नीलेश मिसरा की फिल्म KOOD का ऑफिशियल गाना Zindagi 1.0 रिलीज
Gaon Connection | Apr 29, 2026, 20:00 IST
लोकप्रिय गीतकार नीलेश मिसरा की फिल्म 'कूद' का पहला गाना 'ज़िंदगी 1.0' रिलीज हो गया है। नीलेश मिसरा ने खुद इस गाने को लिखा, कंपोज किया और गाया है। यह गाना उनकी खास कहानी कहने की शैली को दर्शाता है। फिल्म 'कूद' दो अजनबियों की कहानी है जो आत्महत्या के लिए मिलते हैं।
कूद फिल्म का ऑफिसियल गाना Zindagi 1.0 रिलीज
कूद फिल्म का ऑफिसियल गाना Zindagi 1.0 रिलीज
भारत के लोकप्रिय कहानीकार और गीतकार नीलेश मिसरा की फिल्म KOOD का गाना ZINDAGI 1.0 रिलीज हो गया है। यह गीत उनकी पहली मिनी फीचर फिल्म KOOD का पहला ट्रैक है, जिसे स्वयं नीलेश मिसरा ने निर्देशित किया है। इस गाने को नीलेश मिसरा ने अपने म्यूज़िक चैनल Slow Music By Neelesh Misra पर रिलीज किया है।
“ज़िंदगी 1.0” को नीलेश मिसरा ने खुद से लिखा, कम्पोज़ किया और अपनी आवाज़ में गया भी है। यह गीत उनकी खास कहानी कहने की शैली को दर्शाता है।
नीलेश मिसरा हिंदी सिनेमा में अपने यादगार गीतों के लिए जाने जाते हैं। उनके प्रमुख गीतों में Bodyguard का “I Love You”, Krishna Cottage का “Suna Suna”, Bajrangi Bhaijaan का “Kuch Toh Bata Zindagi”, “Abhi Kuch Dino Se”, “Maine Dil Se Kaha” और Pagglait का “Thode Se Kam Ajnabee” शामिल हैं। अपने लेखन के जरिए नीलेश मिसरा ने हमेशा श्रोताओं के दिलों को छूने का काम किया है। “ज़िंदगी 1.0” भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एक भावनात्मक और दिल से जुड़ा हुआ अनुभव प्रस्तुत करता है।
यह फिल्म दो अजनबियों की कहानी बताती है जो एक ही दिन, एक ही समय पर ख़ुदकुशी करने के लिए एक पुल पर मिलते हैं। फिल्म में दो ओरिजिनल गाने भी हैं जो कहानी की गहराई को बढ़ाते हैं। नीलेश मिसरा ने 'कूद' के साथ 'कम्यूट फिल्म' नाम की एक नई विधा भी पेश की है। ये ऐसी फिल्में हैं जिन्हें रोज़ाना आने-जाने के दौरान, जैसे मेट्रो, बस या टैक्सी में पूरा देखा जा सकता है। इनकी अवधि भारतीय लोगों के औसतन 50 मिनट के आने-जाने के समय को ध्यान में रखकर तय की गई है। 'कूद' इस नई सोच का एक शुरुआती उदाहरण है।
नीलेश मिसरा का फिल्मी सफ़र 2003 में फिल्म 'जिस्म' के गानों 'जादू है नशा है' और 'चलो तुमको लेकर चलें' से शुरू हुआ। इन गानों में उन्होंने सीधेपन की बजाय माहौल और इशारों से संवेदनशीलता दिखाई। 2005 में फिल्म 'रोग' के लिए उन्होंने 'मैंने दिल से कहा', 'खूबसूरत है वो इतना' और 'गुज़र न जाए' जैसे गानों से दिल को छू लेने वाली कहानियाँ कही, जिनमें बिछड़ने, यादों और दिल के टूटने जैसे गहरे एहसास थे।
2006 से 2011 के बीच, नीलेश मिसरा ने साबित किया कि पॉपुलर संगीत में भी भावनात्मक गहराई हो सकती है। फिल्म 'वो लम्हे' (2006) का गाना 'क्या मुझे प्यार है' प्यार को अधिकार की बजाय अनिश्चितता के रूप में दिखाने के लिए बहुत मशहूर हुआ। 2006 में ही उन्होंने 'गैंगस्टर' के गाने 'लम्हा लम्हा' और 'हॉलिडे' के गानों में भटकने, बेचैनी और तड़प के भावों को दिखाया। उन्होंने 'फाइट क्लब: मेंबर्स ओनली' (2006) के गाने 'बोलो ना तुम ज़रा' जैसे गानों से रोमांस और सोच को भी जोड़ा।
