किसान के बेटे ने बनाई ऐसी मशीन, हजारों किसानों को मिलेगा फायदा

खेतों में उगने वाले जहरीले पौधों को उखाड़ने के लिए हाथ से चलने वाली बनाई मशीन, अन्वेषण के लिए इस बाल नवप्रवर्तक को राष्ट्रपति के हाथों सम्मान भी मिल चुका है

बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)। " उस दिन सड़क पर तड़प रहे घायल बैल और बैलगाड़ी चालक को देख मैंने सोच लिया एक ऐसी बैलगाड़ी बनाऊंगा जिसमें लाइट और हॉर्न होगी। जिससे इस तरह की घटनाएं न हो।" जनपद निवासी एक बाल नवप्रवर्तक ने ऐसे बैलगाड़ी बनाई है जिसमें, लाइट, साउंड और हॉर्न की सुविधा है। इसके साथ-साथ किसानों के लिए कई उपकरण बना चुके हैं। इस अन्वेषण के लिए बाल नवप्रवर्तक को राष्ट्रपति के हाथों सम्मान भी मिल चुका है।

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विकास खंड शिवपुरा के गांव बरगदही निवासी आशुतोष पाठक बीएससी प्रथम वर्ष के छात्र हैं। ग्रामीण परिवेश से होने के कारण आशुतोष ग्रामीणों और किसानों की परेशानी अच्छी तरह समझते हैं। आशुतोष ने बताया, " पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के किसानों के लिए बैलगाड़ी ही कृषि यातायात का प्रमुख साधन है। लेकिन बैलगाड़ी में न तो लाइट होती है और न तो हॉर्न। इसके साथ-साथ सुरक्षा की दृष्टि से अन्य साधन भी नहीं होते हैं। इन कारणों से किसानों को रात में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यही देखकर मैंने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि किसानों और बेजुबान पशुओं दोनों की सुरक्षा हो सके।"


आशुतोष ने आगे बताया, " मैंने बैलगाड़ी की पहियों में डायनमो और किसान के बैठने की जगह पर एक छतरी के साथ सौर ऊर्जा का प्लेट लगाकर बैलगाड़ी में कई सुधार किए। एक ऐसी बैलगाड़ी का निर्माण किया जिसमें हेडलाइट, हॉर्न, छोटा सा पंखा और किसान के मनोरंजन के लिए छोटा सा साउंड सिस्टम तथा पानी से बचने वाली छतरी भी लगा दी।"

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जहरीले पौधे उखाड़ने वाली बनाई मशीन

आशुतोष ने आधुनिक बैलगाड़ी के अलावा कई और कृषि यंत्र बनाए हैं जो किसानों के लिए काफी उपयोगी हैं। खेतों में उगने वाले जहरीले पौधों को उखाड़ने के लिए हाथ से चलने वाली मशीन बनाई है जिससे किसान को बिना किसी परेशानी के इन पौधों से निजात मिल सकेगी। आशुतोष घर में पड़ी बेकार चीजों से कई उपयोगी मशीनें बनाते हैं जो दैनिक जीवन में काफी उपयोगी होती हैं।



गांव के बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं

आशुतोष के पिता रमेश चंद्र पाठक ने बताया, " आशुतोष बचपन से ही मेधावी रहा है। बचपन में वे ऐसे-ऐसे प्रश्न करता था जिसका जवाब देना काफी मुश्लिक होता था। जब तक उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिल जाता वह शांत नहीं होता था। उसकी वैज्ञानिक सोच बचपन से ही है। आशुतोष को बच्चों को पढ़ाने का भी शौक है। प्रत्येक रविवार को आशुतोष अपने गांव के बच्चों को पढ़ाते भी हैं। आशुतोष को देखकर गांव के कई बच्चों का रुझान विज्ञान विषय में हो गया है। वे भी इनकी तरह कुछ नया करना चाहते हैं। "

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गांव में पहुंची बिजली, बनने लगी सड़क

आशुतोष के प्रयास से उसके गांव में बिजली पहुंच गई है और पक्की सड़क का निर्माण कार्य जारी है। आशुतोष ने बताया," जब मुझे बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा सम्मानित किया गया, तब मैंने राष्ट्रपति महोदय में अपनी बात कही। गांव में बिजली और सड़क की समस्या उनके सामने रखी। उन्होंने तत्काल मेरे गांव में बिजली और सड़क पहुंचाने की बात कही। अब मेरे गांव में बिजली आ गई और सड़क का निर्माण चल रहा है। मेरे गांव वाले बहुत खुश हैं।"

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