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इस गाँव की महिलाएं प्राकृतिक तरीके से कर रहीं गंभीर रोगों का इलाज

Neetu SinghNeetu Singh   23 May 2017 12:58 PM GMT

इस गाँव की महिलाएं प्राकृतिक तरीके से कर रहीं गंभीर रोगों का इलाजजिलेवा के अलावा इस गाँव की कई महिलाएं जड़ी-बूटी की ज्ञानी हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

गोरखपुर। प्राचीन समय से जड़ी बूटियों का इलाज़ हमारे देश में होता रहा है। इसके इलाज़ से गंभीर से गंभीर रोग भी ठीक हो जाता है। कुछ ऐसी ही विलुप्त जड़ी बूटियों से इस गाँव की महिलाएं विभिन्न प्रकार की दवाएं बनाकर आस-पास के लोगों का इलाज कर रही हैं और इसके लिए लोगों को ज्यादा खर्च करने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

जिला मुख्यालय से लगभग 26 किलोमीटर दूर भटहट ब्लॉक के राजी करमौरा गाँव में महिलाओं द्वारा ‘नारी संजीवनी केंद्र’ की शुरुआत सात वर्ष पहले की गई थी। इस केंद्र से जुड़ी जिलेवा यादव (55 वर्ष) बताती हैं, “जंगल से जड़ी-बूटी लाकर घर में ही कूट-पीसकर तैयार करके आस-पास के बाजार में बेचने जाते हैं।

साल में एक बार लखनऊ महोत्सव में भी हमारी दवाओं की खूब पूछ होती है।” वो आगे बताती हैं, “इस केंद्र से सैकड़ों लोग ठीक हो चुके हैं, ये दवा अगर किसी को फायदा नहीं करतीं तो नुकसान भी नहीं करती हैं, महिलाएं अब अस्पताल कम जाती हैं हमारे केंद्र पर ज्यादा आती हैं।” जिलेवा के अलावा इस गाँव की कई महिलाएं जड़ी-बूटी की ज्ञानी हैं, कई जगह से प्रशिक्षण लेने के बाद आज ये लोग अपने क्षेत्र की अनुभवी वैध बन गई हैं।”

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“हमें अनियमित मासिक धर्म होता था और पेट में दर्द भी रहता था, अंग्रेजी दवा से हमें परेशानी होती है इसलिए डॉक्टर को दिखाया नहीं, जब हमारी अम्मा को इस केंद्र के बारे में पता चला तो हमने लगकर एक साल दवा खाई, ज्यादा पैसा भी नहीं लगा। अब हम पूरी तरह से ठीक भी हो गए।” ये कहना है इस गाँव में रहने वाली ऊषा देवी (30 वर्ष) का।

वो आगे बताती हैं, “अंग्रेजी दवा कुछ समय के लिए हमें राहत तो जरूर दे देती है, लेकिन ये गर्म बहुत करती है। जड़ी-बूटी की दवा तुरंत फायदा नहीं करती, लेकिन अगर लगकर खा ली जाए तो बीमारी जड़ से खत्म हो जाती है, इस तरह की बीमारियों के बारे में डॉक्टर को बताने में शर्म आती है यहां महिलाओं को बताना होता है इसलिए हम खुलकर बता पाते हैं।” महिला समाख्या द्वारा उत्तर प्रदेश के 14 ज़िलों में 59 नारी संजीवनी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 690 जड़ी-बूटी की जानकारी महिलाओं को हैं।

इन केंद्रों पर अब तक 13 हजार से ज्यादा मरीज आ चुके हैं, जिसमे 10 हजार से ज्यादा ठीक हो चुके हैं। इन केंद्रों पर गैस, मधुमेह, चर्मरोग, ल्यूकोरिया, गठिया, बवासीर, पीलिया, दस्त, पायरिया, खांसी, चोट-मोच, बुखार, अनियमित माहवारी जैसी तमाम बीमारियों की दवा मिलती है।

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