श्रावस्ती में बढ़ रही है गिद्धों की संख्या

श्रावस्ती में बढ़ रही है गिद्धों की संख्यासाभार: इंटरनेट 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

श्रावस्ती। जिले के तराई क्षेत्रों में आजकल फिर से गिद्ध दिखाई देने लगे हैं, जबकि कुछ वर्ष पहले तक गिद्ध न के बराबर दिखते थे। श्रावस्ती जिले के लक्ष्मणनगर, गिलौला और सिरसिया के जगलों में गिद्धों की संख्या बढ़ाने से वन विभाग की अहम भूमिका है। भिनगा के आसपास गिद्धों की अच्छी खासी तादाद देखने को मिल रही है।

उत्तर प्रदेश वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 में सिर्फ 1350 गिद्ध ही बचे थे। लगभग 20 वर्ष पूर्व सिरसिया में जंगल से सटे इलाके के साथ जमुनहा व गिलौला क्षेत्र में हर जगह गिद्धों के बड़े झुण्ड दिख जाते थे। हर झुण्ड में 40 से 50 गिद्धों की मौजूदगी आम बात होती थी। बॉम्बे नेचुरल सोसाइटी के शोध के मुताबिक, कभी देश में गिद्धों की संख्या चार करोड़ से ज्यादा होती थी, लेकिन पशुओं को इलाज के दौरान दी जाने वाली डाइक्लोफेन दवा गिद्धों के मौत का कारण बन रही थी, अब इनकी तादाद एक लाख से भी कम बची है।

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वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के परियोजना अधिकारी दबीर हसन कहते हैं, “वर्ष 2006 से सभी जिलों में डाइक्लोफेन दवा के उपयोग व उत्पादन पर पूरी तरह से रोक लग गई थी, इसका असर सब जगह देखने को मिला। वैसे भी गिद्ध के लिए प्रदूषण रहित जल आवश्यक है, जिले की राप्ती नदी गिद्धों के लिए अनुकूल है।”

सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के आसपास गिद्धों की बढ़ रही संख्या एक अच्छा संकेत है, इसके बाद हमें गिद्धों को सही वातावरण देने की जरूरत है। हमको गिद्धों को घोंसला बनाने के लिए सुरक्षित स्थान देना जरूरी है।
कर्ण सिंह गौतम, जिला वन अधिकारी, बलरामपुर

डाइक्लोफेन दवा बन रही थी मौत का कारण

गिद्धों के कम होने की मुख्य वजह डाइक्लोफेन दवा है। पशुओं में बुखार, सूजन और दर्द कम करने के लिए डाइक्लोफेन दवा दी जाती है। मरे जानवर को गिद्ध जब खाते हैं तो दवा का असर गिद्धों के शरीर पर होता है। जिससे गिद्धों के किडनी में गाउट नामक रोग हो जाता है और गिद्धों की मृत्यु हो जाती है। इस रिसर्च के बाद 11 मई 2006 को सरकार ने इस दवा को बैन कर दिया। जिसमें इसका उत्पादन और बिक्री कोई नहीं कर सकता।

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यूपी में गिद्धों की आठ प्रजातियां

केंद्र व राज्य सरकार की गिद्ध विकास परियोजना के तहत वन विभाग ने पूर्वी सोहेलवा रेंज के गब्बापुर गाँव में गिद्धों का भोजनालय बनाने की योजना बनाई गई थी। गिद्धों की आठ प्रजातियां उत्तर प्रदेश में पाई जाती हैं, जिसमें से तराई के इस इलाके में कुल तीन प्रजातियों के गिद्ध बहुतायत देखे जाते हैं। यहां सफेद मटमैले रंग के 67 से 75 सेंटीमीटर लंबे कोल गिद्ध, गहरे भूरे रंग के 75 से 80 सेंटीमीटर लंबे भारतीय सफेद गिद्ध तथा पीलापन लिए भूरे रंग के 115 से 125 सेंटीमीटर लंबे हिमालयन गिद्ध पाए जाते हैं। पहाड़ से सटा मैदानी भू-भाग होने के कारण यहां का वातावरण इन प्रजातियों के गिद्धों के लिए उपयुक्त है।

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