रकम न मिलने से अधर में शौचालय निर्माण 

रकम न मिलने से अधर में शौचालय निर्माण शौचालय के लिए खोदे गए गड्ढों में खेल रहे बच्चे, जख्मी होने का है खतरा।

मोहम्मद आमिल, स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

एटा। जिले भर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय बनवाए जाने हैं, लेकिन कर्मचारियों की लेटलतीफी के कारण अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों का निर्माण अधर में लटका हुआ है। धन के अभाव में कई गाँवों में तो इसकी शुरुआत भी नहीं हो सकी है।

जनपद के सात ब्लाकों की 576 ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालयों का निर्माण होना है। निर्माण कार्य के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहन राशि के रूप में बारह हजार रुपए योजना के तहत दो किस्तों में उपलब्ध कराए जाएंगे, लेकिन ग्रामीणों को शौचालय के लिए गड्ढा खुदवाने के बाद भी पहली क़िस्त प्राप्त नहीं हुई है, जिससे जनपद के अधिकतर गाँवों में शौचालयों का निर्माण अधर में लटका हुआ है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लॉक कर्मचारियों की लापरवाही से शौचालय नहीं बन पा रहा है। मारहरा विकास खण्ड के गांव नगला कोठी निवासी बखेड़ी सिंह (45 वर्ष) ने कर्मचारियों पर आरोप लगाते हुए कहा, “हमने शौचालय के लिए गड्ढा खुदवाकर पक्का करा लिया। एक महीने से अधिक समय हो गया, लेकिन अभी तक कोई रकम हमें नहीं मिली है। हमारे पास इतना रुपया नहीं है कि हम शौचालय का बाकी निर्माण करा सके।

इसी गाँव के राकेश कुमार (32 वर्ष) कहते हैं, “प्रधान से लेकर सचिव तक से कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। शौचालय के लिए पैसा नहीं मिल रहा, जिससे निर्माण कराया जा सके। शौचालय के लिए जो गड्ढा खुदे हुए हैं, उनमें बच्चे गिरकर चोटिल हो जाते हैं।”

निधौलीकलां विकासखण्ड के गाँव समोखर निवासी मुलायम सिंह (43 वर्ष) का कहना है, “गाँव में सभी ने शौचालयों के लिए गड्ढा खुदवा लिए, लेकिन अभी तक कोई पैसा नहीं मिला, अभी भी घर की महिलाएं शौच के लिए खेत पर जातीं हैं। पैसा मिले तो शौचालय बनवाए।”

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जब इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारी धनंजय जायसवाल से बात की तो उन्होंने बताया, “शौचालय निर्माणकार्य की रिपोर्ट तैयार कर पहले ग्राम पंचायत उसके बाद ब्लॉक फिर पंचायत राज विभाग में आती है, जब हमें रिपोर्ट मिल जाती है तो तीन दिन में यहां से रकम दे दी जाती है, इस प्रक्रिया में 12 से 15 दिन का समय लग जाता है।”

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