परम धर्मादेश: राम मंदिर पर चार सप्ताह में पूरी हो सुनवाई, काशी में मंदिर तोड़ा जाना असंवैधानिक

काशी में तीन दिन चले परम धर्म संसद के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार पर राम मंदिर मुददे से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में परम-धर्मादेश जारी कर अयोध्या में 221 मीटर ऊंची राम प्रतिमा बनाकर जनता को गुमराह करने की बात कही है

परम धर्मादेश: राम मंदिर पर चार सप्ताह में पूरी हो सुनवाई, काशी में मंदिर तोड़ा जाना असंवैधानिक

वाराणसी। वाराणसी में तीन दिन चले परम धर्म संसद के बाद बुधवार को अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार पर राम मंदिर मुददे से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में परम-धर्मादेश जारी कर अयोध्या में 221 मीटर ऊंची राम प्रतिमा बनाकर जनता को गुमराह करने की बात कही है। इसके साथ ही आगामी शीत सत्र में राममंदिर के लिए अध्यादेश लाने की मांग की है।

वाराणसी में आयोजित तीन दिवसीय परम धर्म संसद में सभी संसदीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि, चारों शंकराचार्य के प्रतिनिधि, धार्मिक गुरु, संत और 36 राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। परमधर्म संसद की कार्यवाही संसद की चली। हिंदू धर्म, गंगा और राम मंदिर पर चर्चा हुई। धर्म संसद में पहले दिन यानी 25 नवम्बर के पहले सत्र में बनारस के पक्कामहल में विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के लिए मंदिर व घर तोड़ने का मुद्दा छाया रहा। धर्म संसद की शुरूआत ही इस मुद्दे पर चर्चा से हुई।

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अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, " चुनाव नजदीक है, ऐसे में सरकार जनता को गुमराह करने में लगी है। राममंदिर बनाने की जगह राम मूर्ती बनाने की बात कह रही है। मामला जब कोर्ट में चल रहा है ऐस मौके पर प्रदेश सरकार निर्णय में हो रही देरी का लाभ उठाकर दूसरी योजना के ततह 221 मीटर ऊंची राम की प्रतिमा बनाने की बात कह रही है।"

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उन्होंने आगे कहा, " राम मंदिर निर्माण के लिए रामभक्तों ने अरबों रुपए और सोने-चांदी के गहने दान किए है, जो विश्व हिंदू परिषद के पास है। इसका कोई अता-पता नहीं है। हमें आशंका है कि ये धन राम मूर्ती बनाने में खर्च किया जा सकता है, जो एक आर्थिक अपराध है। लोगों ने पैसा राम मंदिर बनाने के लिए दिया था, न की राम की प्रतिमा के लिए।"


अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, " राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र को राम जन्मभूमि मामले को राष्ट्रीय महत्व और लोकहित का मामला घोषित करने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके साथ ही लोकहित का मामला घोषित होने पर सुप्रीम कोर्ट को 4 सप्ताह में पूरी करनी होगी सुनवाई। हम लोगों ने हाईकोर्ट में सिद्ध कर दिया है कि बाबर अयोध्या कभी आया ही नहीं था। हम सुप्रीम कोर्ट से अपील करेंगे हमारे मामले पर त्वरित निर्णय करे।"

बनारस में चल रही परम धर्म संसद में जुटे धर्म गुरुओं का कहना है कि राम मंदिर और अन्य हिन्दू धार्मिक मामलों पर फैसला लेने का अधिकार केवल शंकरचार्य को है। अयोध्या धर्म सभा में केवल राजनैतिक हितों को साधने वाले लोग पहुंचे है। इतना ही नहीं, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की अध्यक्षता में हुई परम धर्म संसद में अयोध्या से आने वाले साधुओं और आम जनता को रास्ते में ही रोका गया।

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वहीं लखनऊ में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा, "सभी चाहते हैं कि राम जन्मभूमि के मुद्दे पर जल्द हल निकले बीजेपी अपने संकल्प पत्र में अपने विचार रख चुकी है। किन्हीं कारणों से माननीय न्यायायल से निर्णय आने में देरी हुई? इसलिए जनता के मन में सवाल है।' इससे पहले डिप्टी सीएम 25 को वाराणसी भी पहुंचे थे, उन्होंने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे उन्होंने वहां भी ऐसा ही बयान दिया था। लेकिन वो परम धर्म संसद में शामिल नहीं हुए थे।

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