यूपी में भी होगी वेलेंसिया ऑरेंज और ड्रैगन फ्रूट जैसे से कई विदेशी फलों की खेती  

यूपी  में भी  होगी वेलेंसिया ऑरेंज और ड्रैगन फ्रूट जैसे से कई विदेशी फलों की खेती  बड़े पैमाने पर ड्रैगन फ्रूट की खेती की तैयारी। फोटो- साभार इफको 

अब यूपी में भी विदेशी फलों की बागवानी हो सकेगी। इसके लिए फसल प्रणाली अनुसंधान के वैज्ञानिकों ने शोध के माध्यम से विदेशी प्रजाति के फलों की पौध तैयार की है। पिछले दो साल में शोध के बाद अमेरिकी फल वेलेंसिया ऑरेंज, ड्रैगन फ्रूट आदि फल यूपी के किसानों की आमदनी बढ़ा सकते हैं।

विदेशी फलों की बागवानी के लिए किसानों को गोष्ठी व किसान मेले के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। ताकि किसान आम, अमरूद, नाशपाती आदि के अलावा विदेशी फलों की बागवानी से अपनी आमदनी को दोगुना कर सकें।

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फसल प्रणाली अनुसंधान परियोजना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दुश्यंत मिश्रा बताते हैं, "दो साल पहले विदेशी वैरायटी पर शोध शुरू किया था। शोध में हमने वेलेंसिया ऑरेंज, ड्रैगन फ्रूट, सेब, एप्पल बेर आदि वैरायटी शामिल की थी, जिसमें मेरठ सहित यूपी के अलग-अलग हिस्सों से मिट्टी का भी परीक्षण किया गया था। जिसमें यूपी के ज्यादातर हिस्सों की मिट्टी विदेशी फल के अनुकूल पाई गई। साथ ही वलेंसिया ऑरेंज प्रजाति की ग्रोथ सबसे ज्यादा यूपी की जलवायु के अनुकूल मिली। इसके अलावा पौधों पर लगे फलों में मिठास भी अंतराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप पाई गई।"

अमेरिका में होती है वेलेंसिया ऑरेंज की खेती

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किसानों की आमदनी बढ़े यही संस्थान का उदेश्य है। इसी के चलते कई विदेशी फलों पर शोध किया गया, लेकिन अभी अमेरिकी फल वेलेंशिया ऑरेंज पर सकारात्मक परिणाम आए हैं। किसानों को इसे अपने बागानों में शामिल कर लाभ लेना चाहिए।
डॉ. आजाद सिंह पवार, निदेशक, आईआईएफएसआर

शोध के बाद आए परिणामों के बाद ही उन्होंने किसानों को जागरूक करने की योजना बनाई। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यूपी में किसान अमेरिकी फल वेलेंसिया ऑरेंज को अपने बागानों में लगाए तो निश्चित रूप से उनकी आय बढ़ेगी।

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ये है विशेषता

वेलेंसिया ऑरेंज की सबसे बड़ी विशेषता है कि इस फल पर कोई कीट नहीं लगता। साथ फल में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो मनुष्य में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। साथ ही पर्यावरण को शुद्ध करने में भी इसके पौधों का विशेष योगदान रहता है।

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किसानों को दिया जाएगा प्रशिक्षण

डॉ. मनोज बताते हैं कि शोध में बेहतर परिणाम आए हैं, इसलिए किसानों को जागरूक करने के साथ प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। ताकि उन्हें विदेशी फलों की खेती करने में कोई परेशानी न हो।

डॉ. दुष्यंत मिश्रा बताते हैं कि अब किसानों को परम्परागत खेती के साथ बागवानी की ओर भी कदम बढ़ाना होगा। अभी अन्य फलों पर शोध जारी है, परिणाम आने के आद उनके बारे में भी किसानों को बताया जाएगा। संस्थान किसानों की आय बढ़ाने के लिए आए दिन नए-नए शोध कर रहा है।

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