क्यों खास है यह गाना
नीलेश मिसरा के प्रमुख गाने
क्या है कूद फिल्म की कहानी
नीलेश मिसरा का फिल्मी करियर
2006 से 2011 के बीच, नीलेश मिसरा ने साबित किया कि पॉपुलर संगीत में भी भावनात्मक गहराई हो सकती है। फिल्म 'वो लम्हे' (2006) का गाना 'क्या मुझे प्यार है' प्यार को अधिकार की बजाय अनिश्चितता के रूप में दिखाने के लिए बहुत मशहूर हुआ। 2006 में ही उन्होंने 'गैंगस्टर' के गाने 'लम्हा लम्हा' और 'हॉलिडे' के गानों में भटकने, बेचैनी और तड़प के भावों को दिखाया। उन्होंने 'फाइट क्लब: मेंबर्स ओनली' (2006) के गाने 'बोलो ना तुम ज़रा' जैसे गानों से रोमांस और सोच को भी जोड़ा।
- गीतकार के तौर पर नीलेश मिसरा ने अलग-अलग तरह की फिल्मों में काम किया। 2009 में फिल्म 'सिकंदर' के लिए उन्होंने फैज़ अहमद फैज़ की नज़्म 'गुलों में रंग भरे' को एक नए अंदाज़ में पेश किया। उन्होंने 'वन्स अपॉन ए टाइम इन मुंबई' (2010) और 'अंजाना अंजानी' (2010) जैसी फिल्मों के लिए भी गाने लिखे।
- 2011 तक उनके गाने पूरे भारत में बहुत पसंद किए जाने लगे। 'दिल तो बच्चा है जी', 'रेडी' और 'बॉडीगार्ड' जैसी फिल्मों के गानों में उन्होंने आसानी से समझ आने वाले शब्दों के साथ सच्ची भावनाएँ पिरोईं।
- 2012 से 2015 तक, बड़ी कमर्शियल फिल्मों में भी नीलेश मिसरा के गानों में भावनात्मक जुड़ाव बना रहा। 'एजेंट विनोद' का 'दिल मेरा मुफ़्त का', 'शंघाई' का 'खुदाया' और 'एक था टाइगर' का 'बंजारा' जैसे गानों में बिछड़ने और बेघर होने के एहसास थे। 2012 में आई फिल्म 'बर्फी!' का गाना 'क्यों' मुख्यधारा के संगीत में एक दुर्लभ दार्शनिक सोच का उदाहरण था।
- 2013 में फिल्म 'चश्मे बद्दूर' के गानों 'डिचक्याऊं ढूम ढूम' और 'इश्क मोहल्ला' में उनके लेखन का अंदाज़ बदला। इसके बाद उन्होंने 'शूटआउट एट वडाला' (2013), 'आई, मी और मैं' (2013) और 'बजरंगी भाईजान' (2015) जैसी फिल्मों के लिए दमदार और किरदारों पर आधारित लेखन किया। 'बजरंगी भाईजान' का गाना 'ज़िंदगी (रिप्राइज़)' एक बड़े भावनात्मक सफर में ठहराव का एहसास देता था, जो उनकी बड़ी कहानियों में भी शांति लाने की क्षमता दिखाता है।
- जैसे-जैसे हिंदी सिनेमा बदला, नीलेश मिसरा के गानों ने भी अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी। फिल्म 'जग्गा जासूस' (2017) के उनके गाने चंचल, पुरानी यादों वाले और शब्दों से भरपूर थे। 2021 में फिल्म 'पगलैट' के गानों 'फिरे फक़ीरा' और 'थोड़े कम अजनबी' से उन्होंने फिर से अंदरूनी भावनाओं को छुआ।
- उनके हालिया काम में 'मेट्रो... इन दिनों' (2025) के गाने शामिल हैं। ये गाने प्यार, दुख, दूरी, स्वीकार्यता और सच्ची भावनाओं को दर्शाते हैं, जिनमें जल्दबाजी की बजाय ठहराव है।