बुंदेलखंड के इस ज़िले में बैलगाड़ियों पर लादकर कई किमी. दूर से लाना पड़ता है पानी

बुंदेलखंड के इस ज़िले में बैलगाड़ियों पर लादकर कई किमी. दूर से लाना पड़ता है पानीकई घंटों की मशक्कत के बादद मिलता है पानी

बुंदेलखंड में पानी की समस्या पैदा होना कोई नई बात नहीं है, पिछले कई वर्षों से गर्मी आते ही पानी का संकट पैदा होता है। इस साल भी जल स्तर नीचे पहुंचने से विकराल परिस्थिति पैदा हो गई है।

ललितपुर जनपद से 52 किमी. बार ब्लॉक की सुनवाहा ग्राम पंचायत के वीर गाँव के हैण्डपम्प सूख चुके हैं, पानी के लिए ग्रामीण सुबह से लेकर शाम तक जूझते हैं। लगभग तीन हजार से अधिक आबादी पर 25 हैण्डपम्प लगे हैं, जो सूखने लगे हैं।

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इसी गाँव की सूकी (38 वर्ष) बताती हैं, "गाँव के तलैया, हैण्डपम्प, कुआँ सब सूख गए, दो किलो मीटर दूर नदी हैं, वहीं से पानी ला रहे हैं। सुबह से सब काम छोड़कर सुबह पांच बजे पानी का ड्रम रखकर बैलगाड़ी लेकर नदी के किनारे जाते हैं और नदी से थोड़ा-थोड़ा करके पानी भरते हैं, फिर उसे घर लाते हैं तीन चार घंटे इसी मशक्कत में निकल जाते हैं।"

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इसी गांव के किशनलाल (35 वर्ष) बताती हैं, "फरवरी माह से बहुत दिक्कत हैं, पानी नदिया से सप्लाई कर रहे हैं। बाकी कहीं पानी नहीं हैं, गाँव वाले साईकिल मोटर साइकिल, बैलगाड़ियो पर टंकी जिसके पास जैसी व्यवस्था हैं, उसी से पानी लाते हैं। दिन भर एक ही चिंता लगी रहती हैं। पानी कब लाये, कब पशुओं को पिलाये, नहाएं, धोएं, बच्चो के खर्च को भी चाहिए, खुद के खर्च को भी चाहिए। गाँव से 15-20 बैलगाड़ियां पानी ढोती हैं।"

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"पिछले साल भी पानी की परेशानी थी, इस साल भी हैं पंचायत ने तीन नये बोर किये लेकिन किसी में पानी नहीं निकला। गाँव में 25 हैण्डपम्प लगे हैं, 6 हैण्डपम्प के करीब चल रहे हैं बाकी सूखे पड़े हैं।" यह कहना हैं ग्राम प्रधान छत्रपाल सिंह का। वो आगे बताते हैं, "पानी की समस्या दिनों दिन बढ़ रही हैं, गाँव वासियों के पास जो व्यवस्था हैं, उसी से नदी से पानी लाते हैं! बैलगाडियों पर टंकी रखकर पानी लाते हैं।"

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