झारखंड में धान बुवाई पर संकट: कम बारिश से किसान चिंतित, खरीफ मौसम पर मंडराया ख़तरा
झारखंड में धान बुवाई पर संकट: कम बारिश से किसान चिंतित, खरीफ मौसम पर मंडराया ख़तरा

By Preeti Nahar

झारखंड के किसान खरीफ मौसम में धान की बुवाई को लेकर काफी चिंतित हैं, क्योंकि जून में बारिश में 60% की कमी आई है। कई जिलों में नर्सरी के सूखने का खतरा बढ़ गया है। मानसून की धीमी गति और एल नीनो के प्रभाव के चलते, सरकार वैकल्पिक फसलों का समर्थन कर रही है और किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग कर रही है।

झारखंड के किसान खरीफ मौसम में धान की बुवाई को लेकर काफी चिंतित हैं, क्योंकि जून में बारिश में 60% की कमी आई है। कई जिलों में नर्सरी के सूखने का खतरा बढ़ गया है। मानसून की धीमी गति और एल नीनो के प्रभाव के चलते, सरकार वैकल्पिक फसलों का समर्थन कर रही है और किसानों के लिए राहत पैकेज की मांग कर रही है।

कम पानी-कम रसायन और ज्यादा मुनाफे का दावा करती ये खेती, जानिए विश्व पर्यावरण दिवस पर क्यों हो रही है चर्चा?
कम पानी-कम रसायन और ज्यादा मुनाफे का दावा करती ये खेती, जानिए विश्व पर्यावरण दिवस पर क्यों हो रही है चर्चा?

By Gaon Connection

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जब पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, तब खेती को भी इस चर्चा का हिस्सा बनाना जरूरी है। एकीकृत कृषि प्रणाली जैसे मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, बल्कि जल, मिट्टी और जैव विविधता के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। जानिए इस तरह की खेती से कैसे आप पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं साथ ही सुरक्षित खेती को कमाई का जरिया भी बना सकते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जब पूरी दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, तब खेती को भी इस चर्चा का हिस्सा बनाना जरूरी है। एकीकृत कृषि प्रणाली जैसे मॉडल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, बल्कि जल, मिट्टी और जैव विविधता के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। जानिए इस तरह की खेती से कैसे आप पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं साथ ही सुरक्षित खेती को कमाई का जरिया भी बना सकते हैं।

'क्या मैं खाना हूं या दोस्त?', पेटा इंडिया ने लॉन्च की इंसानों से बात करने वाली AI Goat ‘आवाज़’, लोगों से कर रही यह अपील
'क्या मैं खाना हूं या दोस्त?', पेटा इंडिया ने लॉन्च की इंसानों से बात करने वाली AI Goat ‘आवाज़’, लोगों से कर रही यह अपील

By Gaon Connection

पेटा इंडिया ने शाकाहार और वीगन जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए 'आवाज़' नाम की एक एआई रोबोट बकरी लॉन्च की है। यह रोबोट लोगों से बातचीत कर उन्हें पशु हत्या के खिलाफ जागरूक करेगी। 'आवाज़' कॉलेज और शहरों में जाकर लोगों को पशु-मुक्त खाद्य विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

पेटा इंडिया ने शाकाहार और वीगन जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए 'आवाज़' नाम की एक एआई रोबोट बकरी लॉन्च की है। यह रोबोट लोगों से बातचीत कर उन्हें पशु हत्या के खिलाफ जागरूक करेगी। 'आवाज़' कॉलेज और शहरों में जाकर लोगों को पशु-मुक्त खाद्य विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

वर्मीकम्पोस्ट यूनिट शुरू करनी है? बिजनेस शुरू करने से पहले जान लें ये 5 जरूरी जगहें, यहीं से मिलेगी ट्रेनिंग और सब्सिडी
वर्मीकम्पोस्ट यूनिट शुरू करनी है? बिजनेस शुरू करने से पहले जान लें ये 5 जरूरी जगहें, यहीं से मिलेगी ट्रेनिंग और सब्सिडी

By Gaon Connection

गांवों में केंचुआ खाद का कारोबार फलफूल रहा है। कम लागत और जैविक खेती की बढ़ती मांग से किसान और युवा इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। प्रशिक्षण, सब्सिडी और लोन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विभाग और बैंकों से संपर्क किया जा सकता है।

गांवों में केंचुआ खाद का कारोबार फलफूल रहा है। कम लागत और जैविक खेती की बढ़ती मांग से किसान और युवा इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। प्रशिक्षण, सब्सिडी और लोन के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, राज्य कृषि विभाग और बैंकों से संपर्क किया जा सकता है।

अब ग्रीनहाउस और खेतों में भी उगेगा ₹40,000 किलो वाला गुच्छी मशरूम! SKUAST-K के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा कमाल
अब ग्रीनहाउस और खेतों में भी उगेगा ₹40,000 किलो वाला गुच्छी मशरूम! SKUAST-K के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा कमाल

