यूपी दिवस पर दिखा हथकरघा कारीगरों का हुनर

Devanshu Mani TiwariDevanshu Mani Tiwari   25 Jan 2018 9:21 AM GMT

यूपी दिवस पर दिखा हथकरघा कारीगरों का हुनररामपुर ज़िले से आई सरला

यूपी के रामपुर ज़िले से आई सरला पैबंदकारी कला की मदद से कपड़ों पर कारीगरी का काम पिछले 20 वर्षों से कर रही हैं। यूपी दिवस में उनको लखनऊ के शिल्पग्राम आकर अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका मिला है। उनका मानना है कि इस तरह के मंच उनके जैसी कारीगरों के लिए बहुत ज़रूरी हैं, जो गाँवों में रहकर काम करते हैं।

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यूपी दिवस पर सरला की तरह ही प्रदेश के सभी जिलों से आए कारीगरों ने अपने हस्तशिल्प उत्पादों और कलाकृतियों के स्टॉल लगाकर अपने हुनर को सरकार से सामने लाया। लखनऊ के अवध शिल्प ग्राम में यूपी दिवस की शुरूआत पर भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक जनपद-एक उत्पाद' योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्येश्य पुराने उद्योगों को बढ़ावा देना है और हर जिले के छोटे-छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देना। ताकि यहां के जो युवा हैं वो पलायन न करें। दो दिवसीय यूपी दिवस में दूर-दूर से लोककलाकार व हस्तकला के कारीगर शमिल हुए।

रामपुर जिले में 20,000 से अधिक लड़कियों को पैबंदकारी कला से जोड़ चुकीं सरला बताती हैं, ''पैबंदकारी कपड़ों पर कड़ाई व ज़रदोज़ी की एक कला है। यह मुख्य रूप से रामपुर जिले में होती है। हमें यहां आकर इस कला को आगे बढ़ाने का मौका मिला है। इससे हमारे उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और इस कला से अधिकतर लोग जुड़ पाएंगे।''

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यूपी दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति ने लखनऊ की 109 परियोजनाओं की शुरूआत की और प्रदेश की 25,000 करोड़ की परियोजना का शिलान्यास भी किया। आयोजन में कानपुर के चमड़ा व्यापार, बनारसी सिल्क, इलाहाबाद ज़िले का मूंज उत्पाद व लखनऊ जिले की चिकनकारी से जुड़े कारीगरों ने अलग से स्टॉल लगाकर इन उत्पादों के बनने के तरीकों पर आधारित स्टॉल लगाएं।

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इलाहाबाद के नैनी क्षेत्र से आए मूंज उत्पाद बनाने वाले कारीगर अबसार ने बताया कि इलाहाबाद में बड़े स्तर पर मूंज से बनाई गई बास्केट, थाली, डलिया जैसे उत्पाद बनाए जाते हैं। वैसे,तो मूंज उत्पादों की पहुंच सिर्फ इलाहाबाद जिले तक ही है, लेकिन इस मेले में सरकार ने हमें बुलाया है, इससे हमारा कारोबार भी अब और फैलेगा। । इससे हमारे उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और इस कला से अधिकतर लोग जुड़ पाएंगे।''

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