यूपी: 14 महीने से मुलाकात बंद, कोरोना के चलते अब जेल में सामान भी नहीं दे सकेंगे परिजन

कोविड की दूसरी लहर को देखते हुए जेल प्रशासन ने कैदियों को दिए जाने वाले सामान पर रोक लगा दी है। जेल प्रशासन के निर्देश के मुताबिक ये फैसला कैदियों को कोरोना से बचाने के लिए लिया गया है। लेकिन परिजन परेशान हैं।

Ajay MishraAjay Mishra   21 May 2021 7:47 AM GMT

यूपी: 14 महीने से मुलाकात बंद, कोरोना के चलते अब जेल में सामान भी नहीं दे सकेंगे परिजन

उत्तर प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए जेल प्रशासन ने कैदियों को सामान देने पर रोक लगा दी है।

लखनऊ/कन्नौज। उत्तर प्रदेश की सभी जेलों में बंदियों और कैदियों को परिजनों की ओर से दी जाने वाली दैनिक सभी सामग्री पर रोक लगा दी गई है। कैदियों से मुलाकात पर 14 महीने से प्रतिबंध है। जिसे लेकर बंदी और उऩके परिजन पहले से परेशान हैं। कैदियों के परिजिनों से फोन पर बात कराने का प्रावधान था।

पुलिस महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं (यूपी) आनंद कुमार ने जारी किए पत्र में कहा है कि इन दिनों कोविड-19 की दूसरी लहर चल रही है। जेलों में निरुद्ध बंदियों को संक्रमण से बचाने के लिए परिजनों की ओर से भेजा जाने वाला सामान अब नहीं लिया जाएगा। उस पर अग्रिम आदेश तक पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। उन्होंने कहा है कि अगर इस आदेश का उल्लंघन हुआ तो कारापाल और जेल अधीक्षक संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे।"

पुलिस महानिदेशक कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं द्वारा 18 मई को जारी लेटर में कहा गया है कि ये कदम कोविड की रोकथाम को लेकर प्रभावी कदम के रुप में है।

पहले 24 घंटे बाद सामान दे दिया जाता था

यूपी के कन्नौज के अनौगी में बनी जिला कारागार के जेलर एसके यादव कहते हैं कि "पहले बंदियों के परिजन सामान दे जाते थे, चेक करने के बाद उसे रख लिया जाता था। 24 घंटे के बाद सम्बंधित बंदी या कैदी को मुहैया करा दिया जाता था, लेकिन अब इस पर रोक लगा दी गई है।" उन्होंने बताया कि 'इस दौरान पहले जो भी सामान आया है उसे रोक लिया गया है। अब कोई भी सामग्री नहीं दी जाएगी। पहले सैनेटाइज कर दे दिया जाता था।'

जेल में यह सामान देने की छूट थी

जेल में निरुद्ध लोगों को परिजन लाई-चना, मिर्च, प्याज, कपड़े, पैकेट की नमकीन, बिस्किट, फल, हेयर ऑयल, साबुन, शैम्पू, धार्मिक व साहित्य की पुस्तकें आदि सामग्री उपलब्ध करा देते थे, लेकिन अब नहीं दे सकेंगे।

पहले ऐसे दिया जाता था कैदियों को सामान। फाइल फोटो


परिजनों की भी सुनों व्यथा

कन्नौज के थाना ठठिया क्षेत्र निवासी अरविंद कुमार बताते हैं कि "जिला जेल की सुरक्षा पर पूरा भरोसा है। मन विचलित हो रहा था, इसलिए जिला जेल में आए। यहां मुलाकात तो संभव नहीं है, फिर भी जरूरी सामान देने आए थे।" फर्रुखाबाद जिले के कमालगंज थाना क्षेत्र के फतेहपुर से आईं नीतू राठौर ने बताया कि "उसके पिता जेल में बंद हैं। जब से चित्रकूट की घटना हुई है तो घबराहट होने लगी और हाल जानने के लिए वह यहां आ गईं। फोन पर भी चार दिनों से बात नहीं हुई है।" पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की चित्रकूट जेल में दो गुटों के बीच खूनी हुआ था, जिसके बाद जेल प्रशासन और सतर्क हो गया है। सामान पर पाबंदी भी लोग उससे जोड़कर देख रहे है।

ठठिया के ही अनिल कुमार ने बताया कि "भाई काफी दिनों से अनौगी जेल में बंद है, जेल की सुरक्षा को लेकर चिंता हुई तो यहां सामान लेकर आ गए।"

फोन से कराई जाती है बात

जेल प्रशासन की माने तो मुलाकात बंद होने के बाद बंदियों व कैदियों की रोस्टर से परिजनों से फोन पर बात कराई जाती है। जेल के फोन का प्रयोग कर इसका लाभ दिया जाता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) आंकड़ों के अनुसार, "31 दिसंबर 2019 तक देश की अलग-अलग जेलों में 4,78,600 लोग कैद थे, जिसमें उत्तर प्रदेश की जेलों में सबसे ज्यादा 1,01,297 लोग कैद थे। आंकड़ों के अनुसार जेल में बंद सबसे ज्यादा कैदियों की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी। कुल कैदियों में से 2,07,942 यानी 43.4% कैदी 18 से 30 साल के लोग थे, जबकि 2,07,104 कैदियों की उम्र 30 से 50 के बीच थी।

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