

अनाज भंडारण से ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगारमहिला समाख्या की मदद से ग्रामीण महिलाओं ने बदली अपनी किस्मत।

नीतू सिंह (स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क)

मुगरबादशाहपुर (जौनपुर)। ग्रामीण महिलाएं गाँव में रहकर अब रोजगार के तरीके खुद ढूंढ निकाल रही हैं। समूह में मिलकर ये महिलाएं सस्ता अनाज खरीदकर भण्डारण करती हैं। अच्छा भाव मिलने के साथ ही इस अनाज को बेचकर मुनाफा भी कमा रही हैं।

जौनपुर जिला मुख्यालय से 60 किमी. दूर मुगरबादशाहपुर ब्लॉक के कैथापुर और फत्तूपुर कला गाँव की आठ-आठ महिलाओं के समूह ने चार साल पहले अनाज भण्डारण का काम शुरू किया था। ये महिलाएं समूह में बचत के अपने जमा पैसे निकालकर धान और गेहूं की फसल में 15-20 कुंतल अनाज का भण्डारण कर लेती हैं। जब इन्हें अच्छा भाव मिलता है तो इसे बेच देती हैं। जो मुनाफे का पैसा होता है उसे आपस में बांटकर अपने बच्चों की फीस से लेकर घरेलू खर्चें इसी से चलाती हैं।

कैथापुर गाँव में रहने वाली दुर्गावती बताती हैं, "हमारे पास खेत नहीं हैं। हम दूसरों के खेत में मजदूरी करते हैं। पहले हमें जब पैसों की जरूरत पड़ती थी तो हमें महाजन या जमींदार से कर्जा लेना पड़ता था। उनकी चार बातें सुननी पड़ती थी और ब्याज भी देना पड़ता था। अनाज भंडारण जब से करने लगे तब से हमें अपने हाथ में मजबूती लगती है। अगर बीच में अनाज खत्म हो जाए तो भी चिंता नही रहती है।"

फत्तूपुर कला की रहने वाली चमेला देवी (65 वर्ष) बताती हैं, "पूरे साल खेतों में मेहनत मजदूरी करते हैं। खुद के खेत हैं नहीं, अन्न भण्डारण में जो पैसा लगाते हैं उस मूलधन को निकालकर बचत का पैसे से एक महिला को तीन-चार हजार का मुनाफा मिल जाता है, जिससे बच्चों की कापी-किताबें और उनका एडमिशन हो जाता है।"महिला समाख्या की जिला कार्यक्रम समन्यक रजनी सिंह आगे बताती हैं, "ये महिलाएं दलित परिवार की हैं, जब इनके पास मजबूती नहीं थी तो इन्हें दूसरों से पैसा उधार लेना पड़ता था तब कहीं ये अपने बच्चों की फीस और बीमारी में इलाज करा पाती थी। अनाज होने से इन्हें सशक्त होने का अहसास होता है और अब इन्हें किसी से कर्जा नही लेना पड़ता है।"

एक छोटे से प्रयास ने बदली किस्मत

महिला समाख्या द्वारा वर्ष 2013 में ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया गया था। समूह में चर्चा के दौरान जब ये निकल कर आया कि महिलाएं कुछ करना चाहती हैं। महिलाओं के पास बचत के पैसे के अलावा कुछ नहीं था, जिससे वो रोजगार कर सकें। महिला समाख्या द्वारा इनकी सहूलियत को देखकर अन्न भण्डारण का कार्यक्रम शुरू किया गया। जौनपुर जिले में महिला समाख्या की जिला कार्यक्रम समन्यक रजनी सिंह बताती हैं, "महिलाओं द्वारा मिलकर रोजगार का शुरू किया गया एक छोटा सा प्रयास है, कई महिलाएं मिलकर अपने-अपने गाँव में अन्न भण्डारण का काम कर रही हैं।"

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