By Gaon Connection

कश्मीर के वैज्ञानिकों ने गुच्छी मशरूम की अनोखी खेती की विधि खोजी है। अब यह मशरूम ग्रीनहाउस और विभिन्न खेतों में आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी बाजार मूल्य अत्यधिक है और इसके औषधीय गुण अनेक बीमारियों के इलाज में मददगार साबित होंगे। इस उपलब्धि के कारण स्थानीय किसानों के लिए नए आय के मार्ग खुलेंगे।

कश्मीर के वैज्ञानिकों ने गुच्छी मशरूम की अनोखी खेती की विधि खोजी है। अब यह मशरूम ग्रीनहाउस और विभिन्न खेतों में आसानी से उगाई जा सकती है। इसकी बाजार मूल्य अत्यधिक है और इसके औषधीय गुण अनेक बीमारियों के इलाज में मददगार साबित होंगे। इस उपलब्धि के कारण स्थानीय किसानों के लिए नए आय के मार्ग खुलेंगे।

Success Story: पोषण वाटिका से सरिता यादव ने रची आत्मनिर्भरता की नई कहानी
Success Story: पोषण वाटिका से सरिता यादव ने रची आत्मनिर्भरता की नई कहानी

By

उत्तर प्रदेश के सीतापुर की सरिता यादव एक सशक्त महिला की मिसाल बनकर उभरी हैं। उनके कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने और पोषण वाटिका में सब्जियों की खेती करने की प्रेरणादायक कहानी ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है। सरिता ने आज मशरूम, मिलेट्स और सहजन जैसे फसलों की खेती के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि की है।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर की सरिता यादव एक सशक्त महिला की मिसाल बनकर उभरी हैं। उनके कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने और पोषण वाटिका में सब्जियों की खेती करने की प्रेरणादायक कहानी ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है। सरिता ने आज मशरूम, मिलेट्स और सहजन जैसे फसलों की खेती के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि की है।

90% तक अनुदान के साथ मशरूम की खेती: जानिए क्या है बिहार सरकार की नई योजना?
90% तक अनुदान के साथ मशरूम की खेती: जानिए क्या है बिहार सरकार की नई योजना?

By Gaon Connection

बिहार सरकार ने वर्ष 2025–26 के लिए किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मशरूम किट और मशरूम झोपड़ी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पैडी, ऑयेस्टर, बटन और बकेट मशरूम किट पर 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।

बिहार सरकार ने वर्ष 2025–26 के लिए किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मशरूम किट और मशरूम झोपड़ी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पैडी, ऑयेस्टर, बटन और बकेट मशरूम किट पर 90 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।

नागालैंड के किसानों को भा रही मशरूम की खेती
नागालैंड के किसानों को भा रही मशरूम की खेती

By Divendra Singh

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नागालैंड सेंटर के वैज्ञानिकों के प्रयासों से नागालैंड मशरूम उत्पादक राज्यों में शामिल हो रहा है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नागालैंड सेंटर के वैज्ञानिकों के प्रयासों से नागालैंड मशरूम उत्पादक राज्यों में शामिल हो रहा है।

एक गलती… और जान पर बन सकती है: खाने योग्य और ज़हरीले मशरूम की सही पहचान क्यों ज़रूरी है?
एक गलती… और जान पर बन सकती है: खाने योग्य और ज़हरीले मशरूम की सही पहचान क्यों ज़रूरी है?

By Dr SK Singh

मशरूम पोषण से भरपूर होते हैं, लेकिन गलत पहचान जानलेवा साबित हो सकती है। प्रकृति में पाए जाने वाले कई मशरूम अत्यंत विषैले होते हैं, जिनमें से कुछ देखने में बिल्कुल खाने योग्य जैसे लगते हैं। ज़हरीले और खाने योग्य मशरूम में अंतर कैसे करें, किन मिथकों से बचें, वैज्ञानिक पहचान के तरीके क्या हैं और गलती होने पर क्या करना चाहिए। यह जानकारी किसानों, जंगल से मशरूम चुनने वालों और आम लोगों के लिए बेहद ज़रूरी है।

मशरूम पोषण से भरपूर होते हैं, लेकिन गलत पहचान जानलेवा साबित हो सकती है। प्रकृति में पाए जाने वाले कई मशरूम अत्यंत विषैले होते हैं, जिनमें से कुछ देखने में बिल्कुल खाने योग्य जैसे लगते हैं। ज़हरीले और खाने योग्य मशरूम में अंतर कैसे करें, किन मिथकों से बचें, वैज्ञानिक पहचान के तरीके क्या हैं और गलती होने पर क्या करना चाहिए। यह जानकारी किसानों, जंगल से मशरूम चुनने वालों और आम लोगों के लिए बेहद ज़रूरी है।

मशरूम की खेती कर गाँव के 100 लोगों को दिया रोजगार
मशरूम की खेती कर गाँव के 100 लोगों को दिया रोजगार

By Anil Chaudhary