उत्तर प्रदेश को मिला पहला तितली पार्क, जानें खासियत

उत्तर प्रदेश को मिला पहला तितली पार्क, जानें खासियतदर्शकों के लिए खुल गया उत्तर प्रदेश का पहला तितली पार्क। 

अगर आपको रंग बिरंगी तितलियों को देखना है तो कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं है। लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में उत्तर प्रदेश का पहला तितली पार्क खोला गया है। इससे पहले मुंबई, दिल्ली, गोवा, बेंगलुरु, केरल में ये पार्क मौजूद हैं।

दर्शकों के लिए यह पार्क आज से खुल गया है, खूबसूरत एंट्री गेट, अत्याधुनिक पॉली हाउस, तीन नेचुरल तालाब, पांच सौ गमलों और लगभग बीस प्रजाति के चार हजार होस्ट और नेक्टर प्लांट से इस पार्क को सजाया गया है। वन एवं वन्य जीव मंत्री दारा सिंह चौहान ने इस तितली पार्क का उद्घाटन किया।

पार्क में आठ सौ मीटर लम्बे पाथ-वे के एक ओर पेड़ पौधे और बीच में तालाब है। तितली पार्क में पीकॉक पेंजी, स्ट्राइप टाइगर, प्लेन टाइगर, कॉमन इमीग्रेंट, लाइम, कॉमन क्रो, एग लाई, द ग्रेट एग लाई, ब्लू पेंजी, लेमन पेंजी, कॉमन केस्टर, कॉमन ग्राक यलो, कॉमन वॉर्डर आदि तितलियां शामिल हैं।

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तितलियों की प्रजातियों के बारे में पूर्व वन सरंक्षक मोहम्मद एहसन ने कहा, "पूरी दुनिया में तितलियों की दो हजार प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसमें 1500 से अधिक प्रजातियां भारत में पाई जाती हैं। एक तितली का औसत जीवनकाल केवल 30 दिन का होता है। कुछ तितलियां 6-7 दिन तक ही जीवित रहती हैं। यह हजारों किलोमीटर तक पलायन करती हैं। इस रास्ते में उनकी पिछली पीढ़ी खत्म होती जाती है और नई जन्म लेती जाती है। कुछ तितलियों के पंख केवल तीन से चार सेंटीमीटर के होते हैं जो हमें दिखायी भी नहीं देते।"

वन एवं वन्य जीव मंत्री दारा सिंह चौहान ने इस तितली पार्क का उद्घाटन किया।

मधुमक्खी के बाद तितली दूसरा जीव है जो परागण क्रिया के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक है। जू के निदेशक आर के सिंह ने बताया, इस पार्क दो एकड़ की जगह में एक करोड़ 24 लाख रुपये की लागत से बनाया गया है। देखने आए लोगों को 20 रूपए देने होंगे और एक घंटे तक वो इस पार्क की सैर कर सकेंगे। पार्क का समय सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक होगा। पार्क के तीनों तालाबों में कछुओं और मछलियों को भी रखा जाएगा।

सिंह ने आगे बताया, "ज्यादा भीड़ से पार्क का माहौल प्रभावित न हो इसके लिए कम से कम लोगों को भेजा जाएगा। तितलियों और पौधों की सुरक्षा के लिए 20 लोगों को ही पार्क में प्रवेश करने दिया जाएगा, जिससे तितलियों को परेशानी न हो।"

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बढ़ते प्रदूषण,शहरीकरण, वनों के कटान, कीटनाशक दवाओं आदि से लगातार तितलियों को क्षति पहुंच रही है। ऐसे में इनकी सुरक्षा के लिए भारत में कई जगहों पर तितली पार्क बनाए गए है:

बेंगलूरू का तितली पार्क

बन्नेरघाटा तितली पार्क भारत का सबसे पहला तितली पार्क है।यह पार्क तकरीबन 7.5 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पार्क की स्थापना कर्नाटक के चिड़ियाघर प्राधिकरण, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय और पारिस्थितिकी और पर्यावरण के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए अशोक ट्रस्ट(एटीआरईई) के द्वारा 2006 में की गई थी। इस पार्क में तितलियों का संरक्षण करना, उनपे रिसर्च करना और बंद रखकर तितलियों का प्रजनन करना है। इस पार्क से लोगों को तितलियों के बारे में कई जानकारियां और उनके जीवन चक्र के बारे में पता चलता है।

शिमला का तितली पार्क

बन्नेरघाटा तितली पार्क के ही तर्ज़ पर ही शिमला के तितली पार्क को बनाया गया है। इस पार्क में भी तितलियों का संरक्षण और संर्वधन किया जा रहा है। यह भारत का दूसरा बड़ा पार्क है।

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ठाणे का ओवालेकर वाड़ी तितली बाग

इस बाग में लगभग 70 प्रकार प्रजाति की तितलियों को एक साथ देख सकते है जिनकों किसी पिजंडे में कैद नहीं किया गया है। यह स्वतंत्र होकर घूमती है। ओवालेकर वाड़ी तितली बाग, ठाणे( मुंबई) की सरहद पर एक खेतिहर भूमि को ही बदल कर बनवाया गया था। यहां की तितलियां कृत्रिम नस्ल की नहीं हैं, वे प्राकृतिक हैं।

पोंडा का बटरफ्लाइ कन्सर्वेटरी

मसालों के खेत और मंदिरों के साथ ही पोंडा में तितली पार्क बना हुआ है। लगभग 133 प्रकार की प्रजाति की तितलियां यहां आपको देखने को मिलेंगी।

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