सूखा पड़ने पर किसान इन फसलों की करें खेती

संभावित सूखे की आशंका से निपटने के लिए कृषि विभाग ने अपनी ओर से तैयारियां कर ली हैं। इस बार खरीफ में कम पानी में पैदा होने वाली फसलों के उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है।

सूखा पड़ने पर किसान इन फसलों की करें खेती

लखनऊ। मानसून की बेरूखी को किसानों के साथ-साथ सरकार भी परेशान है। क्योंकि समय से बारिश न होने के कारण धान के उत्पादन में कमी आयेगी। बारिश नहीं होने के कारण सूखे जैसा नजारा देखने को मिल रहा है। अब इस स्थिति से निपटने की तैयारी में सरकार जुट गई है। प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर खरीफ फसलों की बुआई व रोपाई की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने आकस्मिक योजना के अंतर्गत कम पानी में होने वाली फसलों जैसे- ज्वार, बाजरा, उर्द, काकून, कोदो, सावां आदि फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने तथा बीजों की व्यवस्था सुनिश्चित कराए जाने का निर्देश दिया।

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शाही ने बताया प्रदेश के 75 जिलों में अब तक प्रदेश के 03 जनपद (श्रावस्ती, खीरी एवं मथुरा) में सर्वाधिक 120 प्रतिशत तक वर्षा हुयी है, जबकि 05 जनपदों (शाहजहांपुर, हाथरस, बहराइच, फर्रूखाबाद एवं सहांरनपुर) में सामान्य वर्षा 80-120 प्रतिशत हुयी है। शेष 67 जनपदों में वर्षा कम, बहुत कम या छिटपुट हुयी है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए कृषि मंत्री ने प्रदेश में अब तक सामान्य से कम वर्षा होने पर चिंता जाहिर करते हुए निर्देशित किया कि वर्षा कम होने की स्थिति में प्रमुख सचिव, सिंचाई को पूरी क्षमता से नहरों को चलवाकर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाये। कृषि मंत्री ने कहा कि 11 जुलाई से प्रदेश में व्यापक रूप से वर्षा शुरू हो गयी है और मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार सामान्य वर्षा की संभावनाएं है। लेकिन यदि वर्षा सामान्य से कम होती है तो आकस्मिक योजना के अंतर्गत कम पानी चाहने वाली फसलों जैसे- ज्वार, बाजरा, उर्द, काकून, कोदो, सावां आदि फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाए तथा इनके बीजों की व्यवस्था सुनिश्चित करायी जाए। सिंचाई के सिंचित साधनों के होने की स्थिति में ही धान की फसल की बुवाई/रोपाई करायी जाय, जिससे उन्हें आसानी से बचाया जा सके।

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कृषि निदेशक सोराज सिंह ने अवगत कराया कि प्रदेश में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा आकस्मिक योजना तैयार कर जनपदों को उपलब्ध करा दी गयी है, जिसके अनुसार एक माह से अधिक समयावधि के धान की नर्सरी होने पर पौधे का 2/3 भाग काटकर तथा एक पौधे के स्थान पर 2-3 पौधो की रोपाई किये जाने की सुझाव दिये गये हैं। रोपाई किये गये खेत में हल्की सिंचाई किये जाने की भी जानकारी दी गयी है, ताकि दिन में पानी खेत में न भरे अन्यथा अधिक तापक्रम होने पर पौधे जल सकते है। यदि 15 जुलाई तक अच्छी वर्षा नहीं होती है तो ऐसी स्थिति में ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग आदि की बुवाई की जाय। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, अरहर आदि की बुवाई कराने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होनें अवगत कराया कि प्रदेश के राजकीय कृषि बीज भण्डारों पर पर्याप्त बीज उपलब्ध है।

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