अब हर थाने के बोर्ड पर लिखे होंगे बाल संरक्षण नियम, लापता बच्चों को मिलेगा ठिकाना 

अब हर थाने के बोर्ड पर लिखे होंगे बाल संरक्षण नियम, लापता बच्चों को  मिलेगा ठिकाना एडीजे राजीव कृष्ण ने कहा, ‘बच्चों पर दया दिखाने की बजाए उनकी मदद की जाए

लखनऊ। सड़क पर बेघर और लापता घूम रहे बच्चों को और भटकना न पड़े, इसके लिए इनकी सुरक्षा और देखरेख के लिए बनाए गए नियम कानून हर थाने के बोर्ड पर लगे होंगे। जिससे हर किसी को इन बाल कल्याण समितियों के अधिकार पता चल सकें और इन बच्चों की बेहतर तरीके से देखरेख हो सके।

लखनऊ में सेव द चिल्ड्रेन और उत्तर प्रदेश पुलिस के साझा प्रयास से विशेष किशोर पुलिस इकाई के साथ एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में लखनऊ जोन के 43 थानों की अलग-अलग विशेष किशोर पुलिस इकाई में तैनात बाल कल्याण अधिकारियों को बच्चों से जुड़े किशोर कानून में उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई।

सेव द चिल्ड्रेन की अंजली सिंह ने बताया, “जो बच्चे अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं, या फिर बाल मजदूरी कर रहे होते हैं। ऐसे बच्चों को एक ठिकाना मिल सके, उन्हें उनके अधिकार मिल सकें। इसके लिए सेव द चिल्ड्रेन और उत्तर प्रदेश पुलिस ने साथ मिलकर एक प्रयास शुरू किया है। इसके लिए एक निर्देशिका बनाई गयी है, जिसमें सभी नियम कानूनों का जिक्र हुआ है।”

वो आगे बताती हैं, "हर थाने के बाल कल्याण पुलिस अधिकारी को एक जैकेट भी दी जायेगी, जिसे पहनकर वो बच्चों से बात करेंगे। इसके अलावा हर थाने पर बाल अधिकार नियम कानून के बोर्ड भी लगेंगे, जिससे यह जानकारी सभी को पता हो सके।”

सेव द चिल्ड्रेन एक अन्तराष्ट्रीय संस्था है, जो 150 देशों और भारत के 18 राज्यों एवम उत्तर प्रदेश के छह जिलों में बच्चों के अधिकारों पर काम करती है।

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एडीजे राजीव कृष्ण ने कहा, “सड़क पर घूमने और फुटपाथ पर रहने वाले बच्चों के साथ काम करना हमारी जिम्मेदारी है। ऐसे बच्चों पर दया दिखाने से बेहतर है कि हम उनके भविष्य के लिए कुछ करें। इस गोष्ठी के बाद ऐसी उम्मीद है मुझे कि इन बच्चों का भविष्य बेहतर होगा।”

एसपी ग्रामीण डॉ. सतीश कुमार के दिशा निर्देशन में इस विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया था। डॉ सतीश कुमार ने बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को विशेष प्रकार की बनाई गई जर्सी (जैकेट) दी। अभी पायलट के तौर पर कुछ लोगों को दी गयी हैं। जल्द ही इसे लखनऊ जोन के 43 थानों में विशेष किशोर पुलिस इकाई को 100 जैकेट दी जाएंगी।

चाइल्ड लाइन के निदेशक डॉ. अंशुमाली शर्मा ने कहा, “बाल कल्याण अधिकारी गलियों में घूम रहे बच्चों का रेस्क्यू करेंगे। इन बच्चों की बेहतर देखभाल हो सके इसके लिए इनके संरक्षण और पुनर्वास पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा।”

सेव द चिल्ड्रेन के महाप्रबंधक सुरोजित चटर्जी ने बताया, “जो बच्चे अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं उन्हें नहीं पता होता है कि अब वो कहां जाएं। ऐसी स्थिति में हर थाने पर तैनात बाल कल्याण पुलिस अधिकारी की अहम जिम्मेदारी होगी।”

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