“ मैं विधवा हूं, बच्चे कहां से लाऊं ” 

Ajay MishraAjay Mishra   16 Jun 2017 6:55 PM GMT

“ मैं विधवा हूं, बच्चे कहां से लाऊं ” धरने पर बैठी महिलायें 

कन्नौज। परिषदीय स्कूलों में काम करने वाली महिला रसोइयों को सिर्फ एक हजार रुपए महीना मिलता है। इससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मिड डे-मील बनाने वाली रसोइयों को काफी दिक्कतें हैं। अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर जिले भर की रसोइयों ने कलक्ट्रेट में धरना दिया।

शासनादेश में कुछ नियमों को बदलने की मांग करते हुए रसोइयों ने कहा, "एक हजार रुपए महीने में घर का खर्च भी नहीं चलता है। बच्चे पढ़कर आगे की कक्षा में पहुंच गए हैं और उनको नौकरी से निकाल दिया गया है।"

जिला मुख्यालय कन्नौज से करीब 22 किमी दूर बसे गुरसहायगंज क्षेत्र के अलमापुर निवासी 30 साल की राधा देवी अपना दर्द बयां करती हैं, "छह-सात साल से स्कूल में खाना बना रही हूं। बच्चों का क्लास चेंज हो गया है। अब कह दिया गया है कि तुम काम नहीं करोगी। मैं विधवा हूं, बच्चे कहां से लाऊं।"

वहीं कन्नौज से करीब 33 किमी दूर बसे हसेरन ब्लाक क्षेत्र के मोहद्दीनगर निवासी ऊषा (35) बताती हैं, " सालों से स्कूल में खाना बना रही हूं। हमारे बच्चे पांचवीं पास होकर जूनियर में चले गए हैं। अब हमें काम करने से मना कर दिया गया है। हम चाहते हैं कि हमें काम पर लगाया जाए और हमारा वेतन बढाया जाए।"

तिर्वा तहसील मुख्यालय से करीब छह किमी दूर बसे उहिदापुर गांव निवासी राममूर्ति (38) कहती हैं, "एक हजार रुपए में हमारा गुजारा नहीं होता है, इसलिए धरना-प्रदर्शन करने के लिए कलेक्ट्रेट में इकट्ठे हुए हैं।"

मौदामऊ विकास खंड हसेरन निवासी सरस्वती (18) ने बताया, अभी कुछ समय पहले ही काम पर लगे हैं। ग्यारह महीने खाना बनाता पड़ता है और तनख्वाह बस दस महीने की ही मिलती है।

इस संबंध में हमने बात की अखण्ड प्रताप सिंह, बीएसए, कन्नौज से जिनका कहना था कि रसोइयों के मानदेय बढाने के लिए डायरेक्टर से बात की थी। उन्होंने बताया कि शासन स्तर का मामला है। बात की जाएगी। शासनादेश में जिक्र है, जिसका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है वही रसोइया रह सकता है।

इसी मसले पर रवि राजपूत, जिला संयोजक, राष्ट्रीय मध्यान्ह भोजन रसोइया एकता संघ,कन्नौज ने कहा कि रसोइयों को स्कूल से निकाला जा रहा है। काम अधिक और वेतन कम मिलता है। एक हजार रुपए के स्थान पर दस हजार रुपए महीने दिलाया जाए, जिससे महिलाएं अपने परिवार का खर्च चला सकें।

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